लाखों की डिजिटल एक्सरे मशीन बनी शोपीस, गरीब मरीज निजी सेंटरों पर 250 से 350 रुपये खर्च करने को मजबूर
प्रयागराज। प्रयागराज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शंकरगढ़ में पिछले करीब चार महीने से एक्सरे मशीन बंद पड़ी है। लाखों रुपये की लागत से लगाई गई डिजिटल एक्सरे मशीन के खराब होने के कारण मरीजों को जांच के लिए निजी एक्सरे सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है। मशीन बंद होने से सबसे अधिक परेशानी गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उठानी पड़ रही है। अस्पताल में एक्सरे की सुविधा न मिलने के कारण उन्हें अपनी जेब से 250 से 350 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
एक ओर सरकार गरीबों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर शंकरगढ़ सीएचसी में चार महीने से एक्सरे मशीन बंद होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मशीन पर धूल जम रही है और एक्सरे कक्ष पर ताला लगा हुआ है। मरीज दर्द और परेशानी के बीच निजी सेंटरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
रोजाना 100 से अधिक मरीज पहुंचते हैं सीएचसी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें सड़क हादसों में घायल हुए लोग, खेतों में गिरने से फ्रैक्चर के मरीज, छाती में दर्द की शिकायत वाले मरीज और टीबी की जांच कराने वाले लोग भी शामिल हैं।
डॉक्टरों द्वारा मरीजों को एक्सरे कराने की सलाह दी जाती है, लेकिन जब मरीज एक्सरे कक्ष पहुंचते हैं तो उन्हें मशीन चार महीने से खराब होने की जानकारी देकर वापस भेज दिया जाता है। सरकारी अस्पताल में निःशुल्क एक्सरे की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मशीन बंद होने से मरीजों को बाहर जांच करानी पड़ रही है।
गरीब मरीजों की जेब पर पड़ रहा आर्थिक बोझ
सीएचसी में एक्सरे मशीन चालू रहने पर मरीजों को निःशुल्क जांच की सुविधा मिलती है, लेकिन मशीन खराब होने के कारण निजी एक्सरे सेंटरों पर 250 से 350 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
इसका सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। जिस मजदूर की दिनभर की कमाई करीब 300 रुपये है, उसे केवल एक्सरे कराने के लिए 350 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। कई बार आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मरीज जांच नहीं करा पाते और बिना एक्सरे के ही पट्टी बंधवाकर घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
लाखों की डिजिटल मशीन बनी शोपीस
सरकार की ओर से सीएचसी शंकरगढ़ में लाखों रुपये खर्च कर डिजिटल एक्सरे मशीन लगाई गई थी, ताकि क्षेत्र के मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही जांच की सुविधा मिल सके। लेकिन मशीन के रखरखाव और मरम्मत में देरी के कारण यह सुविधा लंबे समय से बंद पड़ी है।
बताया जा रहा है कि मशीन में कोई छोटा फ्यूज या अन्य पार्ट खराब है अथवा ऑपरेटर की उपलब्धता से जुड़ी समस्या है। हालांकि, चार महीने बीत जाने के बाद भी मशीन चालू नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मशीन की मरम्मत कराने की जिम्मेदारी किसकी है और अब तक इसे ठीक क्यों नहीं कराया गया?
मरीजों ने बताई अपनी परेशानी
एक मरीज ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, “मेरी टांग टूट गई, डॉक्टर ने एक्सरे लिखा। यहां आया तो बोले मशीन बंद है। बाहर 350 रुपये लगे। कहां से लाऊं?”
वहीं, दूसरे मरीज ने बताया कि छाती में दर्द होने पर डॉक्टर ने टीबी की जांच के लिए एक्सरे कराने को कहा था, लेकिन सीएचसी में मशीन बंद होने के कारण जांच नहीं हो सकी।
मरीजों के इन बयानों से साफ है कि मशीन बंद होने का सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर जांच और उपचार की जरूरत है।
सीएचसी अधीक्षक ने मेंटेनेंस व्यवस्था पर डाली जिम्मेदारी
इस संबंध में जब सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर रामगोपाल वर्मा से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया, “मैं डॉक्टर हूं, कोई इंजीनियर नहीं। यह मेंटेनेंस वालों पर डिपेंड करता है कि कब तक मशीन बनेगी।”
अधीक्षक के इस बयान के बाद सवाल उठता है कि जब सरकारी अस्पताल में मरीजों को एक्सरे की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मशीन लगाई गई है, तो उसकी मरम्मत और संचालन की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? क्या चार महीने तक मशीन बंद रहने के बावजूद मरीजों की परेशानी पर किसी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान नहीं गया?
सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों पर उठे सवाल
सरकार की ओर से आयुष्मान भारत और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जैसी योजनाओं के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं। लेकिन शंकरगढ़ सीएचसी में एक्सरे मशीन बंद होने, जन औषधि केंद्र पर ताला लगे होने और अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं होने को लेकर क्षेत्र में सवाल उठ रहे हैं।
ऐसे में गरीब मरीजों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है कि वे जांच और उपचार के लिए आखिर कहां जाएं। सरकारी अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें निजी केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
क्षेत्रीय लोगों ने उठाई मशीन चालू कराने की मांग
क्षेत्रीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों से सीएचसी शंकरगढ़ की एक्सरे मशीन को शीघ्र चालू कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने निम्नलिखित मांगें रखी हैं—
- पिछले चार महीनों में कितने मरीजों को एक्सरे मशीन बंद होने के कारण बिना जांच लौटना पड़ा, इसका ऑडिट कराया जाए।
- सीएचसी शंकरगढ़ में एक्सरे टेक्नीशियन की स्थायी नियुक्ति की जाए।
- मशीन की खराबी को जल्द दूर कर एक्सरे सुविधा दोबारा शुरू कराई जाए।
- मशीन चालू होने तक मरीजों के निजी एक्सरे का खर्च सरकार की ओर से वहन किया जाए।
- लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
सीएमओ और स्वास्थ्य मंत्री तक कब पहुंचेगी गरीबों की आवाज?
स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा का चार महीने तक बंद रहना क्षेत्र के मरीजों के लिए गंभीर परेशानी का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का नियमित संचालन सुनिश्चित होना चाहिए, ताकि गरीब मरीजों को जांच के लिए निजी सेंटरों पर आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
अब सवाल यह है कि सीएमओ प्रयागराज और स्वास्थ्य मंत्री इस समस्या पर कब संज्ञान लेंगे और शंकरगढ़ सीएचसी की एक्सरे मशीन कब तक चालू होगी? फिलहाल मरीजों को राहत मिलने का इंतजार है और क्षेत्रीय लोगों ने जल्द समाधान की मांग उठाई है।
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