सीएम योगी ने प्रयागराज मंडल के 3,094 विकास कार्यों को दी मंजूरी, गुणवत्ता पर दिए सख्त निर्देश


प्रयागराज मंडल की चार जिलों की विकास परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता और समयबद्ध निर्माण पर विशेष जोर दिया।

प्रयागराज। विद्रोही सामना संवाददाता। सीएम योगी ने प्रयागराज मंडल के विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए लोक निर्माण विभाग की विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन किया और वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित विकास कार्यों को मंजूरी प्रदान की। सोमवार को मेला प्राधिकरण स्थित आईसीसीसी सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण कराए जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक के प्रारम्भ में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग ने गत वर्ष स्वीकृत परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति की जानकारी देते हुए वर्ष 2026-27 के लिए विधानसभा-वार प्रस्तावित विकास कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रयागराज मंडल की कुल 28 विधानसभा क्षेत्रों की क्रमवार समीक्षा की। इनमें प्रयागराज की 12, प्रतापगढ़ की 7, फतेहपुर की 6 तथा कौशाम्बी की 3 विधानसभा क्षेत्र शामिल रहे। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों से सुझाव एवं फीडबैक भी प्राप्त किए।

चार जिलों के हजारों विकास कार्यों को मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026-27 के लिए प्रयागराज जनपद में लगभग ₹9,668.27 करोड़ की लागत से प्रस्तावित 1,168 विकास कार्यों, प्रतापगढ़ में लगभग ₹2,053.36 करोड़ की लागत के 1,092 कार्यों, फतेहपुर में लगभग ₹3,378.37 करोड़ की लागत के 521 कार्यों तथा कौशाम्बी में लगभग ₹915.13 करोड़ की लागत के 313 विकास कार्यों को अनुमोदन प्रदान किया। इस प्रकार चारों जिलों में कुल 3,094 विकास कार्यों के प्रस्तावों को स्वीकृति मिली।

सलोरी-हेतापट्टी गंगा पुल परियोजना की प्रगति की समीक्षा

बैठक में प्रयागराज में शास्त्री पुल के समानांतर सलोरी/बघाड़ा से हेतापट्टी मार्ग पर प्रस्तावित गंगा पुल की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि परियोजना का साइट मोबिलाइजेशन पूरा हो चुका है तथा डिजाइन एवं ड्राइंग तैयार कर ली गई है।

इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने आईआईटी से आवश्यक तकनीकी परीक्षण कराते हुए गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखते हुए निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।

नए यमुना पुल के अलाइनमेंट की होगी पुनः समीक्षा

बैठक में करैलाबाग से मड़ौका मार्ग पर पुराने नैनी पुल के समानांतर प्रस्तावित नए यमुना पुल की भी समीक्षा की गई। इस पुल को भविष्य में बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की परिकल्पना की गई है।

समीक्षा के दौरान जनप्रतिनिधियों ने प्रस्तावित अलाइनमेंट में सुधार संबंधी सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए व्यवहारिक एवं जनहितकारी दृष्टिकोण से अलाइनमेंट का पुनः परीक्षण करें तथा आवश्यक कार्रवाई शीघ्र पूरी करें।

हंडिया-मेजा पुल परियोजना पर तैयार होगा विस्तृत प्रस्ताव

बैठक में हंडिया (लाक्षागृह घाट) को मेजा (परानीपुर घाट) से जोड़ने वाले प्रस्तावित पुल पर भी विस्तार से चर्चा की गई। यह परियोजना हंडिया, लाक्षागृह, पृथ्वीपुर, मुगलिया एवं दुल्लापुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को सीधे मेजा तथा मिर्जापुर मार्ग से जोड़ते हुए आवागमन को अधिक सुगम बनाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विस्तृत एवं तकनीकी रूप से सक्षम प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र अग्रेतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कांवड़ यात्रा को लेकर कांवड़ पथ विकसित करने का प्रस्ताव

समीक्षा बैठक के दौरान कांवड़ यात्रा के समय शास्त्री पुल पर बढ़ने वाले यातायात दबाव को कम करने के उद्देश्य से पुल के समानांतर कांवड़ पथ विकसित करने का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया।

मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए ताकि कांवड़ यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित होने के साथ-साथ सामान्य यातायात और व्यापारिक गतिविधियां भी निर्बाध रूप से संचालित रह सकें।

जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता के आधार पर होंगे विकास कार्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा-वार प्राप्त विकास प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी सांसद और विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करें। उन्होंने कहा कि स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का चयन किया जाए तथा जिन निर्माण कार्यों की सबसे अधिक आवश्यकता हो, उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक परियोजना की सतत निगरानी की जाए और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार सभी कार्य समय पर पूरे कराए जाएं।

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