रामलीला मंचन के बाद हुआ रावण दहन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा क्षेत्र, बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश
प्रयागराज। असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयदशमी का पर्व मंगलवार को जनपद भर में पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। विभिन्न स्थानों पर आयोजित रामलीला में भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया। इसके बाद मैदानों में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया गया। रावण दहन के दौरान जय श्रीराम के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
रामलीला मंचन के बाद हुआ रावण दहन
विजयदशमी के अवसर पर जगह-जगह आयोजित रामलीला में भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का मंचन किया गया। कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण की नाभि में अग्निबाण मारा, जिसके बाद रावण धराशायी हो गया।
रावण वध के बाद सबसे पहले मेघनाथ का पुतला जलाया गया। इसके बाद कुंभकरण और अंत में रावण के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान मैदान में मौजूद लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए और उत्साह के साथ पर्व मनाया।
रावण दहन से मिला बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
दशहरा केवल पुतला दहन का पर्व नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला अवसर भी है। भगवान श्रीराम की विजय की कथा लोगों को सच्चाई और ईमानदारी के रास्ते पर आगे बढ़ने का संदेश देती है।
मान्यता के अनुसार, असत्य और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः सत्य की विजय होती है। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से लेकर रावण पर विजय तक की कथा धैर्य, मर्यादा और दृढ़ संकल्प का महत्व बताती है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई पर्व की रौनक
विजयदशमी के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर रामलीला मंचन, रावण दहन और आतिशबाजी सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने इन आयोजनों में भाग लिया।
रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों के दहन के साथ ही वातावरण जयकारों और उत्साह से भर गया। आयोजन के माध्यम से लोगों को बुराइयों का त्याग कर अच्छे मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई।
सत्य की जीत के लिए दृढ़ संकल्प जरूरी
विजयदशमी का संदेश यह भी है कि सत्य की जीत के लिए केवल उसके पक्ष में खड़ा होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी उसके लिए दृढ़ रहना जरूरी है। सत्य और न्याय के मार्ग पर चलते हुए व्यक्ति को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन धैर्य और संकल्प से लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
दशहरा लोगों को अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध और अन्य बुराइयों को त्यागने तथा जीवन में सत्य, ईमानदारी और सदाचार अपनाने की प्रेरणा देता है। इसी संदेश के साथ जनपद में विजयदशमी का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया।
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