चकेरी महापंचायत, 2 लाख लोगों ने एकजुट होकर डूंगरी बांध के विरोध में दिखाई एकता


डूंगरी बांध को लेकर सरकार से रद्दीकरण की मांग

सवाई माधोपुर| चकेरी गांव में रविवार को डूंगरी बांध विरोध में एक ऐतिहासिक महापंचायत आयोजित हुई। महापंचायत की अध्यक्षता आंदोलन की अध्यक्षता समिति ने की । इस पंचायत में प्रदेशभर के अलग-अलग राजनीतिक संगठनों,सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि,नेता,आंदोलनकारी और प्रभावित गांवों के लोग शामिल हुए। अनुमानित दो लाख से अधिक ग्रामीण एकत्रित हुए और एकजुट होकर डूंगरी बांध को रद्द करने की मांग की। महापंचायत में आने वाले आंदोलन के लाखों समर्थकों का चकेरी के गजानंद पटेल,रामस्वरूप पटेल, रामचीज सरपंच और पूर्व सरपंच राजेंद्र मीणा ने स्वागत किया ।

नेताओं और वक्ताओं की मौजूदगी

महापंचायत में कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया, जिनमें पूर्व मंत्री राजेंद्र गुड़ा,श्योपुर विधायक बाबूलाल झंडेल,पूर्व विधायक मोतीलाल मीणा समेत कई प्रोफेसर,रिटायर्ड ऑफिसर,पूर्व सांसद और विधायक शामिल रहे।

इसके साथ ही मंच से संबोधित करने वाले प्रमुख वक्ताओं में शामिल रहे —
प्रभुलाल एएसपी,अनिल मीणा, हंसराज आदिवासी, डॉ. अशोक हर्षी पटेल, डॉ. गंगासहाय मीणा, डॉ. श्यामसुंदर मीणा, अमित दाधीच, शोएब खान, शंभू पटेल, बंशीलाल मीणा, मुकेश प्रधान, कमलेश पटेल,अब्दुल खलाक,कालूराम मीणा, मनोज मीणा, सीता आदिवासी, अमरसिंह मीणा, हुकुम बाई, डॉ. हेमराज दिवाकर, प्रेमलाल चौधरी, हरकेश सरपंच, भरतलाल, रामसहाय फौजी,जगदीश सरपंच आदि ने विचार व्यक्त करते हुए सरकार को चेताया कि तुरंत प्रभाव से जन विरोधी डूंगरी बांध की चाल को चलना बंद करें। इस क्षेत्र के लोग पूरी तरह जाग चुके हैं । किसी भी सूरत में इस बांध को नहीं बनने दिया जाएगा । मंच संचालन भवानी सिंह मीणा, सीताराम बेरवा ने किया अंत में आंदोलन से जुड़े मुकेश भूप्रेमी ने सभा में लिए गए निर्णय पढ़कर सुनाएं ।

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पंचायत के प्रमुख निर्णय

जब तक सरकार डूंगरी बांध की डीपीआर और नोटिफिकेशन सार्वजनिक नहीं करती, तब तक आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा।

जैसे ही डीपीआर और नोटिफिकेशन सामने आएंगे, आंदोलन नई और कठोर दिशा में आगे बढ़ेगा।

इस वर्ष दीवाली को “काली दीवाली” के रूप में मनाने और किसी भी खरीदारी का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया।

नवंबर माह में सपोटरा क्षेत्र में विशाल चेतावनी सभा आयोजित होगी।

बांध के पक्ष में रहने वाले या आंदोलन का समर्थन न करने वाले नेताओं और संगठनों का गांव-गांव में बोर्ड लगाकर बहिष्कार किया जाएगा।

हर घर पर आंदोलन का झंडा लगाने और राजनीतिक दलों के झंडे-बैनर हटाने का संकल्प लिया गया।

हर महीने आंदोलन की दो रणनीतिक बैठकें होंगी।

यदि सरकार ने कोई जबरन कदम उठाया तो आंदोलन तुरंत कठोर रणनीति अपनाएगा।

आंदोलन का समर्थन न करने वाले विधायक और सांसदों से इस्तीफा मांगा जाएगा और उनके घरों का घेराव किया जाएगा।

आगामी पंचायती राज चुनाव का बहिष्कार भी सर्वसम्मति से तय किया गया।

ज्ञापन सौंपा गया
महापंचायत के अंत में जिला कलेक्टर, सवाई माधोपुर को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें डूंगरी बांध रद्द करने और सूरवाल बांध की समस्याओं को दूर करने की मांग रखी गई।


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