जगतगुरु स्वामी रामदयालजी महाराज ने संत दर्शन के दौरान युवा जागरण, संस्कार और राष्ट्रसेवा को लेकर संगठन पदाधिकारियों से चर्चा की।
भीलवाड़ा। राष्ट्रसेवा और समाजसेवा को जीवन का ध्येय बनाकर कार्य कर रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता सही मायने में ‘सिविल संन्यासी’ हैं। वे बिना किसी स्वार्थ के दिन-रात समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से सेवा कार्य कर रहे हैं। यह विचार श्री रामस्नेही संप्रदाय के प्रधान पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी रामदयालजी महाराज ने विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों के साथ हुई चर्चा के दौरान व्यक्त किए।
विश्व हिंदू परिषद राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री एवं सेवानिवृत्त इंजीनियर सुरेश उपाध्याय (जयपुर) चातुर्मास में साधनारत संतों के दर्शन के लिए भीलवाड़ा पहुंचे। उन्होंने श्री रामद्वारा में चातुर्मास कर रहे जगतगुरु स्वामी रामदयालजी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद के ओमप्रकाश बुलिया, बद्रीलाल सोमानी, प्रांत सह मंत्री एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश किशन गुर्जर (अजमेर), प्रांत सह मंत्री युधिष्ठिर सिंह हाड़ा (कोटा), वनवासी कल्याण परिषद के प्रांत मंत्री रामप्रकाश अग्रवाल, शिक्षक संघ के जयकांत पत्रिया तथा सत्यनारायण जांगिड़ भी मौजूद रहे।
सभी पदाधिकारियों ने जगतगुरु स्वामी रामदयालजी महाराज से आशीर्वाद लिया। वहीं विश्व शांति कल्याण चातुर्मास आयोजन समिति, भीलवाड़ा की ओर से अशोक कुमार अजमेरा, मुरली ईनाणी एवं शिव गगरानी ने सभी अतिथियों का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।
युवाओं को जागृत और संस्कारित करने की जरूरत
जगतगुरु स्वामी रामदयालजी महाराज ने कहा कि श्री रामस्नेही संप्रदाय के संत और भक्त सदैव सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पित रहे हैं और भविष्य में भी इसी भावना के साथ कार्य करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज के सामने सबसे बड़ी आवश्यकता युवाओं को जागृत और संस्कारित करने की है। युवाओं को सही दिशा और संस्कार मिलने से समाज की शक्ति मजबूत होगी।
स्वामी रामदयालजी महाराज ने संगठन के पदाधिकारियों से आह्वान किया कि युवाओं को राष्ट्र, समाज और भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति को सकारात्मक दिशा मिलेगी तो समाज मजबूत होगा और इसी के माध्यम से विश्व कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
सनातन और राष्ट्रसेवा को लेकर हुआ मंथन
बैठक के दौरान सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, समाज संगठन, युवा जागरण और राष्ट्रसेवा सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। संत और संगठन के पदाधिकारियों ने समाज में संस्कारों के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया।
स्वामी रामदयालजी महाराज ने कहा कि समाज की शक्ति उसके संस्कारों और संगठन में निहित है। ऐसे में संत समाज और सामाजिक संगठनों को मिलकर युवा पीढ़ी के भीतर राष्ट्रभक्ति, सेवा, संस्कार और संस्कृति के प्रति चेतना जगाने का कार्य करना चाहिए।
समाजसेवा के कार्यों पर भी हुई चर्चा
मुलाकात के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों ने सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्र में चल रहे विभिन्न सेवा कार्यों और आगामी योजनाओं को लेकर अपने विचार रखे। संगठन की गतिविधियों और समाजहित से जुड़े कार्यों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
संतों के सानिध्य में हुई यह मुलाकात समाज और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम में राष्ट्रसेवा, समाजसेवा और संस्कारों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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Bhilwara, Rajasthan
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