यूआईटी 3081 भूखंड लॉटरी विवाद पर फिर उठे सवाल, 90 हजार आवेदकों को न्याय की मांग


जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और निष्पक्ष नई लॉटरी की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

भीलवाड़ा। यूआईटी 3081 भूखंड लॉटरी विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। नगर विकास न्यास (यूआईटी) भीलवाड़ा द्वारा 16 अक्टूबर 2025 को आयोजित 3081 भूखंडों की लॉटरी में कथित अनियमितताओं को लेकर सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी हेमेन्द्र शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता राघव कोठारी, बृजेश पारीक सहित 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट डॉ. हरीतिमा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में मांग की कि यूआईटी लॉटरी प्रकरण की जांच समिति की संपूर्ण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही करीब 90 हजार आवेदकों की आवेदन सूची, पात्र एवं निरस्त आवेदनों का रिकॉर्ड तथा लॉटरी प्रक्रिया से जुड़े सभी सार्वजनिक अभिलेख उपलब्ध कराए जाएं।

जांच पूरी होने तक जिम्मेदार अधिकारी को हटाने की मांग

ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि विवादित लॉटरी के दौरान प्रभारी रहे एईएन रविश श्रीवास्तव को जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक नगर विकास न्यास से पदमुक्त किया जाए, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके।

प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यह मामला वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

आरटीआई के बावजूद नहीं मिले दस्तावेज

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगे गए दस्तावेज सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के बावजूद उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उनका कहना है कि इससे पूरी लॉटरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

नई निष्पक्ष लॉटरी कराने की उठाई मांग

ज्ञापन में मांग की गई कि यदि जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। यदि लॉटरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो विवादित लॉटरी निरस्त कर पात्र आवेदकों को समान अवसर प्रदान करते हुए पूरी तरह पारदर्शी एवं निष्पक्ष नई लॉटरी कराई जाए।

सात दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह मामला केवल 3081 भूखंडों का नहीं, बल्कि लगभग 90 हजार परिवारों के विश्वास, पारदर्शिता, सुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री से शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई प्रारंभ नहीं हुई तो प्रभावित आवेदकों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने वालों में एडवोकेट नृपेन्द्र सिंह राणावत, नवीन शर्मा, पवन त्रिपाठी, रितेश गुर्जर, हिमांशु शुक्ला, अभिषेक केडिया, दीपक कुमावत, अशोक शर्मा (जहाजपुर) एवं ललित देवनानी सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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