प्रधान चुनते समय चेहरा और वादे नहीं, उसकी सोच देखें; गांव का विकास तभी होगा जब फैसले चौपाल पर जनता की भागीदारी से लिए जाएंगे
प्रयागराज। गांव में अक्सर एक सवाल उठता है कि आखिर लोकप्रिय ग्राम प्रधान किसे कहा जाए? क्या उस व्यक्ति को जो सबसे ज्यादा वोटों से चुनाव जीतता है, सबसे अधिक पैसा खर्च करता है या ऊंची आवाज में भाषण देता है? वास्तव में लोकप्रिय ग्राम प्रधान वह होता है, जो गांव के विकास की रूपरेखा अकेले तैयार करने के बजाय जनता के साथ बैठकर बनाए और हर वर्ग की जरूरतों को प्राथमिकता दे।
प्रधान कोई राजा नहीं, बल्कि गांव का सेवक होता है। इसलिए गांव के विकास से जुड़े फैसले भी जनता की राय और उसकी जरूरतों को ध्यान में रखकर होने चाहिए। गांव का विकास प्रधान के घर की बैठक से नहीं, बल्कि गांव की चौपाल और ग्राम सभा से शुरू होना चाहिए।
चुनाव से पहले जनता के बीच, जीतने के बाद फैसले अपने स्तर पर क्यों?
आज गांवों में अक्सर देखने को मिलता है कि चुनाव से पहले प्रधान पद का प्रत्याशी गांव-गांव घूमता है। हर दरवाजे पर जाकर हाथ जोड़ता है और खुद को गांव का बेटा तथा जनता का सेवक बताता है। वह विकास के बड़े-बड़े वादे करता है और लोगों को भरोसा दिलाता है कि उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।
लेकिन चुनाव जीतने के बाद कई बार विकास की रूपरेखा प्रधान अपने घर की बैठक में ही तैयार करने लगता है। सड़क कहां बनेगी, नाली कहां बनेगी, हैंडपंप कहां लगेगा और आवास का लाभ किसे मिलेगा, जैसे फैसले चार-पांच खास लोगों की सलाह से तय होने लगते हैं।
गांव की आम जनता को बाद में पता चलता है कि प्रधान जी ने फैसला कर दिया है। यही वह स्थिति है, जहां जनता की भागीदारी कमजोर पड़ जाती है। जबकि गांव के विकास से जुड़े फैसलों में सबसे पहले उन लोगों की राय शामिल होनी चाहिए, जिन्हें उन सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है।
चौपाल से शुरू होती है विकास की असली रूपरेखा
एक सच्चा और लोकप्रिय प्रधान विकास का पहला नक्शा अपने ड्राइंग रूम में नहीं, बल्कि गांव की चौपाल, पंचायत भवन या मंदिर के चबूतरे पर तैयार करता है। ऐसी जगह जहां गांव के बुजुर्ग, महिलाएं, युवा, किसान और अन्य वर्गों के लोग एक साथ बैठकर अपनी समस्याएं रख सकें।
कोई कहता है कि गांव में सबसे पहले पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिए, कोई स्कूल की बाउंड्रीवाल की मांग करता है, तो किसी को अपने मोहल्ले तक पहुंचने के लिए सड़क की जरूरत होती है।
जब सभी की बात सुनी जाती है और जरूरत के आधार पर प्राथमिकताएं तय होती हैं, तभी विकास की रूपरेखा वास्तव में पूरे गांव का प्रतिनिधित्व करती है।
जनता को विकास में भागीदार बनाना जरूरी
लोकप्रिय ग्राम प्रधान विकास को केवल सरकारी योजना या अपनी जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे पूरे गांव का साझा संकल्प बनाता है। उसका संदेश होता है कि यह केवल मेरा काम नहीं, बल्कि हम सभी की जिम्मेदारी है।
जब जनता खुद विकास की योजना बनाने में भागीदार बनती है, तो वह उस काम की निगरानी भी करती है। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर ध्यान रहता है और गांव के लोग अपने संसाधनों तथा सार्वजनिक संपत्ति के प्रति अधिक जिम्मेदार बनते हैं।
सड़क, नाली, पानी और दूसरी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कामों में जनता की भागीदारी होने से पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा मिलता है।
पारदर्शिता से बढ़ता है प्रधान पर जनता का भरोसा
जो प्रधान जनता के साथ बैठकर विकास की रूपरेखा तैयार करता है, उसे कामकाज का हिसाब बताने में संकोच नहीं होना चाहिए। गांव के लोगों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि इस साल पंचायत को कितना बजट मिला, किस काम पर कितना खर्च हुआ और कितनी राशि शेष है।
विकास कार्यों और पंचायत के खर्च का विवरण सार्वजनिक रूप से साझा करना जरूरी है। ग्राम सभा में लोगों के सवालों का जवाब देना और उनकी शंकाओं को दूर करना भी प्रधान की जिम्मेदारी का हिस्सा है।
पारदर्शिता केवल कागजों में हिसाब दिखाने का नाम नहीं है, बल्कि जनता को पंचायत के कामकाज से जोड़ने और उनका विश्वास बनाए रखने का माध्यम है।
लोकप्रिय प्रधान पूरे गांव का प्रतिनिधि होता है
एक लोकप्रिय ग्राम प्रधान केवल अपने समर्थकों या वोट देने वालों का प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि पूरे गांव का प्रधान होता है। जिसने उसे वोट दिया, उसका भी और जिसने वोट नहीं दिया, उसका भी।
गांव के विकास में जाति, पार्टी, गुटबाजी और व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। पानी, सड़क, नाली, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाएं हर जरूरतमंद तक समान रूप से पहुंचनी चाहिए।
जो प्रधान सभी वर्गों को साथ लेकर चलता है और हर व्यक्ति की समस्या सुनता है, वही गांव में वास्तविक लोकप्रियता हासिल करता है।
गांव वालों से आवाज आपकी न्यूज़ की अपील
अगली बार जब कोई व्यक्ति ग्राम प्रधान बनने के लिए आपके बीच आए, तो उससे केवल वादे न सुनें, बल्कि ये तीन सवाल जरूर पूछें।
- विकास की रूपरेखा आप अकेले बनाएंगे या गांव के लोगों के साथ बैठकर तय करेंगे?
- क्या आप हर तीन महीने में ग्राम सभा के माध्यम से पंचायत के कामकाज और खर्च का हिसाब देंगे?
- गांव के विकास से जुड़े फैसले प्रधान के घर में होंगे या जनता के बीच चौपाल और ग्राम सभा में?
जो प्रत्याशी इन सवालों पर जनता के साथ मिलकर काम करने का भरोसा दे और अपने व्यवहार में भी उसे निभाए, वही लोकप्रिय प्रधान बनने की दिशा में सही सोच रखता है।
वहीं, जो प्रत्याशी जनता की राय को महत्व न देकर यह कहे कि तुम क्या जानो, हम सब देख लेंगे, उसकी सोच पर गांव के लोगों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
गांव का विकास जनता की भागीदारी से ही संभव
याद रखिए, गांव का विकास किसी एक प्रधान के दिमाग से नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक सोच और भागीदारी से होता है। प्रधान की असली ताकत उसकी कुर्सी या अधिकार नहीं, बल्कि जनता का विश्वास और सहयोग होता है।
जब गांव की जनता विकास की रूपरेखा बनाने में साथ खड़ी होगी, तो योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि जमीन पर दिखाई देंगी। इसलिए प्रधान चुनते समय केवल चेहरा नहीं, उसकी सोच, पारदर्शिता और जनता को साथ लेकर चलने की क्षमता जरूर देखनी चाहिए।
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