शाहपुरा पालिका अध्यक्ष पद सामान्य पुरुष के लिए आरक्षित, दावेदारों की धड़कनें तेज


अध्यक्ष पद की आरक्षण लॉटरी से बदले राजनीतिक समीकरण, 35 वार्डों में चुनाव से पहले संभावित चेहरों की सक्रियता बढ़ी।

शाहपुरा। शाहपुरा नगर पालिका चुनाव की सियासत में अध्यक्ष पद के आरक्षण की लॉटरी के बाद अचानक हलचल तेज हो गई है। अध्यक्ष पद सामान्य पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित होने के साथ ही भाजपा, कांग्रेस सहित स्थानीय राजनीति में सक्रिय नेताओं और संभावित दावेदारों ने अपने-अपने राजनीतिक समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं।

पांच साल पहले जहां अध्यक्ष पद ओबीसी पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित था और चुनाव के बाद भाजपा का बोर्ड बना था, वहीं इस बार सामान्य पुरुष वर्ग के लिए रास्ता खुलने से कई नए चेहरों के लिए संभावनाएं बढ़ गई हैं। लॉटरी का परिणाम सामने आते ही शाहपुरा में राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। चाय की थड़ियों से लेकर राजनीतिक बैठकों और सोशल मीडिया तक अब एक ही सवाल चर्चा में है कि अगली बार पालिका अध्यक्ष की कुर्सी किसके सिर सजेगी।

हालांकि अभी नगर पालिका चुनाव की तारीख घोषित नहीं हुई है, लेकिन अध्यक्ष पद का आरक्षण तय होते ही संभावित दावेदारों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। कुछ चेहरे सोशल मीडिया पर सक्रिय नजर आने लगे हैं, जबकि कई नेता पर्दे के पीछे अपने समर्थकों और राजनीतिक संपर्कों को मजबूत करने में जुटे हैं।

पांच साल पहले ओबीसी आरक्षण, अब बदला पूरा समीकरण

पिछले नगर पालिका चुनाव में शाहपुरा अध्यक्ष पद ओबीसी पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित था। चुनाव के बाद भाजपा का बोर्ड बना और रघुनंदन सोनी पालिका अध्यक्ष बने। पांच वर्षों तक नगर पालिका की कमान उनके हाथों में रही।

अब अध्यक्ष पद सामान्य पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद आगामी चुनाव केवल पार्षद चुनने तक सीमित नहीं रहने वाला है। चुनाव के साथ ही अध्यक्ष पद के लिए राजनीतिक दलों और स्थानीय गुटों के बीच संभावित खींचतान भी चर्चा का विषय बन गई है।

भाजपा और कांग्रेस के सामने चुनौती ऐसे चेहरे को आगे लाने की होगी, जिसकी अपने वार्ड में मजबूत पकड़ होने के साथ-साथ शहर के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की क्षमता भी हो। वहीं एसडीपीआई और निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।

35 वार्ड और 23,152 मतदाता तय करेंगे पालिका की तस्वीर

शाहपुरा नगर पालिका में कुल 35 वार्ड हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल 23,152 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 11,414 पुरुष और 11,738 महिला मतदाता शामिल हैं। चुनाव के लिए कुल 35 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।

हालांकि चुनावी मुकाबला 35 वार्डों में होगा, लेकिन राजनीतिक दलों और स्थानीय गुटों की नजर अध्यक्ष पद के समीकरण पर रहेगी। कौन सा गुट कितने पार्षद जिताकर लाता है और चुनाव के बाद किसके पास बहुमत का आंकड़ा होता है, यही नगर पालिका की सत्ता की दिशा तय करेगा।

इस बार संभावित अध्यक्ष पद के दावेदार भी अपने-अपने वार्ड के साथ-साथ पूरे शहर में राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश करते नजर आ सकते हैं।

जिला बहाली का मुद्दा बन सकता है बड़ा चुनावी सवाल

शाहपुरा नगर पालिका चुनाव का राजनीतिक महत्व जिला दर्जे की बहाली के मुद्दे से भी बढ़ सकता है। शाहपुरा का ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व रहा है। आजादी से पहले यह एक रियासत थी और लंबे समय से शाहपुरा को जिला बनाने की मांग राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है।

पिछली सरकार के कार्यकाल में शाहपुरा को जिला बनाया गया था, लेकिन करीब 513 दिन जिला रहने के बाद वर्तमान सरकार ने जिला समाप्त कर दिया। इसके बाद से शाहपुरा जिला बचाओ आंदोलन के माध्यम से जिला बहाली की मांग लगातार उठती रही है।

ऐसे में आगामी नगर पालिका चुनाव में यह मुद्दा प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण चुनावी सवाल बन सकता है। मतदाताओं के बीच यह चर्चा भी हो सकती है कि शाहपुरा को जिला वापस दिलाने के लिए किस नेता या दल ने कितनी प्रभावी भूमिका निभाई।

रियासतकाल से चली आ रही है नगर निकाय की परंपरा

शाहपुरा में नगर निकाय की परंपरा पुरानी है। रियासतकाल से ही यहां नगरीय प्रशासन की व्यवस्था रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नगर पालिका चुनावों ने इस परंपरा को नई राजनीतिक पहचान दी।

इसी कारण शाहपुरा का नगर पालिका चुनाव केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं माना जाता, बल्कि यह शहर के राजनीतिक प्रभाव, नेतृत्व और भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव भी है।

सामान्य पुरुष वर्ग के लिए अध्यक्ष पद आरक्षित होने के बाद अब पार्षदों के चुनाव के साथ-साथ अध्यक्ष पद के लिए अंदरखाने समर्थन जुटाने, राजनीतिक संपर्क मजबूत करने और संभावित गठजोड़ का दौर भी तेज होने की संभावना है।

अब वार्ड आरक्षण और चुनाव कार्यक्रम पर नजर

उपलब्ध जानकारी के अनुसार आगामी प्रक्रिया में पार्षदों के वार्ड आरक्षण की लॉटरी जिला स्तर पर होगी। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही आचार संहिता लागू होगी। सितंबर में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अंतिम कार्यक्रम की घोषणा अभी बाकी है।

फिलहाल शाहपुरा में अध्यक्ष पद का आरक्षण सामने आने के बाद चुनावी गतिविधियां समय से पहले तेज हो गई हैं। अब नजर टिकट की दौड़, वार्डों के समीकरण और चुनाव के बाद अध्यक्ष पद के लिए बहुमत जुटाने की रणनीति पर रहेगी।

कुर्सी एक, दावेदार कई

शाहपुरा की सियासत में अध्यक्ष की कुर्सी एक है, लेकिन सामान्य पुरुष वर्ग के लिए आरक्षण खुलने के बाद दावेदारों की संख्या बढ़ने की संभावना है। अब आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कौन-कौन से चेहरे खुलकर सामने आते हैं और कौन पर्दे के पीछे से अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करता है।

फिलहाल शाहपुरा की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है—सामान्य पुरुष के लिए खुले इस राजनीतिक दरवाजे से कौन अंदर दाखिल होगा और पालिका अध्यक्ष का ताज किसके सिर सजेगा?

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