शाहपुरा में सुलतान शाह बावड़ी के पास अतिक्रमण हटाया, 200 जवान रहे तैनात


वक्फ ट्रायब्यूनल के आदेश के बाद नगर पालिका की बड़ी कार्रवाई, निषेधाज्ञा के बीच जेसीबी से हटाए गए कथित मजारें और अस्थायी कब्जे

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी। सुलतान शाह बावड़ी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत गुरुवार को शाहपुरा शहर में नगर पालिका प्रशासन ने पुराने बस स्टैंड के पास स्थित विवादित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। सुबह से भारी प्रशासनिक तैयारी, निषेधाज्ञा और करीब 200 पुलिस जवानों की तैनाती के बीच जेसीबी मशीनों ने वर्षों पुराने अस्थायी कब्जों, केबिनों और आधा दर्जन कथित मजारों को हटाया। पूरी कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित माहौल बना रहा और प्रशासन ने इसे न्यायालय एवं वक्फ ट्रायब्यूनल के आदेशों की पालना बताया।

निषेधाज्ञा के बीच शुरू हुई कार्रवाई

कार्रवाई से पहले शाहपुरा उपखंड अधिकारी सुनील मीणा ने संभावित संवेदनशीलता को देखते हुए बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

गुरुवार सुबह विवादित क्षेत्र की चारों ओर से बैरिकेडिंग कर दी गई। पुराने बस स्टैंड से सुलतान शाह बावड़ी क्षेत्र तक आने-जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया। पूरे इलाके में प्रशासनिक सतर्कता के चलते स्थानीय लोगों के बीच कार्रवाई को लेकर दिनभर चर्चा बनी रही।

वर्षों से चला आ रहा था भूमि विवाद

सुलतान शाह बावड़ी के आसपास स्थित भूमि लंबे समय से विवाद का विषय बनी हुई थी। इस भूमि के स्वामित्व को लेकर वक्फ कमेटी और नगर पालिका शाहपुरा के बीच कानूनी विवाद चल रहा था। वक्फ कमेटी ने लगभग एक बीघा 10 बिस्वा भूमि को वक्फ संपत्ति बताते हुए अपना दावा प्रस्तुत किया था।

मामला राजस्थान वक्फ ट्रायब्यूनल तक पहुंचा, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद ट्रायब्यूनल ने वक्फ कमेटी के बड़े दावे को अस्वीकार करते हुए केवल 9 गुणा 22 फीट भूमि पर ही उनका अधिकार स्वीकार किया। इसी आदेश के बाद नगर पालिका को शेष भूमि पर कार्रवाई करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

नोटिस के बाद भी नहीं हटे कब्जे

नगर पालिका ने कार्रवाई से पहले सार्वजनिक नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया था। नोटिस मिलने के बाद कुछ सब्जी विक्रेताओं ने अपने अस्थायी ढांचे हटा लिए थे।

इसके बावजूद विवादित क्षेत्र में कई अस्थायी निर्माण, केबिनें और कथित धार्मिक ढांचे मौजूद रहे। प्रशासन ने अंतिम समय तक स्वैच्छिक रूप से अतिक्रमण हटाने की प्रतीक्षा की, लेकिन पर्याप्त कार्रवाई नहीं होने पर जेसीबी मशीनों को मैदान में उतारा गया।

वक्फ कमेटी ने मांगा समय, प्रशासन ने किया इंतजार

कार्रवाई शुरू होने के दौरान वक्फ कमेटी के सदर हमीद खान अपने अधिवक्ता ताज मोहम्मद के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता करते हुए संबंधित मजारों को सम्मानपूर्वक हटाने के लिए कुछ समय देने का अनुरोध किया।

प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए लगभग एक घंटे तक कार्रवाई रोके रखी और स्पष्ट किया कि यदि हटाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर दी जाती है तो सहयोग किया जाएगा। हालांकि निर्धारित समय में हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

जेसीबी से हटाए गए कथित मजारें और अस्थायी निर्माण

निर्धारित समय समाप्त होने के बाद जेसीबी मशीनों ने विवादित क्षेत्र में बने कच्चे निर्माणों को हटाना शुरू किया। कार्रवाई के दौरान आधा दर्जन कथित मजारों को हटाया गया। इसके अलावा वर्षों से बनी अस्थायी सब्जी मंडी की केबिनों और अन्य कब्जों को भी ध्वस्त कर दिया गया।

कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे और कई लोग पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड करते दिखाई दिए।

200 पुलिस जवानों की तैनाती, हर गतिविधि पर रही नजर

कार्रवाई को देखते हुए जिलेभर से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। करीब 200 पुलिस जवानों की तैनाती की गई ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। आसपास के भवनों की छतों पर भी पुलिसकर्मी तैनात रहे और पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई।

मौके पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश आर्य, डिप्टी ओमप्रकाश विश्नोई, थाना प्रभारी सुरेश शर्मा, नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी प्रकाश साहू, तहसीलदार भीवंराज परिहार सहित राजस्व, पुलिस और नगर पालिका के कई अधिकारी मौजूद रहे। वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे अभियान की लगातार निगरानी की।

प्रशासन ने कहा- न्यायालय के आदेशों की हुई पालना

कार्रवाई के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश आर्य ने कहा कि पूरी कार्रवाई न्यायालय और वक्फ ट्रायब्यूनल के आदेशों की पालना में की गई है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था और प्रशासन की प्राथमिकता पूरे अभियान के दौरान शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना रही।

वहीं नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी प्रकाश साहू ने बताया कि ट्रायब्यूनल के आदेशानुसार 9 गुणा 22 फीट भूमि को यथावत रखा गया है, जबकि शेष पूरी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है।

शहरभर में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई

सुलतान शाह बावड़ी के पास हुई यह कार्रवाई पूरे शाहपुरा शहर में चर्चा का प्रमुख विषय रही। लंबे समय से विवादों में रही इस भूमि पर प्रशासन की निर्णायक कार्रवाई को न्यायालय के आदेशों की पालना और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नगरवासियों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा रही कि वर्षों से लंबित इस मामले में आखिरकार प्रशासन ने निर्णायक कार्रवाई की। अब लोगों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि का भविष्य में किस प्रकार उपयोग किया जाएगा। गुरुवार की यह कार्रवाई शाहपुरा प्रशासन के लिए एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा रही, जिसे प्रशासन ने सख्ती, रणनीति और संयम के साथ पूरा किया।

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