मरणोपरांत कृष्णा देवी ने दो जिंदगियों को दी रोशनी, कोठारी परिवार ने पेश की मिसाल


भारत विकास परिषद की प्रेरणा से परिजनों ने कराया नेत्रदान, रामस्नेही चिकित्सालय की टीम के सहयोग से प्रक्रिया पूरी

भीलवाड़ा। अपनों के बिछड़ने का गम गहरा था, लेकिन इसी दुख की घड़ी में कोठारी परिवार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए ऐसा निर्णय लिया, जिससे दो दृष्टिहीन लोगों के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद है। भारत विकास परिषद नेताजी सुभाष शाखा की प्रेरणा से कृष्णा देवी पत्नी प्रहलाद राय कोठारी के निधन के बाद परिजनों ने उनका मरणोपरांत नेत्रदान कराया।

परिजनों के इस पुनीत निर्णय से कृष्णा देवी की आंखें अब जरूरतमंद लोगों के जीवन में उजाला लाने का माध्यम बन सकेंगी। परिवार ने अपने दुख को समाजसेवा और मानव कल्याण से जोड़ते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया।

दुख की घड़ी में लिया पुनीत निर्णय

कृष्णा देवी के निधन के बाद शोकाकुल परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया जरूरतमंद दृष्टिहीन लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं और उन्हें दृष्टि का लाभ मिल सकता है।

परिवार के इस निर्णय को भारत विकास परिषद नेताजी सुभाष शाखा ने मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बताया।

रामस्नेही चिकित्सालय की टीम ने पूरी की प्रक्रिया

रामस्नेही चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र के आई टेक्निशियन चेतन प्रकाश के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

भारत विकास परिषद नेताजी सुभाष शाखा की ओर से कराया गया यह चौथा नेत्रदान है। शाखा सदस्य कैलाश कोठारी और गोपाल नारानीवाल ने इस पुनीत कार्य में विशेष सहयोग किया।

शाखा लगातार चला रही नेत्रदान जागरूकता अभियान

इस अवसर पर शाखाध्यक्ष पंकज लोहिया, रामेश्वर सोमानी सहित कोठारी परिवार के सदस्य और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

संस्था कार्यकर्ताओं ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। भारत विकास परिषद ने इस मानवीय पहल के लिए कोठारी परिवार का आभार व्यक्त करते हुए साधुवाद दिया।

शाखा की ओर से समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। संस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को मरणोपरांत नेत्रदान के लिए प्रेरित करना है, ताकि जरूरतमंद लोगों को दृष्टि का लाभ मिल सके।

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