कुशलगढ़| दिगंबर बीस पंथी समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ ने जानकारी देते हुए बताया कि आज प्रातः 9 बजे परम पूज्य आचार्य श्री 108 श्रेय सागर जी महाराज एवं ससंघ के मंगल सानिध्य में *विश्व नवकार कलश रथ यात्रा* की अगवानी की गई, सकल जैन समाज का 9 अप्रैल को आयोजित होने वाला *विश्व नवकार मंत्र दिवस* पर आचार्य श्री के सानिध्य मे सकल जैन समाज को आगामी नवकार दिवस पर गुरु उपदेश दिया गया। इस अवसर पर दिगंबर बीस पंथी समाज अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ , श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ अघ्यक्ष कमलेश कावड़िया , श्री स्थानक श्वेतांबर जैन संघ अध्यक्ष रजनीकांत खाबिया, तेरा पंथी दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष बुद्धिलाल शाह आदि समाज जन उपस्थित रहे। सकल जैन समाज ने एकमत से 9 अप्रैल को प्रातः कालीन नवकार मंत्र के जाप का संकल्प लिया।अपने संबोधन में आचार्य श्री ने कहा कि णमोकार मंत्र जैन धर्म का सबसे पवित्र और सर्वोच्च मंत्र है। इसे नवकार मंत्र भी कहा जाता है। यह मंत्र किसी व्यक्ति विशेष की स्तुति नहीं करता, बल्कि संसार के पाँच परमेष्ठियों को नमस्कार करता है। इसलिए यह मंत्र सर्वश्रेष्ठ और सार्वभौमिक माना गया है। नवकार मंत्र हमें सिखाता है कि वंदना व्यक्ति की नहीं, गुणों की करनी चाहिए।अरिहंतों में ज्ञान और करुणा के गुण हैं, सिद्धों में पूर्ण मुक्ति का आदर्श है, आचार्य धर्मसंघ के मार्गदर्शक हैं, उपाध्याय ज्ञान के दाता हैं और साधु-संत संयम और तप के प्रतीक हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा और भाव से नवकार मंत्र का स्मरण करता है, उसके मन के पाप नष्ट होते हैं, मन शांत होता है और आत्मा की उन्नति होती है। जैन आगमों में कहा गया है कि नवकार मंत्र सभी पापों का नाश करने वाला और मंगलों में सबसे बड़ा मंगल है।इस संपूर्ण आयोजन में समाज के सभी श्रद्धालुजन उपस्थित रहें।