श्रीमद् भागवत कथा में डॉ. अरुणाचार्य जी महाराज ने सुनाया विवाह प्रसंग, मंगल गीतों और पुष्पवर्षा के बीच भावविभोर हुए श्रद्धालु
प्रयागराज। प्रयागराज क्षेत्र के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री भीटेश्वर धाम दुबहा में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में सोमवार को भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास अनंत विभूषित डॉ. अरुणाचार्य जी महाराज ने अपने मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण एवं सजीव वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा पंडाल भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी के जयकारों तथा शहनाइयों की मधुर ध्वनि से गूंज उठा।
महाराज जी ने रुक्मणी विवाह प्रसंग के माध्यम से भगवान के प्रति सच्चे प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि जब रुक्मणी जी को पता चला कि उनके भाई रुक्मी उनका विवाह शिशुपाल से करना चाहते हैं, तो उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को ही अपना सर्वस्व और जीवनसाथी मान लिया।
रुक्मणी जी के प्रेम और समर्पण की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
कथा व्यास डॉ. अरुणाचार्य जी महाराज ने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि रुक्मणी जी ने एक ब्राह्मण के हाथों भगवान श्रीकृष्ण के पास गुप्त पत्र भेजा था। उस पत्र में उन्होंने लिखा था कि वह भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकी हैं और यदि उनका प्रेम सच्चा है तो वे आकर उनका हरण कर लें।
महाराज जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण भक्तों के प्रेम और समर्पण के भूखे हैं। रुक्मणी जी के सच्चे प्रेम और अटूट विश्वास को देखकर भगवान श्रीकृष्ण तुरंत रथ पर सवार होकर विदर्भ नगरी पहुंचे और सबके सामने रुक्मणी जी को अपने साथ ले आए।
इस प्रसंग के माध्यम से महाराज जी ने संदेश दिया कि यदि भक्त का प्रेम सच्चा हो और उसका समर्पण रुक्मणी जी जैसा हो, तो भगवान स्वयं उसकी सहायता के लिए आते हैं। उन्होंने भक्त और भगवान के बीच प्रेम, विश्वास तथा समर्पण के महत्व को विस्तार से समझाया।
मंगल गीतों और पुष्पवर्षा के बीच मनाया गया विवाह महोत्सव
जैसे ही कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह का प्रसंग सुनाया, कथा पंडाल का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। वहां मौजूद महिलाओं ने मंगल गीत गाए और श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर विवाह महोत्सव की खुशियां मनाईं।
भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी का विवाह महोत्सव बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। शहनाइयों की धुन, मंगल गीतों और जयकारों के बीच श्रद्धालु नाचते-गाते हुए भावविभोर हो गए। पूरे आयोजन में भक्ति और उल्लास का विशेष माहौल देखने को मिला।
मंगलवार को सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष के साथ होगा कथा का समापन
आयोजक मंडल ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। मंगलवार को कथा के अंतिम दिन दोपहर 2 बजे से भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की कथा सुनाई जाएगी।
इस दौरान सुदामा चरित्र के माध्यम से मित्रता, प्रेम और निस्वार्थ भाव का संदेश दिया जाएगा। गरीब सुदामा और द्वारकाधीश भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता के प्रसंग के साथ-साथ परीक्षित मोक्ष की कथा भी सुनाई जाएगी। इसके साथ ही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का विधिवत समापन होगा।
बुधवार को विशाल भंडारे का आयोजन
कथा के समापन के अगले दिन बुधवार को श्री भीटेश्वर धाम सेवा समिति, दुबहा की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजक मंडल ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे बुधवार को भारी संख्या में पहुंचकर भंडारे का महाप्रसाद ग्रहण करें और धर्मलाभ प्राप्त करें।
सैकड़ों श्रद्धालुओं की रही मौजूदगी
श्रीमद् भागवत कथा के दौरान प्रमुख रूप से मंदिर के पुजारी, ग्राम प्रधान, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, सैकड़ों महिलाएं, बुजुर्ग और युवा श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने कथा श्रवण कर भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह महोत्सव में सहभागिता निभाई।
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