अमृत सरोवरों का अमृत पी गए जिम्मेदार करोड़ों खर्च के बाद भी सूखे तालाब
प्रयागराज। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने को लेकर मनाए जा रहे अमृत महोत्सव के अंतर्गत जल संरक्षण की मंशा जिम्मेदारों की उदासीनता से पूरी होती नजर नहीं आ रही क्षेत्र के मवैया पहलवान, करिया खुर्द बसहरा उपरहार सहित कई गांवों में चयनित अमृत सरोवर का काम अभी तक अधूरा है। जबकि जिम्मेदारों द्वारा चिन्हित अमृत सरोवरों में काम पूरा होने व जल्द पूर्ण होने का दावा किया जा रहा है। जल संरक्षण के लिए शासन की मंशानुरूप शंकरगढ़ विकासखंड की कई ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर निर्माण के लिए तालाब चिन्हित किए गए थे। सरोवर निर्माण के लिए समय से खोदाई कार्य शुरू कराकर पिछले वर्ष ही पूरा कर लिया गया, जबकि कई स्थानों पर गलत मंशा से वर्षा का इंतजार करते हुए देर से काम शरू कराया.गया। लेकिन बरसात देरी से होने के साथ काम पूर्ण होने में देरी हो गई। जो अधूरी खोदाई के बाद अभी तालाब में कोई अन्य कार्य नहीं कराया गया है। तालाब के किनारे पौधारोपण भी नहीं हुआ है। सरोवर सूखे पड़े हुए हैं पानी का एक बूंद भी जल संरक्षण नहीं किया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत कागजों से काफी जुदा है। अधिकांश अमृत सरोवर आधे अधूरे पड़े हैं जहां अमृत सरोवर बनाए गए वहां पर मानकों के मुताबिक काम भी अधूरा है। अमृत सरोवरों का निर्माण मनरेगा और ग्राम निधि के माध्यम से कराया जा रहा है, अमृत सरोवर निर्माण में 20 से 30 लाख रुपए तक का खर्च आता है इसकी देखरेख की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होती है लेकिन नजारा इससे इतर है ।वहीं इस बाबत खंड विकास अधिकारी शंकरगढ़ रामविलास राय ने अधूरे अमृत सरोवरों के निर्माण कार्य में अति शीघ्र तेजी लाने व जल संरक्षण की बात कही।
R. D. Diwedi
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