शिवाड़ 28 अगस्त। घुश्मेश्वर महादेव मन्दिर में बुधवार को शुक्र देव विदाई तथा व्यास पीठ पूजन एवं हवन यज्ञ के साथ भागवत कथा की पूर्णाहुति की गई।
कथा समापन के अवसर पर कथा वाचक बाल विजय शास्त्री ने राजा परीक्षित की कथा को पूर्ण कर, शुक्र देव महाराज की विदाई कराकर प्रसंग को विराम दिया। कथा के अंतिम दिन पण्डित विजय शास्त्री ने सुदामा चरित्र एवम गुरु की महिमा की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु हमारे जीवन की दिशा एवम दशा दोनो को बदलते हैं लेकिन हमे दुख इस बात का है हम गुरु को मानते हैं लेकिन गुरु की बातो को नही मानते हैं इसी कारण हम दुखी रहते हैं। गुरु मिलने से हमे नया जीवन मिलता है। गुरु से मार्ग दर्शन एवम गुरु ही हमारे कष्टों का निवारणकर्ता है। उन्होंने कहा कि हम भले ही सुदामा हों लेकीन मित्र कृष्ण जैसा ही होना चाहिए। कथा वाचक बाल विजय शास्त्री ने बताया कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भागवत कथा का श्रवण करता है उसका सम्बन्ध अपने आप ही कृष्ण से जुड़ जाता है तथा कृष्ण की कृपा उन पर सदा बनी रहती हैं और उस व्यक्ति पर कलयुग भी अपना प्रभाव नही जमा पाता है।
इस अवसर पर मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष प्रेम प्रकाश शर्मा बेनी माधव शर्मा सत्यनारायण मिश्रा लोकेंद्रसिंह लल्लू लाल महावर राम प्रकाश शर्मा रामराय चौधरी सहित अनेक सदस्य ने भागवत कथा में पधारे 21 पंडितों यजमानों कथा वाचक बाल विजय शास्त्री को माला साफा दुपट्टा पहना कर स्मृतिचिन्ह भेट कर स्वागत किया।

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