नए लेबर कोड से बदलेंगे श्रम कानून, उद्योग और कर्मचारियों पर होगा बड़ा असर


उद्योगों, एचआर प्रोफेशनल्स और कर्मचारियों के लिए आयोजित सेमीनार में नए श्रम कानूनों के प्रमुख प्रावधानों और बदलावों की दी गई विस्तृत जानकारी

भीलवाड़ा। पंकज पोरवाल। नए लेबर कोड देश की श्रम व्यवस्था में व्यापक बदलाव लेकर आने वाले हैं। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए श्रम कानूनों का प्रभाव उद्योग, व्यापार, सेवा क्षेत्र और करोड़ों कर्मचारियों पर पड़ेगा। इन्हीं महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी देने के उद्देश्य से कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई-राजस्थान) एवं मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को मेवाड़ चैम्बर भवन में विशेष सेमीनार आयोजित किया गया। इसमें श्रम कानून विशेषज्ञों ने नए लेबर कोड के विभिन्न प्रावधानों और उनके प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विशेषज्ञों ने समझाए नए श्रम कानून के प्रमुख प्रावधान

सेमीनार में पीडब्ल्यूसी के विशेषज्ञ गौरव वर्मा एवं अक्षय पुरोहित ने बताया कि नए लेबर कोड का उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना, कार्यस्थलों पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करना, वेतन की समान परिभाषा तय करना तथा उद्योगों और कर्मचारियों के बीच संबंधों को अधिक पारदर्शी एवं संतुलित बनाना है।

उन्होंने कहा कि नए कानूनों के लागू होने से श्रम व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी और उद्योगों के साथ-साथ कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलेगा।

प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों की बताई आवश्यकता

मेवाड़ चैम्बर के मानद महासचिव आर.के. जैन ने कहा कि श्रम कानूनों में हो रहे व्यापक बदलावों को देखते हुए उद्योगों, व्यापारिक संस्थानों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कंपनी सचिवों, एचआर प्रोफेशनल्स और श्रम कानूनों से जुड़े अधिकारियों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जागरूकता और प्रशिक्षण के माध्यम से ही नए प्रावधानों का प्रभावी और विधिसम्मत अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सेमीनार में आरएसडब्ल्यूएम लिमिटेड के एन.के. बहेड़िया, लघु उद्योग भारती के सुमित जागेटिया, एचआर प्रोफेशनल्स सोसाइटी के अध्यक्ष घनश्याम नन्दवाना, सचिव संजय त्रिपाठी सहित 100 से अधिक श्रम प्रबंधक, उद्योग प्रतिनिधि एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मेवाड़ चैम्बर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. आर.सी. लोढ़ा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

सोशल सिक्योरिटी कोड में होंगे बड़े बदलाव

विशेषज्ञ गौरव वर्मा ने बताया कि नए सोशल सिक्योरिटी कोड के अंतर्गत कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ), ग्रेच्युटी, कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई), मातृत्व लाभ और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। पहली बार असंगठित क्षेत्र, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इससे ऐसे लाखों कर्मचारियों को लाभ मिलेगा जो अब तक पारंपरिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से बाहर थे।

वेतन की नई परिभाषा से बदलेंगे कई नियम

गौरव वर्मा ने कहा कि नए लेबर कोड का सबसे बड़ा बदलाव वेतन (वेज) की नई परिभाषा को लेकर किया गया है। अब बेसिक वेतन के साथ कई प्रकार के अलाउंस को भी वेतन की गणना में शामिल किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इससे पीएफ, ग्रेच्युटी, बोनस तथा अन्य वैधानिक देयताओं की गणना में एकरूपता आएगी, जिससे कर्मचारियों के दीर्घकालीन हित सुरक्षित होंगे। हालांकि इसके चलते उद्योगों को अपनी वेतन संरचना और पेरोल प्रणाली में आवश्यक बदलाव भी करने होंगे।

कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा

पीडब्ल्यूसी के विशेषज्ञ अक्षय पुरोहित ने ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन्स कोड की जानकारी देते हुए कहा कि नए कानून में कार्यस्थलों पर सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर कार्य परिस्थितियों को प्राथमिकता दी गई है।

उन्होंने बताया कि उद्योगों में कर्मचारियों की सुरक्षा, दुर्घटनाओं की रोकथाम, स्वास्थ्य मानकों के पालन तथा महिला कर्मचारियों सहित सभी श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने संबंधी प्रावधानों को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनाया गया है।

इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड से प्रक्रियाएं होंगी सरल

अक्षय पुरोहित ने बताया कि इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड के तहत उद्योगों और कर्मचारियों के बीच संबंधों को अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

नियुक्ति, सेवा शर्तें, औद्योगिक विवादों का समाधान, छंटनी, पुनर्गठन तथा श्रमिक संगठनों से जुड़े अनेक प्रावधानों में संशोधन कर प्रक्रियाओं को सरल और स्पष्ट बनाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे औद्योगिक विवादों के त्वरित समाधान और औद्योगिक शांति बनाए रखने में मदद मिलेगी।

उद्योगों को समय रहते करना होगा अनुपालन

मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने कहा कि नए लेबर कोड के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उद्योगों के एचआर, वित्त, विधिक एवं प्रशासनिक विभागों को नए प्रावधानों की विस्तृत जानकारी होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वेतन संरचना, पीएफ, ग्रेच्युटी, सेवा नियम, नियुक्ति पत्र, एचआर नीतियों तथा श्रम कानूनों से संबंधित कॉम्प्लायंस में समय रहते आवश्यक संशोधन करना जरूरी होगा, ताकि भविष्य में किसी कानूनी जटिलता का सामना न करना पड़े।

उद्योग और कर्मचारियों के हितों में संतुलन बनेगा

कार्यक्रम के प्रारंभ में सीआईआई उदयपुर चैप्टर के अध्यक्ष अमित तलेसरा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि नए लेबर कोड का उद्देश्य ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग फॉर वर्कर्स’ के बीच संतुलन स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि इससे एक ओर उद्योगों को सरल और पारदर्शी कानूनी व्यवस्था मिलेगी, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और श्रम अधिकार भी पहले से अधिक मजबूत होंगे।

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