हिंदुस्तान जिंक की सखी पहल से महिलाओं की आय 43 प्रतिशत बढ़ी


सखी माइक्रोएंटरप्राइज से 426 महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर, दरीबा में नई मिलेट उत्पादन इकाई स्थापित, दिल्ली के स्टोर्स तक पहुंच रहे उत्पाद

भीलवाड़ा।कभी परिवार के भरण-पोषण के लिए मौसमी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली महिलाएं आज अपने हुनर और मेहनत के दम पर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक की सखी माइक्रोएंटरप्राइज पहल ग्रामीण महिलाओं को नियमित आय, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

इस पहल से जुड़ी महिलाओं की सामूहिक आय वित्त वर्ष 2026 में 23 लाख रुपये से बढ़कर 32.84 लाख रुपये हो गई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 43 प्रतिशत की वृद्धि है। वर्तमान में 426 महिलाएं इस पहल से जुड़कर अपनी आजीविका मजबूत कर रही हैं।

23 लाख से बढ़कर 32.84 लाख रुपये हुई सामूहिक आय

हिंदुस्तान जिंक की सखी माइक्रोएंटरप्राइज पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ रही है। महिलाओं की सामूहिक आय में 43 प्रतिशत की वृद्धि इस पहल के सकारात्मक परिणामों को दर्शाती है।

कंपनी शिक्षा, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सतत आजीविका जैसे क्षेत्रों में सामाजिक विकास कार्यक्रम संचालित कर रही है। कंपनी के अनुसार, 4,100 से अधिक गांवों तक पहुंच के माध्यम से वह 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में काम कर रही है। हिंदुस्तान जिंक वर्ष 2030 के अपने सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

मंजू देवी की जिंदगी में आया बदलाव

सखी पहल से जुड़ने वाली महिलाओं की सफलता की कहानियों में मंजू देवी का उदाहरण भी शामिल है। कुछ वर्ष पहले तक उनकी जिंदगी अनिश्चितताओं से घिरी हुई थी। वर्ष 2019 में बीमारी के कारण पति के निधन के बाद दो बच्चों के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई।

परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें मौसमी कृषि कार्य और अस्थायी मजदूरी पर निर्भर रहना पड़ता था। सखी परियोजना से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बदलाव आया। आज वे आधुनिक प्रोसेसिंग मशीनों का संचालन कर हर महीने करीब 8 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर रही हैं।

मंजू देवी की यह उपलब्धि आसपास के क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उनकी कहानी बताती है कि कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलने पर महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

राजस्थान और उत्तराखंड में संचालित हैं 14 उत्पादन इकाइयां

हिंदुस्तान जिंक की सखी उत्पादन समिति के अंतर्गत संचालित सखी माइक्रोएंटरप्राइज महिलाओं को उनके कौशल के अनुरूप स्थायी आजीविका और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है।

इस पहल के तहत राजस्थान और उत्तराखंड में कुल 14 उत्पादन इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों में महिलाएं पारंपरिक उत्पादों के साथ क्रोशिया उत्पाद, मूंगफली का तेल और मिलेट आधारित खाद्य सामग्री तैयार कर रही हैं।

इससे स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को व्यावसायिक पहचान मिल रही है। साथ ही महिलाओं के लिए आय अर्जित करने के नए रास्ते खुल रहे हैं।

दरीबा में नई मिलेट उत्पादन इकाई स्थापित

महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में दरीबा में नई मिलेट उत्पादन इकाई स्थापित की गई है। इस इकाई के माध्यम से महिलाओं को मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पाद तैयार करने का अवसर मिलेगा।

इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलने के साथ पारंपरिक एवं स्थानीय अनाजों के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। नई इकाई महिलाओं को उत्पादन गतिविधियों से जोड़कर उनकी आजीविका के अवसरों का विस्तार करने में मददगार होगी।

‘दायची’ और ‘उपाया’ ब्रांड से बाजार में पहचान

सखी माइक्रोएंटरप्राइज के उत्पाद ‘दायची’ और ‘उपाया’ ब्रांड के माध्यम से बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं।

‘दायची’ ब्रांड के तहत अचार, शहद, मसाले, दालें, नमकीन, तेल और घी जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। वहीं, ‘उपाया’ ब्रांड परिधान उत्पादों पर केंद्रित है।

इन दोनों ब्रांडों के माध्यम से महिलाओं को अपने कौशल के अनुसार अलग-अलग उत्पाद तैयार करने और कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिल रहा है। इससे उनके पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ने में मदद मिल रही है।

दिल्ली के तीन स्टोर्स तक पहुंचे सखी के उत्पाद

सखी के उत्पाद अब केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे हैं। ले मार्शे के साथ साझेदारी के तहत सखी के उत्पाद दिल्ली के तीन स्टोर्स में उपलब्ध हैं।

इसके अलावा ब्लिंकिट, अमेजन, फ्लिपकार्ट, ओएनडीसी और सखी के अपने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘हार्ट्स विद फिंगर्स’ के माध्यम से भी इन उत्पादों की बिक्री की जा रही है।

बड़े बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच बनने से महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिल रहा है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर राष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बनाने का मंच मिल रहा है।

ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

सखी माइक्रोएंटरप्राइज का उद्देश्य स्थानीय कौशल, संसाधनों और उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यह पहल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ग्रामीण समुदायों में स्थायी आजीविका के अवसर विकसित कर रही है।

उत्पादन इकाइयों के विस्तार, नए उत्पादों के निर्माण और बाजार तक बेहतर पहुंच से महिलाओं को अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का अवसर मिल रहा है। 426 महिलाओं की भागीदारी और सामूहिक आय में 43 प्रतिशत की वृद्धि इस पहल के तहत हो रहे बदलाव को दर्शाती है।

यह भी पढ़ें:


Aawaz Aapki News WhatsApp चैनल से जुड़ें:

सबसे तेज़ और ताज़ा खबरें सीधे अपने व्हाट्सएप पर पाएं।

WhatsApp अभी जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *