मुड़िया पूर्णिमा मेला: सात कोस परिक्रमा में उमड़ा जनसैलाब, गूंजे गिरिराज महाराज के जयकारे


आस्था के मिनी कुंभ में लाखों श्रद्धालुओं ने की गिरिराज महाराज की परिक्रमा, राजस्थान सीमा में प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए।

डीग। मुड़िया पूर्णिमा मेला के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से सात कोस परिक्रमा मार्ग मानव श्रृंखला में तब्दील नजर आया। आस्था के मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध इस मेले में लाखों श्रद्धालु इक्कीस किलोमीटर लंबी गिरिराज महाराज की सप्तकोसीय परिक्रमा करने पहुंचे। परिक्रमा मार्ग ही नहीं, बल्कि उसके आसपास कई किलोमीटर तक श्रद्धालुओं का विशाल जनसमूह दिखाई दिया। पूरे क्षेत्र में “गिरिराज महाराज की जय”, “पूंछरी के लौठा की जय” और “राधारानी की जय” के जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना रहा।

मुड़िया पूर्णिमा मेला की शुरुआत 23 जुलाई से हुई थी। प्रारंभ से ही श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का प्रवाह लगातार बढ़ता गया। सात जन्मों के बंधन से मुक्ति, मनोकामनाओं की पूर्ति और पुण्य लाभ की कामना लेकर देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु गिरिराज महाराज की शरण में पहुंचे।

भक्ति और प्रकृति का दिखा अनूठा संगम

परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक गिरिराज महाराज पर दूध अर्पित किया। वहीं मानसी गंगा में लगाए गए फव्वारों के नीचे स्नान एवं आचमन कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। मेले में भक्ति और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

मौसम ने भी कई रंग दिखाए। कभी तेज धूप तो कभी उमस के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। हजारों श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव से परिक्रमा करते हुए धार्मिक जयकारे लगाते नजर आए।

सनातन संस्कृति और विविधता में एकता का प्रतीक बना मेला

मुड़िया पूर्णिमा मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और विविधता में एकता का भी प्रतीक बनकर उभरा। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने एक साथ परिक्रमा कर सामाजिक समरसता और धार्मिक आस्था का संदेश दिया।

श्रद्धालुओं का कहना था कि गिरिराज महाराज की परिक्रमा से आत्मिक शांति प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

राजस्थान सीमा में प्रशासन की रही चाक-चौबंद व्यवस्था

गौरतलब है कि गिरिराज जी की सप्तकोसीय परिक्रमा मार्ग का एक हिस्सा राजस्थान की सीमा में भी आता है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए डीग प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं।

यात्रियों के लिए विश्रामगृहों की व्यवस्था की गई है। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए करीब 600 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। परिक्रमा मार्ग पर साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

अधिकारी लगातार कर रहे हैं निगरानी

मेले की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए जिला कलेक्टर मयंक मनीष, पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अखिलेश शर्मा, सदर थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह गुर्जर, साइबर प्रभारी रामकेश, उपखंड अधिकारी अमित मीणा, तहसीलदार अंकित गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहन सिंह, विकास अधिकारी कामा सहित कई प्रशासनिक अधिकारी लगातार परिक्रमा मार्ग का निरीक्षण कर रहे हैं।

वहीं कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी नायब तहसीलदार विजय तमोलिया, मेघराज सिंह और जितेंद्र जोशी के साथ धर्मवीर संभाल रहे हैं। दूसरी ओर नगर परिषद आयुक्त कुलदीप सिंह तथा छत्रपाल गुर्जर (अकाउंटेंट) के नेतृत्व में सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ एवं व्यवस्थित वातावरण मिल सके।

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