बेगूं रोड स्थित श्मशान घाट की बंद रोड लाइटों से अंतिम संस्कार में परेशानी, नगर पालिका अध्यक्ष ने दीपावली से पहले व्यवस्था सुधारने के लिए उठाया कार्मिकों की कमी का मुद्दा
शाहपुरा।शाहपुरा शहर के बेगूं रोड स्थित श्मशान घाट में बंद पड़ी रोड लाइटें अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। संध्याकाल में अंधेरा होने से लोगों को अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने में भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। श्मशान घाटों की बदहाल व्यवस्था का मुद्दा मीडिया द्वारा पहले भी प्रमुखता से उठाया जा चुका है। इसके बाद शाहपुरा विधायक ने पंचायत समिति में बैठक लेकर विधानसभा क्षेत्र के श्मशान घाटों की समस्याओं के प्रभावी समाधान के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं होने से नगर पालिका शाहपुरा की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी तय करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बुधवार को शाहपुरा में एक पूर्व पार्षद सहित दो लोगों की मृत्यु के बाद बेगूं रोड स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में अधिक समय लगने और शाम ढलने के साथ परिसर में अंधेरा छा गया। बंद लाइटों के कारण वहां मौजूद लोगों को परेशानी हुई। दुख की घड़ी में अंतिम विदाई देने पहुंचे परिजनों और अन्य लोगों को रोशनी जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव से जूझना पड़ा।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा, फिर भी नहीं हुआ समाधान
श्मशान घाटों की बदहाल व्यवस्था का मामला नया नहीं है। मीडिया द्वारा पहले भी इस समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था। इसके बाद विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने पंचायत समिति में बैठक लेकर पूरे विधानसभा क्षेत्र के श्मशान घाटों की समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि निर्देशों की पालना किस स्तर पर अटकी हुई है और संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जाकर व्यवस्था की जांच क्यों नहीं की।
भाजपा के पूर्व पार्षद दुर्गा लाल कहार भी श्मशान घाट की बंद रोड लाइटों को लेकर नगर पालिका में कई बार शिकायत कर चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। यदि शिकायतें की गई थीं, तो उनकी जांच और निस्तारण की जिम्मेदारी किसकी थी? नगर पालिका प्रशासन को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस का बोर्ड, भाजपा सरकार और विधायक, जवाबदेही किसकी?
शाहपुरा नगर पालिका में कांग्रेस का बोर्ड है, जबकि प्रदेश में भाजपा की सरकार है और शाहपुरा से भाजपा विधायक हैं। इस राजनीतिक समीकरण के बीच शहर की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होने से स्थानीय निकाय की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, इस मामले में किसी राजनीतिक दबाव के कारण काम रोके जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में नागरिक सुविधाओं के समाधान में हो रही देरी के वास्तविक कारणों को स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
नगर पालिका में रिंकल गुप्ता आयुक्त एवं अधिशासी अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं। शहर की रोशनी व्यवस्था के रखरखाव के लिए संबंधित शाखा, कर्मचारी और संविदा व्यवस्था भी है। ऐसे में यह पता लगाया जाना जरूरी है कि श्मशान घाट की लाइटें कब से बंद हैं, शिकायत मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई और मरम्मत में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है।
श्मशान घाट में केवल रोशनी ही नहीं, अन्य सुविधाओं की भी जरूरत
श्मशान घाट जैसी संवेदनशील जगह पर पर्याप्त रोशनी, साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है। जरूरत इस बात की भी है कि अधिकारी दिन के उजाले में मौके पर पहुंचकर पूरी व्यवस्था का निरीक्षण करें। इससे पता चल सकेगा कि वहां रोशनी के अलावा अन्य सुविधाओं की क्या स्थिति है और किन सुधारों की आवश्यकता है।
अब इंतजार नहीं, व्यवस्था सुधारने के लिए कार्रवाई जरूरी
स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से बेगूं रोड श्मशान घाट की सभी बंद रोड लाइटों को जल्द ठीक करवाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अंतिम संस्कार के दौरान अंधेरे का सामना नहीं करना पड़े।
सवाल यह है कि जब समस्या सामने आ चुकी है, शिकायतें भी की जा चुकी हैं और विधायक स्तर पर निर्देश भी दिए जा चुके हैं, तो समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ? नगर पालिका को तत्काल निरीक्षण कर लाइटें चालू करवानी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय करनी चाहिए। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील स्थिति में नागरिकों को बुनियादी सुविधा के लिए परेशान होना पड़े, यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
चुनाव ड्यूटी में चार कार्मिक, रोशनी और सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का हवाला
नगर पालिका अध्यक्ष रमेश कुमार सेन ने भी दीपावली से पहले शहर की रोशनी और सफाई व्यवस्था सुचारू रखने के लिए कार्मिकों की कमी का मुद्दा उठाया है। उन्होंने 19 अक्टूबर 2026 को उपखंड अधिकारी, शाहपुरा को पत्र भेजकर नगर पालिका के चार कार्मिकों को पंचायत राज चुनाव की ड्यूटी से मुक्त करवाने की मांग की।
पत्र के अनुसार, चुनाव ड्यूटी में लगाए गए चार कार्मिकों में रोशनी शाखा से जुड़े दो कर्मचारी फजलुद्दीन मिरासी और रामगोपाल धाकड़ शामिल हैं। इनके अलावा वरिष्ठ सहायक महावीर प्रसाद जाट और कार्यरत जमादार उत्तम घुसर की ड्यूटी भी चुनाव में लगाई गई है।
अध्यक्ष ने पत्र में कहा कि इन कार्मिकों के चुनाव ड्यूटी पर रहने से नगर पालिका के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने दीपावली के मद्देनजर शहर की रोड लाइट और सफाई व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए संबंधित कार्मिकों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त करवाने के लिए जिला कलेक्टर से आवश्यक कार्रवाई करवाने का अनुरोध किया है।
कार्मिकों की कमी के बीच वैकल्पिक व्यवस्था पर भी सवाल
नगर पालिका अध्यक्ष के पत्र से निकाय के सामने मौजूद प्रशासनिक चुनौती का एक पक्ष सामने आता है। हालांकि, श्मशान घाट की लाइटें लंबे समय से बंद होने की शिकायतों के बीच यह भी जरूरी है कि नगर पालिका स्पष्ट करे कि समस्या के समाधान के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए और वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
चुनाव ड्यूटी के कारण कार्मिकों की उपलब्धता प्रभावित हुई हो सकती है, लेकिन नागरिकों की मूलभूत सुविधाएं सुचारू रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में श्मशान घाट की बंद लाइटों को जल्द चालू करवाने के साथ-साथ शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करना और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
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Bhilwara, Rajasthan
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