शंकरगढ़ सीएचसी की बदली तस्वीर, दलालों और कमीशनखोरी पर ब्रेक


नए अधीक्षक की सख्ती के बाद अस्पताल में ही इलाज, जांच और निःशुल्क दवा मिलने से मरीजों ने व्यवस्था में सुधार की सराहना की

प्रयागराज।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर वर्षों से लग रहे आरोपों पर अब विराम लगता दिख रहा है। नए अधीक्षक के कार्यभार ग्रहण करने के बाद सीएचसी की कार्यशैली में बदलाव आया है, जिसकी गवाही अब मरीज भी दे रहे हैं।

पहले क्या था हाल?

स्थानीय लोगों के अनुसार, शंकरगढ़ सीएचसी में पिछले कई वर्षों से कुछ चिकित्सकों द्वारा अस्पताल के बजाय मरीजों को अपने निजी आवास पर बुलाकर इलाज किया जाता था। इसके एवज में उनसे मोटी फीस वसूली जाती थी।

अस्पताल परिसर में 2-3 दलालों का स्थायी डेरा होने का भी आरोप था। ये लोग ओपीडी के बाहर ही मरीजों को घेर लेते थे। आरोप है कि वे मरीजों को सरकारी दवा के बजाय बाहर की महंगी दवाइयां लिखवाते थे और प्राइवेट क्लीनिक में जाने के लिए गुमराह करते थे।

इससे गरीब मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता जा रहा था।

नए अधीक्षक के आने के बाद क्या बदला?

नए अधीक्षक ने कार्यभार संभालते ही अस्पताल की ओपीडी, इमरजेंसी, दवा वितरण काउंटर और लैब की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया। इसके बाद व्यवस्थाओं में कई बदलाव किए गए।

  1. सभी चिकित्सकों की अस्पताल में समय से उपस्थिति अनिवार्य की गई।
  2. मरीजों को घर पर बुलाकर देखने की प्रथा पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।
  3. अस्पताल परिसर से सभी अनाधिकृत लोगों और दलालों को बाहर कर दिया गया।
  4. यह सुनिश्चित किया गया कि सरकार द्वारा भेजी जा रही सभी दवाइयां मरीजों को अस्पताल से ही निःशुल्क मिलें।

मरीजों ने बताई बदली हुई व्यवस्था

सीएचसी में दवा लेने आईं सुमन देवी ने बताया, “पहले आते थे तो कहते थे दवा बाहर से ले लो, डॉक्टर साहब घर पर देखेंगे। अब यहीं पर डॉक्टर देखते हैं, जांच होती है और दवा भी यहीं मिल जाती है।”

वहीं रामलाल ने कहा, “अब लगता है कि अस्पताल में इलाज हो रहा है। पहले दलालों के डर से हम प्राइवेट में चले जाते थे, अब पैसा बच रहा है।”

अधीक्षक सुरेश कुमार यादव ने कहा हर मरीज को स्वस्थ कर भेजना लक्ष्य

इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक सुरेश कुमार यादव ने कहा, “मेरा स्पष्ट निर्देश है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले हर मरीज को सरकार की हर सुविधा निःशुल्क, समय पर और सम्मान के साथ मिलेगी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गरीबों का अस्पताल है, इसे लूट का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। चाहे मरीज अमीर हो या गरीब, उसे स्वस्थ करके ही भेजना हमारा लक्ष्य है।”

वसूली बंद हुई तो अफवाहें शुरू

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों की कथित अवैध कमाई का जरिया बंद हुआ है, वही लोग अब बौखलाकर नए अधीक्षक के खिलाफ गांवों में झूठी अफवाहें फैला रहे हैं। आरोप है कि ऐसा सुधार की इस मुहिम को रोकने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

हालांकि, आम जनता और मरीजों ने अधीक्षक के इन फैसलों का खुलकर स्वागत किया है। फिलहाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ में आए बदलाव से आम लोगों में खुशी है और लोगों का सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दे रहा है।

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