विश्व शांति कल्याण चातुर्मास में आचार्यश्री ने निष्काम सेवा, रामभक्ति और राष्ट्रभक्ति का संदेश देते हुए सत्संग का नया समय घोषित किया।
भीलवाड़ा। अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि जीवन में निष्काम भाव से किए गए कर्म, सेवा और प्रभु भक्ति ही मनुष्य को सच्चा एवं अखंड सुख प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य के दुखों का सबसे बड़ा कारण उसकी कामनाएं हैं। यदि भगवान श्रीराम और सद्गुरु की कृपा से मनुष्य संसार के बजाय परमात्मा को चाहने लगे तो उसके सभी दुख समाप्त होकर जीवन आनंदमय हो जाता है।
वे सोमवार को विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के अंतर्गत आयोजित दैनिक सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
भीलवाड़ा की श्रद्धा और भक्ति की सराहना
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि उन्हें भीलवाड़ा में पांचवीं बार चातुर्मास करने का अवसर मिला है, जो उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, साधना और समाज निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का जीवन “सत्यम्, शिवम्, सुंदरम्” के आदर्शों पर आधारित होना चाहिए तथा परिवार और समाज में रामभक्ति के साथ राष्ट्रभक्ति का संदेश भी प्रसारित होना चाहिए।
सेवा का उद्देश्य केवल परमात्मा की प्राप्ति हो
आचार्यश्री ने कहा कि सेवा कभी भी पद, प्रतिष्ठा, सत्ता या सांसारिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं करनी चाहिए। सच्ची सेवा वही है, जो निष्काम भाव से केवल ईश्वर की प्रसन्नता और परमात्मा की प्राप्ति के लिए की जाए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को केवल ईश्वर की कृपा और उनके साक्षात्कार की कामना करनी चाहिए। सांसारिक इच्छाएं जितनी कम होंगी, जीवन उतना ही शांत और सुखमय बनेगा।
चार गुणों से जीवन होगा सफल
प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन में जवाबदारी, जिम्मेदारी, समझदारी और ईमानदारी जैसे चार गुणों को सदैव बनाए रखे, तो अधिकांश समस्याओं का समाधान स्वतः हो जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
दैनिक सत्संग का समय बदला
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आचार्य रामदयालजी महाराज ने दैनिक सत्संग का समय परिवर्तित करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि मंगलवार से प्रतिदिन सुबह 9 बजे से 10 बजे तक प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।
सत्संग के समापन पर डाड परिवार “राम-राम सा” के सदस्यों ने आचार्यश्री की आरती उतारी। कार्यक्रम में भीलवाड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चातुर्मास में होंगे विविध आध्यात्मिक आयोजन
चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 5 से 6 बजे रामधुनी, 8:30 से 9 बजे वाणीजी का पाठ तथा 9 से 10 बजे प्रवचन आयोजित होंगे। प्रतिदिन सूर्यास्त के समय संध्या आरती भी होगी।
इसके अलावा 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा महोत्सव, 13 से 20 सितंबर तक पूज्य वाणीजी प्रवचन सप्ताह एवं भागवत ज्ञान महोत्सव, 25 सितंबर को आचार्यश्री अवतरण महोत्सव, 26 सितंबर को अवतरण आनंदोत्सव, 15 अक्टूबर को पंचमी गोटका जी की भव्य शोभायात्रा तथा 22 अक्टूबर को चातुर्मास का विधिवत समापन आयोजित किया जाएगा।
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Bhilwara, Rajasthan
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