विश्व शांति कल्याण चातुर्मास सत्संग में शिक्षक, सैनिक और संत को राष्ट्र की धरोहर बताते हुए सम्मान और सदाचार का संदेश दिया।
भीलवाड़ा। माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आयोजित विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के अंतर्गत शनिवार को आयोजित दैनिक सत्संग में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय, शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि गुस्से में सुधार और हित का भाव होता है, जबकि क्रोध व्यक्ति का सर्वनाश कर देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में क्रोध से बचने और सकारात्मक भाव से आत्मचिंतन करने का संदेश दिया।
आचार्यश्री ने कहा कि महाभारत इस बात का उदाहरण है कि यदि भीष्म पितामह समय पर उचित स्थान पर गुस्सा प्रकट कर लेते तो उन्हें शरशैया पर नहीं लेटना पड़ता। उन्होंने कहा कि गुस्सा सामने वाले के कल्याण के लिए हो सकता है, लेकिन क्रोध मनुष्य की बुद्धि का नाश कर देता है और अंततः उसके जीवन को विनाश की ओर ले जाता है।
गुस्से और क्रोध का बताया अंतर
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि गुस्सा मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है, लेकिन उसमें भी विवेक बना रहता है। वहीं क्रोध आने पर व्यक्ति सही और गलत का निर्णय करने की क्षमता खो देता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता का गुस्सा संतान के हित में होता है और उसका उद्देश्य उसे संस्कारी एवं सभ्य बनाना होता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि धर्मस्थल नहीं जा पाने पर मन में व्याकुलता उत्पन्न होती है तो वह गुस्सा है, लेकिन सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति नहीं होने पर उत्पन्न उत्तेजना क्रोध है। इसलिए मनुष्य को अपने भीतर उठने वाले भावों का आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षक, सैनिक और संत राष्ट्र की धरोहर
सत्संग के दौरान आचार्यश्री ने एमएलवी राजकीय महाविद्यालय के आचार्यों का सम्मान करते हुए कहा कि शिक्षक शिक्षा के लिए, सैनिक राष्ट्र की सुरक्षा के लिए और संत धर्म की रक्षा के लिए कार्य करते हैं। ये तीनों राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं और इनका सदैव सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ये अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव सजग रहते हैं और समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं। ऐसे व्यक्तित्वों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
गुरु के प्रति विनम्रता ही शिष्य का आभूषण
आचार्यश्री ने कहा कि शिष्य जो कुछ भी बनता है, वह सद्गुरु की कृपा से बनता है। उन्होंने कहा कि शिष्य चाहे कितना भी विद्वान या संपन्न क्यों न हो, गुरु के समक्ष उसे सदैव विनम्र रहना चाहिए। गुरु को कभी अपने से कम नहीं आंकना चाहिए, बल्कि उनसे निरंतर सीखने की भावना बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने संत और आचार्य के महत्व को समझाते हुए कहा कि जब भी किसी संत या आचार्य का आगमन हो, श्रद्धालुओं को खड़े होकर उनका सम्मान करना चाहिए।
मानस प्रवचन और आरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
आचार्य रामदयालजी महाराज से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन प्रस्तुत किया। प्रवचन के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री की आरती उतारी। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 8:30 से 9:00 बजे तक वाणीजी का पाठ, 9:00 से 10:00 बजे तक दैनिक सत्संग तथा सूर्यास्त के समय संध्या आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
2 अगस्त को होंगे रक्तदान शिविर और साधना शिविर
आचार्यश्री ने बताया कि 2 अगस्त 2026 को रामस्नेही चिकित्सालय की ओर से रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। वहीं दोपहर 3:00 बजे से 5:00 बजे तक श्वासों-श्वास राम नाम साधना मंडल द्वारा विशेष साधना शिविर का आयोजन होगा। इन कार्यक्रमों को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
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Bhilwara, Rajasthan
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