नैनीताल में रामलीला का समापन, दीपा बिष्ट ने कुमाऊंनी भाषा बचाने का किया आह्वान


शेर का डांडा रामलीला मैदान में राम तिलक और राज्याभिषेक के साथ संपन्न हुआ मंचन, कलाकारों व सहयोगियों को प्रसाद और पुरस्कार देकर किया सम्मानित

नैनीताल। नैनीताल में रामलीला समापन के अवसर पर संस्कृति और कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण का संदेश दिया गया। सरोवर नगरी नैनीताल और उसके आसपास के क्षेत्रों सहित जनपद नैनीताल तथा देश-प्रदेश के अधिकांश इलाकों में श्रीराम तिलक और राम राज्याभिषेक के साथ रामलीला मंचन का समापन हुआ। नैनीताल में श्रीराम सेवक सभा, आदर्श कमेटी रामलीला सूखाताल और तल्लीताल रामलीला में भी मंचन संपन्न हो गया।

शेर का डांडा रामलीला मैदान में पूजा-अर्चना के साथ समापन

नव सांस्कृतिक सत्संग समिति की ओर से शेर का डांडा रामलीला मैदान में देर रात रामलीला मंचन का समापन किया गया। इस दौरान श्रीराम तिलक और राम राज्याभिषेक के साथ आरती एवं पूजा-अर्चना की गई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अवकाश प्राप्त वरिष्ठ महिला शिक्षिका दीपा बिष्ट उपस्थित रहीं। उन्होंने पूजा-अर्चना की और भगवान श्रीराम को दंडवत प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने कुमाऊंनी भाषा में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए अपनी संस्कृति और मातृभाषा के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

अपनी संस्कृति और कुमाऊंनी भाषा को जीवंत रखना होगा

दीपा बिष्ट ने कहा कि आज लोग अपनी संस्कृति और कुमाऊंनी भाषा को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि अपनी कुमाऊंनी भाषा को जीवंत बनाए रखने के लिए सभी को प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, इसलिए इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

उन्होंने अपने कुमाऊंनी संबोधन में कहा, “आज हमरी चेली भोत भल काम करनी उ हर जाग में जाणी भोत भल लागूँ। उनल को हमरी कुमाऊँ भाषा सब जग अलग-अलग छू। हमुक के आपणी भाषा उण चे। आज हमरी तो कुमाऊनी भाषा बिल्कुल ले विलुप्त हेते जाने। नांतिनो के त भाषा उण चे।”

इस संबोधन के माध्यम से उन्होंने कुमाऊंनी भाषा के घटते प्रयोग पर चिंता जताई और बच्चों को अपनी मातृभाषा सिखाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा को बोलचाल और दैनिक जीवन में अपनाकर ही उसे जीवंत रखा जा सकता है।

तुलसीदास के दोहों से दिया ज्ञान लेने का संदेश

कार्यक्रम के दौरान दीपा बिष्ट ने गोस्वामी तुलसीदास के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने तुलसीदास के दोहे सुनाते हुए दर्शकों से उनके विचारों और शिक्षाओं से ज्ञान प्राप्त करने की बात कही। उनके संबोधन में धार्मिक आस्था के साथ संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संरक्षित रखने का संदेश भी शामिल रहा।

उन्होंने रामलीला का मंचन करने वाले सभी रंगकर्मियों और आयोजन में सहयोग देने वाले लोगों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जनप्रतिनिधि और समिति पदाधिकारी रहे उपस्थित

समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर पालिका के सभासद जितेंद्र कुमार पांडे, रमेश प्रसाद, पूर्व नगर पालिका सभासद दीपक कुमार भोलू और समाजसेविका निर्मला पांडे मौजूद रहीं।

इसके अलावा नव सांस्कृतिक सत्संग समिति शेर का डांडा के अध्यक्ष खुशाल सिंह रावत, महासचिव पूरन चन्द्र पांडे सहित समिति के तमाम सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने रामलीला के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया।

पात्र कलाकारों और सहयोगियों को प्रसाद व पुरस्कार देकर किया सम्मानित

रामलीला मंचन के समापन पर सभी पात्र कलाकारों और सहयोगियों को भगवान श्रीराम का प्रसाद वितरित किया गया। साथ ही उन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कलाकारों और सहयोगियों के योगदान को प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से रामलीला जैसी पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और कुमाऊंनी भाषा तथा स्थानीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का संदेश दिया गया।

यह भी पढ़ें:


Aawaz Aapki News WhatsApp चैनल से जुड़ें:

सबसे तेज़ और ताज़ा खबरें सीधे अपने व्हाट्सएप पर पाएं।

WhatsApp अभी जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *