चौरू में तेजादशमी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, देहलवाल बाबा मंदिर में मेले का आयोजन


देहलवाल बाबा और वीर तेजाजी महाराज के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़, भजन-कीर्तन, तेजा गायन और अलगोजे की धुनों से गूंजा चौरू।

चौरू। अशोक कुमार सैनी। उनियारा उपखंड की ग्राम पंचायत चौरू में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी यानी तेजादशमी के अवसर पर देहलवाल बाबा एवं लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज के मंदिर में वार्षिक मेले का आयोजन हुआ। सरोवर के किनारे स्थित देहलवाल बाबा मंदिर धार्मिक आस्था और लोकविश्वास का प्रमुख केंद्र है। तेजादशमी के अवसर पर आयोजित मेले में आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। देर रात तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही और दर्शन के लिए कतारें लगी रहीं। पूरे आयोजन के दौरान आस्था, भक्ति और लोक संस्कृति का विशेष संगम देखने को मिला।

रोशनी और सजावट से जगमगाया देहलवाल बाबा मंदिर

तेजादशमी के अवसर पर देहलवाल बाबा एवं लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज के मंदिर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया। शाम के समय रोशनी से जगमगाता मंदिर और सरोवर में दिखाई देता मंदिर का प्रतिबिंब श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।

सरोवर के किनारे प्राकृतिक वातावरण में स्थित देहलवाल बाबा मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षण का केंद्र नजर आया। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में मेले को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।

दूध और चूरमा का लगाया भोग

मेले के दौरान श्रद्धालुओं ने देहलवाल बाबा एवं तेजाजी महाराज के मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने दूध, चूरमा सहित विभिन्न प्रसाद का भोग लगाया। वहीं, ग्रामवासियों ने बाबा के दरबार में अपने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की।

मंदिर परिसर में पूरे दिन श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की और लोकदेवता तेजाजी महाराज के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

बिंदोरी में झूमे ग्रामीण

मेला समिति के अध्यक्ष कमलेश मीणा (पुजारी) ने बताया कि मेले से पूर्व रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। इसके बाद तेजाजी गायन मंडली एवं डीजे के साथ लोकदेवता देहलवाल बाबा की बिंदोरी निकाली गई।

बिंदोरी गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए गुर्जरों के मोहल्ले, शिव मंदिर बगीची, बालाजी बड़ और बेरवों के मोहल्ले से होकर सूरज घाट बालाजी मंदिर पहुंची। यहां नेझा स्थापित किया गया।

बिंदोरी के दौरान तेजाजी के गायन पर महिलाएं और पुरुष नाचते-गाते हुए शामिल हुए। गांव के प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने बिंदोरी का स्वागत किया। इससे पूरे गांव में धार्मिक और उत्सवी माहौल बना रहा।

अलगोजे की धुन और तेजा गायन ने बांधा समां

तेजादशमी के दिन सुबह से ही श्रद्धालु तेजाजी महाराज के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते रहे। महिलाओं ने मंगल गीत गाए। इसके साथ ही भजनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे।

अलगोजे की मधुर धुनों और तेजाजी के भजनों से पूरा मेला परिसर भक्तिमय हो गया। लोक संगीत और धार्मिक गीतों ने मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित किया।

स्थानीय युवा तेजा गायन कलाकार महेंद्र कुमार धाकड़ एवं बाबूलाल सैनी ने तेजाजी के भजनों और लोकगीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर मौजूद श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और धार्मिक गीतों के साथ माहौल भक्तिमय बना रहा।

मेले में रहमानगर, कासिमपुरा, शहिदाबाद, मौलवीनगर, लसाड़िया, पचाला सहित आसपास के अन्य गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों की मौजूदगी से मेले में पूरे दिन चहल-पहल बनी रही।

तांतियां कटवाने की परंपरा में शामिल हुए श्रद्धालु

लोकमान्यता के अनुसार तेजाजी महाराज को सर्पदंश एवं जहरीले जीवों के दंश से रक्षा करने वाला लोकदेवता माना जाता है। इसी लोकआस्था के चलते तेजादशमी के मेले के दौरान जहरीले जीवों के दंश से पीड़ित लोगों की तांतियां काटने की परंपरा भी निभाई गई।

श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा शांति की कामना की। मेले में इस परंपरा के प्रति भी श्रद्धालुओं की आस्था दिखाई दी।

तीन वर्षों में मंदिर परिसर में हुए विकास कार्य

देहलवाल बाबा सेवा समिति एवं ग्रामवासियों के सहयोग से पिछले करीब तीन वर्षों में मंदिर परिसर में विभिन्न विकास कार्य कराए गए हैं। मुख्य मंदिर ऊंचे थड़े पर स्थित है। मंदिर में लंबे समय से अखंड ज्योति जलाए जाने की परंपरा भी बताई जाती है।

श्रद्धालुओं में मान्यता है कि बाबा के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना से मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के चलते तेजादशमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और बाबा के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं।

भामाशाहों और अतिथियों का किया सम्मान

मेले के दौरान आयोजित कार्यक्रम में समिति की ओर से भामाशाहों, मुख्य अतिथियों, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि, वर्तमान सरपंच एवं अन्य अतिथियों का सम्मान किया गया। अतिथियों का माला पहनाकर और साफा बंधवाकर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों से मेले में पहुंचे दर्शकों का मनोरंजन हुआ और धार्मिक आयोजन के साथ लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली।

आस्था, भक्ति और लोक संस्कृति का दिखा संगम

मेला समिति एवं ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित इस वार्षिक मेले में पूरे दिन आस्था, भक्ति और लोक संस्कृति का संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में सुबह से शुरू हुई श्रद्धालुओं की आवाजाही देर रात तक जारी रही।

तेजादशमी के अवसर पर देहलवाल बाबा और वीर तेजाजी महाराज के दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर दर्शन किए। पूजा-अर्चना, दूध और चूरमा का भोग, मंगल गीत, भजन, तेजा गायन, अलगोजे की धुन और बिंदोरी ने मेले के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप को विशेष बना दिया।

देर रात तक मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा रहा। वहीं, तेजाजी महाराज के जयकारों से पूरा चौरू गूंजता रहा। वार्षिक मेले के दौरान ग्रामीणों और बाहर से आए श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं में सहभागिता की और बाबा के दरबार में सुख-समृद्धि की कामना की।

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