शंकरगढ़ CHC में एक कमरे में दो डॉक्टर, मरीजों की परेशानी बढ़ी


आयुष चिकित्सक और नेत्र रोग विशेषज्ञ के एक ही कमरे में ओपीडी करने पर उठे सवाल, मरीजों की निजता, संक्रमण की आशंका और नेत्र जांच की व्यवस्था पर ध्यान देने की मांग

प्रयागराज।प्रयागराज के शंकरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में ओपीडी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि यहां आयुष चिकित्सक और नेत्र रोग विशेषज्ञ को एक ही छोटे कमरे में बैठकर मरीजों को देखना पड़ रहा है। इस व्यवस्था को लेकर मरीजों की निजता, जांच के लिए जरूरी अनुकूल वातावरण और अस्पताल में उपलब्ध कमरों के उपयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर उठाई गई शिकायतों के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और मरीज तो मौजूद हैं, लेकिन अलग-अलग प्रकार के उपचार के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं होने से परेशानी होती है। मरीजों का कहना है कि एक ही कमरे में दो डॉक्टरों की ओपीडी चलने से भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बनती है।

आयुष चिकित्सक और नेत्र रोग विशेषज्ञ एक ही कमरे में

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आयुष विंग के चिकित्सक डॉ. पुनीत गुप्ता सर्दी-खांसी, बुखार और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से संबंधित मरीजों को देखते हैं। वहीं, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार आंखों से जुड़ी समस्याओं की जांच करते हैं।

आरोप है कि दोनों चिकित्सकों को एक ही कमरे में ओपीडी संचालित करनी पड़ रही है। ऐसे में दोनों के पास आने वाले मरीजों की भीड़ एक ही स्थान पर जमा हो जाती है। इस व्यवस्था से चिकित्सकों के कामकाज और मरीजों के उपचार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

मरीजों की निजता पर उठे सवाल

ओपीडी में मरीज अपनी बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी निजी समस्याएं डॉक्टर को बताते हैं। ऐसे में यदि दो चिकित्सक एक ही कमरे में मरीजों को देखते हैं और आसपास दूसरे मरीज भी मौजूद रहते हैं, तो गोपनीयता बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

स्थानीय स्तर पर उठाई गई शिकायतों में यह आशंका जताई गई है कि खासकर महिला मरीज अपनी निजी स्वास्थ्य समस्याएं खुलकर बताने में असहज महसूस कर सकती हैं। मरीजों को अपनी बात बिना झिझक कहने के लिए उचित गोपनीयता और सम्मानजनक वातावरण मिलना जरूरी है।

संक्रमण के जोखिम को लेकर भी चिंता

एक ही कमरे में खांसी, छींक और बुखार से पीड़ित मरीजों के साथ आंखों की समस्या लेकर आने वाले बुजुर्गों और बच्चों के बैठने को लेकर भी चिंता जताई गई है।

स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार बैठने और जांच की व्यवस्था होना महत्वपूर्ण है। पर्याप्त जगह, उचित वेंटिलेशन और संक्रमण नियंत्रण के उपायों की कमी होने पर मरीजों को परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस व्यवस्था के कारण संक्रमण फैलने की किसी घटना की पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई गई है।

नेत्र जांच के लिए उपयुक्त वातावरण जरूरी

नेत्र रोग विशेषज्ञ को आंखों की विभिन्न जांचों के लिए आवश्यक उपकरणों और अनुकूल वातावरण की जरूरत होती है। शिकायत में कहा गया है कि एक ही कमरे में दूसरी ओपीडी चलने से शोर और मरीजों की आवाजाही के कारण आंखों की जांच प्रभावित हो सकती है।

यदि जांच के लिए नियंत्रित रोशनी या शांत वातावरण की जरूरत हो, तो अलग स्थान उपलब्ध कराना मरीजों और चिकित्सक दोनों के लिए सुविधाजनक हो सकता है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन से नेत्र रोग विभाग के लिए उपयुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।

डॉक्टर भी परेशान, मरीजों को भी दिक्कत

शिकायतों के अनुसार, कमरे में दो टेबल और दो कुर्सियां लगने के बाद जगह सीमित रह जाती है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर कुछ लोगों को खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। भीड़ के बीच पर्ची संभालने, डॉक्टर तक पहुंचने और अपनी समस्या बताने में भी परेशानी होने की बात सामने आई है।

एक ही कमरे में दो ओपीडी संचालित होने से बातचीत और मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एक-दूसरे तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। इस स्थिति से मरीजों की सुविधा और चिकित्सकों के कार्य वातावरण को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

अस्पताल परिसर के खाली कमरों के उपयोग पर सवाल

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में कुछ कमरे लंबे समय से बंद पड़े हैं, जबकि कुछ कमरों में कबाड़ रखा हुआ है। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि क्या उपलब्ध कमरों की समीक्षा कर दोनों चिकित्सकों के लिए अलग-अलग ओपीडी कक्ष की व्यवस्था नहीं की जा सकती?

स्थानीय लोगों की मांग है कि अस्पताल प्रशासन परिसर के कमरों का निरीक्षण करे और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करे, ताकि चिकित्सकों को उचित कार्यस्थल और मरीजों को सुविधाजनक उपचार मिल सके।

कुछ स्थानीय मरीजों के हवाले से बताया गया है कि एक ही कमरे में दो डॉक्टरों की ओपीडी होने से उन्हें यह समझने में परेशानी होती है कि किस डॉक्टर के पास जाना है। भीड़ के कारण पर्ची संभालने और अपनी बारी का इंतजार करने में भी दिक्कत होने की बात कही गई है।

सीएमओ और अस्पताल प्रशासन से व्यवस्था सुधारने की मांग

शंकरगढ़ सीएचसी की ओपीडी व्यवस्था को लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी, प्रयागराज और अस्पताल प्रशासन से ध्यान देने की मांग उठाई गई है। स्थानीय स्तर पर सवाल किया जा रहा है कि जब अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की जरूरत है, तो उपलब्ध कमरों और संसाधनों का उपयोग इस दिशा में क्यों नहीं किया जा रहा है।

मांग है कि अस्पताल परिसर में उपलब्ध कमरों की स्थिति की जांच कराई जाए, आयुष चिकित्सक और नेत्र रोग विशेषज्ञ के लिए अलग-अलग उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाए तथा मरीजों की निजता, संक्रमण नियंत्रण और जांच संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर व्यवस्था सुधारी जाए।

फिलहाल, इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन का पक्ष उपलब्ध नहीं है। उनकी प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए। मरीजों की अपेक्षा है कि संबंधित अधिकारी व्यवस्था का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार करें, ताकि शंकरगढ़ सीएचसी में उपचार के लिए आने वाले लोगों को बेहतर और सम्मानजनक सुविधाएं मिल सकें।

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