मैनपुरा में आयोजित शिविर में बच्चों की सुरक्षा, लैंगिक अपराधों, कानूनी अधिकारों और निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी गई।
सवाई माधोपुर, 25 अगस्त 2026। विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन मंगलवार को ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे के अवसर पर महिला शिक्षा ग्रामीण महिला विद्यापीठ, मैनपुरा में किया गया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में विद्यार्थियों को बच्चों की सुरक्षा, लैंगिक अपराधों से बचाव, कानूनी अधिकारों तथा विधिक सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
आयोजित जागरूकता शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर की सचिव समीक्षा गौतम, असिस्टेंट एलएडीसी अक्षय राजावत एवं अधिकार मित्र मगनलाल मीना सहित अन्य उपस्थित रहे।
विद्यार्थियों को गुड टच और बैड टच का अंतर समझाया
शिविर के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर की सचिव समीक्षा गौतम ने उपस्थित विद्यार्थियों को “अच्छा स्पर्श, बुरा स्पर्श: फर्क समझो, सुरक्षित रहो” विषय के तहत बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
उन्होंने विद्यार्थियों को बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौन शोषण एवं लैंगिक अपराधों के बारे में जानकारी देते हुए ऐसे अपराधों के प्रति जागरूक रहने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में रहने का अधिकार है।
समीक्षा गौतम ने विद्यार्थियों को समझाया कि यदि उनके साथ किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार, डराने-धमकाने या शोषण जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो उन्हें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसी स्थिति में वे बिना किसी डर के अपने माता-पिता, शिक्षक, पुलिस अथवा संबंधित प्राधिकारी को तत्काल सूचना दे सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को गुड टच एवं बैड टच के बीच के अंतर के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही बच्चों के साथ होने वाले शारीरिक दुर्व्यवहार, मानसिक दुर्व्यवहार एवं भावनात्मक दुर्व्यवहार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की गई।
बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों की दी जानकारी
विधिक जागरूकता शिविर के दौरान बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी गई।
इस दौरान लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012, किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई।
विद्यार्थियों को इन कानूनों के माध्यम से बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही किसी भी प्रकार की अनुचित अथवा असुरक्षित स्थिति में जागरूक रहकर उचित सहायता लेने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
“सशक्त युवा, सशक्त भारत” अभियान की जानकारी
इस दौरान असिस्टेंट एलएडीसी अक्षय राजावत ने नालसा जागृति योजना 2025 के तहत चलाए जा रहे “सशक्त युवा, सशक्त भारत” अभियान के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को उनके कानूनी अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें न्याय व्यवस्था और विधिक सहायता के बारे में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना है।
अक्षय राजावत ने विद्यार्थियों को विधिक सेवा प्राधिकरणों एवं विधिक सेवा समितियों के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क विधिक सलाह एवं सहायता के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद व्यक्ति विधिक सेवा संस्थानों के माध्यम से कानूनी सलाह और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
राष्ट्रीय लोक अदालत और मध्यस्थता अभियान की जानकारी
जागरूकता शिविर में आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत 10 अक्टूबर 2026 के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से संबंधित प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
इसके अलावा “मीडिएशन फॉर द नेशन 3.0” अभियान के तहत मध्यस्थता के माध्यम से प्रकरणों के निस्तारण के संबंध में भी जानकारी दी गई। इस दौरान विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका और उपलब्ध कानूनी सहायता से जुड़े विभिन्न पहलुओं को विद्यार्थियों के समक्ष रखा गया।
महिला सुरक्षा पर भी हुई चर्चा
आयोजित जागरूकता शिविर में महिला शिक्षा ग्रामीण महिला विद्यापीठ की संस्थापिका जसकौर मीना ने भी विद्यार्थियों को गुड टच-बैड टच एवं महिला सुरक्षा के बारे में जानकारी प्रदान की।
उन्होंने विद्यार्थियों को व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने और किसी भी अनुचित स्थिति के संबंध में आवश्यक रूप से जानकारी साझा करने के महत्व को बताया।
इस प्रकार ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे के अवसर पर मैनपुरा स्थित महिला शिक्षा ग्रामीण महिला विद्यापीठ में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में बच्चों की सुरक्षा, लैंगिक अपराधों से बचाव, महिला सुरक्षा, कानूनी अधिकारों एवं कर्तव्यों के साथ-साथ निःशुल्क विधिक सहायता और मध्यस्थता के माध्यम से प्रकरणों के निस्तारण से जुड़े विषयों पर जानकारी प्रदान की गई।
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