जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल से न्यायाधीशों की मौजूदगी में आपसी सहमति से हुआ वर्षों पुराने विवाद का निस्तारण
डीग। अमर दीप सेन। 7 लाख रुपये का चेक बाउंस मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, डीग की मध्यस्थता और न्यायाधीशों की उपस्थिति में आपसी सहमति से सुलझा लिया गया। लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन इस प्रकरण का दोनों पक्षों की रजामंदी से स्थायी निस्तारण हो गया।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, डीग श्री नमो नारायण मीणा के न्यायालय में विचाराधीन इस पुराने आपराधिक प्रकरण का समाधान मध्यस्थता प्रक्रिया के माध्यम से किया गया।
धारा 138 के तहत न्यायालय में लंबित था मामला
न्यायालय के समक्ष प्रकरण संख्या 339/2022 (महेंद्र सिंह बनाम महाराज सिंह) पराक्रम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत विचाराधीन था। यह मामला 23 जून 2021 के 7 लाख रुपये के चेक अनादरण (चेक बाउंस) से संबंधित था।
आपसी सहमति से विवाद के समाधान के उद्देश्य से न्यायालय ने इस प्रकरण को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, डीग को मध्यस्थता के लिए रेफर किया था।
अध्यक्ष हेमराज गौड़ की अध्यक्षता में हुई सफल मध्यस्थता
प्राधिकरण के निर्देशानुसार इस मामले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, डीग के अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री हेमराज गौड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया गया।
3 जुलाई 2026 को आयोजित मध्यस्थता कार्यवाही में श्री हेमराज गौड़ के मार्गदर्शन, विधिक समझ और दोनों पक्षों को दी गई समझाइश के बाद मध्यस्थता सफल रही तथा दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने पर राजी हो गए।
न्यायाधीशों की उपस्थिति में हुआ समझौता
मध्यस्थता कार्यवाही के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, डीग के सचिव श्री राम किशन शर्मा तथा अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री नमो नारायण मीणा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यवाही के दौरान प्रार्थी महेंद्र सिंह की ओर से अधिवक्ता मनोज कुमार खंडेलवाल तथा अप्रार्थी महाराज सिंह की ओर से अधिवक्ता शंकर पाल सिंह उपस्थित रहे।
दोनों अधिवक्ताओं ने सकारात्मक भूमिका निभाते हुए अपने-अपने मुवक्किलों को आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया, जिससे मामले का स्थायी समाधान संभव हो सका।
मध्यस्थता से समय और धन दोनों की बचत होती है
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री हेमराज गौड़ एवं सचिव श्री राम किशन शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता न्यायालयों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने और पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने का प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के जरिए समय और धन दोनों की बचत होती है, साथ ही पक्षकारों के बीच विवाद का शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान संभव हो पाता है। दोनों न्यायिक अधिकारियों ने सफल मध्यस्थता के लिए दोनों पक्षों और उनके अधिवक्ताओं को बधाई भी दी।
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डीग, राजस्थान
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