कोटा में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘अर्बुद विज्ञानीयम्’ का समापन, वैद्य हंसराज चौधरी ने सप्तधातु सिद्धांत पर दिया व्याख्यान
भीलवाड़ा। आयुर्वेद की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और अर्बुद (कैंसर) से जुड़े अनुसंधान एवं चिकित्सकीय दृष्टिकोण पर राष्ट्रीय स्तर पर हुए मंथन में भीलवाड़ा जिले के श्री नवग्रह आश्रम, मोतीबोर का खेड़ा की सेवाओं और शोध कार्यों को विशेष पहचान मिली। कोटा के वैद्य दाऊदयाल जोशी राजकीय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा एकीकृत महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘अर्बुद विज्ञानीयम्’ का सोमवार को समापन हुआ।
कार्यशाला में श्री नवग्रह आश्रम के संस्थापक वैद्य हंसराज चौधरी ने आमंत्रित वक्ता के रूप में भाग लिया और अर्बुद चिकित्सा में सप्तधातु सिद्धांत के महत्व पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उनका सम्मान भी किया गया। वैद्य चौधरी ने नवग्रह आश्रम का साहित्य महाविद्यालय को भेंट कर आश्रम की गतिविधियों, सेवा कार्यों और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से विशेषज्ञों को परिचित कराया।
1 एवं 2 नवंबर को आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नित्यानंद शर्मा के नेतृत्व एवं संयोजन में किया गया। डॉ. शर्मा इस आयोजन के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन रहे। कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक संस्थानों, चिकित्सा महाविद्यालयों और अनुसंधान संस्थाओं से जुड़े विशेषज्ञों ने कैंसर की पहचान, चिकित्सा, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद के विभिन्न सिद्धांतों पर अपने विचार साझा किए।
सप्तधातु सिद्धांत के माध्यम से अर्बुद चिकित्सा पर व्याख्यान
कार्यशाला के दूसरे दिन तृतीय सत्र में श्री नवग्रह आश्रम के संस्थापक वैद्य हंसराज चौधरी आमंत्रित वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अर्बुद चिकित्सा में सप्तधातु सिद्धांत का महत्व विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अपने व्याख्यान में उन्होंने आयुर्वेद के सप्तधातु सिद्धांत, शरीर की धातुओं की भूमिका तथा अर्बुद रोग को समझने में इस पारंपरिक अवधारणा की प्रासंगिकता पर विचार रखे। वैद्य चौधरी ने अपने अनुभवों के माध्यम से आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों और गंभीर रोगों के संदर्भ में उनके अध्ययन एवं अनुसंधान की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
राष्ट्रीय स्तर के इस अकादमिक मंच पर नवग्रह आश्रम का प्रतिनिधित्व शाहपुरा-भीलवाड़ा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण रहा। व्याख्यान के उपरांत वैद्य हंसराज चौधरी का सम्मान किया गया। उन्होंने महाविद्यालय के प्राचार्य एवं आयोजकों को श्री नवग्रह आश्रम का साहित्य भेंट किया।
इस साहित्य के माध्यम से आश्रम की स्थापना, औषधीय पौधों के संरक्षण, रोगी सेवा, आयुर्वेदिक गतिविधियों और जनजागरूकता के प्रयासों की जानकारी साझा की गई। इससे देशभर से आए विशेषज्ञों को आश्रम के कार्यों और उसकी गतिविधियों को जानने का अवसर मिला।
प्राचार्य डॉ. नित्यानंद शर्मा के संयोजन में राष्ट्रीय आयोजन
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नित्यानंद शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके नेतृत्व एवं संयोजन में आयोजित इस राष्ट्रीय अकादमिक कार्यक्रम में आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच संवाद तथा विचारों के आदान-प्रदान के लिए मंच तैयार किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य अर्बुद विज्ञान के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञों के अनुभव, चिकित्सकीय दृष्टिकोण और शोध संबंधी विचारों को एक साथ लाना रहा। इसमें देश के विभिन्न चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
योग, प्राकृतिक चिकित्सा और कैंसर प्रबंधन पर हुआ मंथन
कार्यशाला के दूसरे दिन आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली से संबद्ध सीसीआरवाईएन के सीनियर रिसर्च फेलो डॉ. भावित बंसल ने कैंसर देखभाल में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने इस विषय से जुड़े साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण और केस आधारित अनुभव साझा किए।
वहीं जयपुर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शरद पोटे ने कैंसर रोगियों के निदान एवं चिकित्सकीय प्रबंधन से जुड़े अपने क्लिनिकल अनुभव प्रस्तुत किए।
इसके बाद वैद्य हंसराज चौधरी ने सप्तधातु सिद्धांत पर विशेष व्याख्यान दिया। विभिन्न विशेषज्ञों के विचारों और अनुभवों के आदान-प्रदान के बाद समापन समारोह आयोजित हुआ। इस दौरान प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए और दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन हुआ।
575 से अधिक प्रजातियों के औषधीय पौधों का संरक्षण कर रहा नवग्रह आश्रम
भीलवाड़ा जिले के रायला क्षेत्र स्थित मोतीबोर का खेड़ा का श्री नवग्रह आश्रम पिछले कई वर्षों से गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों की सेवा, आयुर्वेदिक अनुसंधान, औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण और जनजागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय है।
आश्रम परिसर में 575 से अधिक प्रजातियों के औषधीय पौधों का समृद्ध संग्रह है। यहां औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण के साथ-साथ उनके महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
संस्थापक वैद्य हंसराज चौधरी की पहल पर आश्रम ने आयुर्वेदिक ज्ञान और औषधीय वनस्पतियों से जुड़े अनुभवों को व्यापक स्तर पर साझा करने की दिशा में कार्य किया है। कोटा की राष्ट्रीय कार्यशाला में उनकी भागीदारी से आश्रम के सेवा कार्यों, गतिविधियों और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण को राष्ट्रीय अकादमिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
भीलवाड़ा के लिए गौरव का अवसर
कोटा में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में वैद्य हंसराज चौधरी को आमंत्रित वक्ता के रूप में शामिल किया जाना, उनका सम्मान होना और नवग्रह आश्रम का साहित्य महाविद्यालय को भेंट किया जाना जिले की आयुर्वेदिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
वहीं प्राचार्य डॉ. नित्यानंद शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला ने आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच पर अपने विचार एवं अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान किया। राष्ट्रीय स्तर पर नवग्रह आश्रम की सेवाओं और शोध कार्यों की चर्चा से भीलवाड़ा जिले को विशेष पहचान मिली।
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Bhilwara, Rajasthan
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