रामनिवास धाम में रामस्नेही संप्रदाय के चातुर्मास का समापन


संत नवनिधराम महाराज ने कहा, मोह-माया से ऊपर उठकर समूची सृष्टि से प्रेम करना ही सच्ची भक्ति, सेवा कार्य जारी रखने का संकल्प

शाहपुरा।रामस्नेही संप्रदाय की मुख्यपीठ रामनिवास धाम, शाहपुरा में चातुर्मास का समापन परंपरागत विधि-विधान के साथ हुआ। धाम की बारादरी में आयोजित समारोह में कार्यवाहक भंडारी संत नवनिधराम महाराज और संत मस्तराम महाराज के चातुर्मास की पूर्णता पर सर्व रामस्नेही सत्संगीजनों की मौजूदगी में समापन की घोषणा की गई। इस अवसर पर गादीजी की आरती-वंदना की गई तथा संतवाणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेम, करुणा, समभाव और सेवा का संदेश दिया गया।

मोह-माया से ऊपर उठकर समूची सृष्टि से करें प्रेम

समारोह में कार्यवाहक भंडारी संत नवनिधराम महाराज ने कहा कि मोह-माया में उलझे रहना ही अज्ञान है। किसी वस्तु को अपनी मानकर उससे मोह रखना माया का स्वरूप है। इसी प्रकार केवल अपने परिवार और अपने लोगों तक प्रेम को सीमित रखना भी सीमित भाव को दर्शाता है।

संत नवनिधराम महाराज ने कहा कि समूची धरती पर रहने वाले सभी मनुष्यों और सभी धर्मों के लोगों से प्रेम करना ही दया और भक्ति का वास्तविक स्वरूप है। सच्ची भक्ति वही है, जिसमें मनुष्य भेदभाव से ऊपर उठकर सभी के प्रति करुणा, सद्भाव और प्रेम का भाव रखता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में व्यापक दृष्टिकोण अपनाने और सभी के प्रति समान भाव रखने की प्रेरणा दी। संतवाणी के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों के प्रति प्रेम, दया और सेवा के व्यवहार में भी प्रकट होती है।

चातुर्मास में सत्संग और साधना से मिलता है आध्यात्मिक मार्गदर्शन

संत नवनिधराम महाराज ने कहा कि रामस्नेही संप्रदाय में चातुर्मास की परंपरा का लंबा इतिहास रहा है। इस अवधि में गुरु और आराध्य की स्तुति, जप-तप, आराधना, सत्संग और कथा जैसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इन आयोजनों से समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

उन्होंने कहा कि चातुर्मास आत्मचिंतन करने और अपने जीवन में सदाचार, सेवा तथा सद्भाव के भाव को मजबूत करने का अवसर है। सत्संग और साधना के माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

वर्ष 2011 से जारी है सेवा कार्यों की परंपरा

संत नवनिधराम महाराज ने बताया कि शाहपुरा में वर्ष 2011 से श्रीजी महाराज की जयंती और निर्वाण महोत्सव के अवसर पर उनकी स्मृति में विभिन्न सेवा कार्य किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के अंतर्गत जरूरतमंदों को राशन सामग्री और कंबल वितरित करने के साथ विद्यार्थियों को पाठ्यसामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है।

उन्होंने बताया कि रामस्नेही अनुरागियों के सहयोग और प्रेरणा से ये सेवा आयोजन शाहपुरा की धार्मिक एवं सामाजिक परंपरा का हिस्सा बन गए हैं। इन कार्यों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की सहायता करने और समाज में सेवा भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है।

सेवा गतिविधियों को आगे भी जारी रखने का संकल्प

संत नवनिधराम महाराज ने विश्वास जताया कि शाहपुरा और अन्य स्थानों के रामस्नेही अनुरागियों के सहयोग से सेवा गतिविधियों का यह क्रम आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने सेवा कार्यों को समाज के प्रति जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य बताया।

चातुर्मास समापन समारोह में श्रद्धालुओं ने संतवाणी का श्रवण किया और प्रेम, करुणा, समभाव तथा सेवा के संदेश को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा प्राप्त की।

समारोह में अनेक श्रद्धालु रहे मौजूद

रामनिवास धाम की बारादरी में आयोजित समारोह में सूर्यप्रकाश बिड़ला, कैलाशचंद्र तोषनीवाल, रामेश्वरलाल बसेर, राकेश सोमाणी, रामकल्याण सोमाणी, दीनदयाल मारू, महावीर जागेटिया और रामसहाय बिड़ला सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

समारोह का समापन धार्मिक वातावरण में हुआ। इस अवसर पर रामस्नेही संप्रदाय की परंपराओं, आध्यात्मिक साधना और सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।

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