आरणी गांव में घर के बाहर खेल रहा था शिवम गुर्जर, गंभीर हालत में भीलवाड़ा जिला चिकित्सालय ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
शाहपुरा। शाहपुरा क्षेत्र में स्कूली बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरणी गांव में शनिवार सुबह स्कूल वाहिनी की टक्कर से दो वर्षीय मासूम शिवम गुर्जर की दर्दनाक मौत हो गई। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं और घर-आंगन में किलकारियां भरते हैं, उसी उम्र में एक हादसे ने शिवम की जिंदगी छीन ली। इस घटना ने एक परिवार की खुशियां उजाड़ने के साथ ही स्कूल वाहनों की सुरक्षा और परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
घर के बाहर खेल रहा था मासूम शिवम
जानकारी के अनुसार, मुकेश गुर्जर का दो वर्षीय बेटा शिवम शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे आरणी गांव में घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान वह एक स्कूल वाहिनी की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
हादसे के बाद परिजन उसे तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां से हालत गंभीर होने पर उसे भीलवाड़ा जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। जिला चिकित्सालय में ड्यूटी डॉक्टर ने एमओटी पर शिवम को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की जांच
शाहपुरा थाना प्रभारी लीलाधर मालवीय के अनुसार, घटना के संबंध में मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया गया है। पुलिस हादसे से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
पहले भी हो चुका है स्कूल वाहिनी से हादसा
शाहपुरा क्षेत्र में स्कूल वाहिनी से जुड़ा यह पहला हादसा नहीं है। इससे पहले भी स्कूल वाहन से दुर्घटना होने के बाद प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पहले हादसे के बाद क्षेत्र में संचालित सभी स्कूल वाहनों की व्यापक जांच और नियमों की पालना सुनिश्चित कराने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाए गए?
यदि समय रहते सभी वाहनों की जांच, सुरक्षा मानकों की समीक्षा और नियमित निगरानी की व्यवस्था मजबूत की जाती तो सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की संभावना थी। हालांकि, यह कहना अभी संभव नहीं है कि मौजूदा हादसा किसी विशेष जांच या कार्रवाई से निश्चित रूप से टल जाता, लेकिन लगातार सामने आती दुर्घटनाएं नियमित निगरानी की आवश्यकता जरूर बताती हैं।
गांवों से बच्चों को लाने वाले वाहनों की जांच जरूरी
शाहपुरा क्षेत्र में पंजीकृत स्कूल वाहनों के साथ निजी तौर पर छोटे वाहनों को स्कूली परिवहन में इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है कि क्षेत्र में संचालित सभी स्कूल वाहनों के दस्तावेजों और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच सुनिश्चित करे।
वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा और चालकों की पात्रता की जांच जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्षेत्र में कितने स्कूल वाहन पंजीकृत हैं और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
परिवहन, पुलिस और शिक्षा विभाग की संयुक्त कार्रवाई जरूरी
शिवम की मौत के बाद केवल औपचारिक जांच या कुछ दिनों तक अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा। परिवहन विभाग, पुलिस और शिक्षा विभाग को संयुक्त अभियान चलाकर स्कूल वाहनों की जांच करनी चाहिए। स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता न हो।
मासूम की मौत ने खड़े किए जवाबदेही के सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन स्थायी व्यवस्था कब करेगा? शिवम की मौत उसके परिवार के लिए असहनीय दुख है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना प्रशासन और संबंधित संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
अब जरूरत है कि प्रशासन किसी हादसे के बाद जागने के बजाय पहले से सतर्क रहे। स्कूल वाहनों की नियमित जांच और सुरक्षा नियमों की सख्ती से पालना ही ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में जरूरी कदम हो सकते हैं, ताकि किसी और परिवार का चिराग इस तरह न बुझे।
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Bhilwara, Rajasthan
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