भीटेश्वर धाम दुबहा में भागवत कथा का समापन, भंडारे में उमड़े श्रद्धालु


सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के समापन पर हवन-पूजन और पूर्णाहुति, हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर ग्रहण किया महाप्रसाद

प्रयागराज। जनपद के यमुनानगर बारा क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भीटेश्वर धाम दुबहा में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का मंगलवार को विधिवत समापन हो गया। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में कथा व्यास डॉ. अरुणाचार्य जी महाराज ने भागवत के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर किया। कथा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया।

कथा समापन के अगले दिन बुधवार को विधि-विधान से हवन-पूजन और पूर्णाहुति का आयोजन किया गया। इसके बाद विशाल भंडारा हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया।

मंगलवार को कथा विश्राम दिवस पर हुआ भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन

मंगलवार को श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथा व्यास डॉ. अरुणाचार्य जी महाराज ने भागवत के अंतिम प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका लीला, उद्धव-गोपी संवाद, सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष के प्रसंगों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।

कथा के इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा विश्राम के समय भक्तों की आंखें नम हो गईं। महाराज जी ने अपने प्रवचन में कहा, “भागवत कथा समाप्त नहीं होती, यह तो जीवन में शुरू होती है। जो भागवत को जीवन में उतार ले, उसका जीवन ही वृंदावन बन जाता है।”

उन्होंने भागवत के संदेश को अपने जीवन और व्यवहार में अपनाने की प्रेरणा दी।

बुधवार को हवन-पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति

सप्त दिवसीय कथा के समापन के अगले दिन बुधवार को भीटेश्वर धाम दुबहा में प्रातःकाल विधि-विधान के साथ हवन-पूजन का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कथा व्यास और यजमानों ने हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कीं।

इस दौरान क्षेत्र की सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की गई। पूर्णाहुति के साथ ही पूरा धाम “हर हर महादेव” और “जय श्री राधे-कृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा। धार्मिक वातावरण में श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया।

विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद

पूर्णाहुति के बाद भीटेश्वर धाम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तियों में बैठकर महाप्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में पूड़ी-सब्जी, दाल-चावल, खीर और मिठाई का प्रसाद वितरित किया गया।

आयोजक मंडल के सदस्य और सैकड़ों सेवादार दिनभर सेवा कार्य में जुटे रहे। सेवादारों ने श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से प्रसाद वितरित किया और इस बात का विशेष ध्यान रखा कि कोई भी श्रद्धालु बिना महाप्रसाद ग्रहण किए वापस न जाए।

भंडारे में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर आयोजन के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

आयोजक मंडल ने सहयोगियों का जताया आभार

सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सफल आयोजन के बाद आयोजक मंडल ने सभी श्रद्धालुओं, दानदाताओं, सेवादारों, प्रशासन और पुलिस का आभार व्यक्त किया।

आयोजकों ने कहा कि सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र में भक्ति, सद्भाव और भाईचारे का वातावरण बनाया। कथा, हवन-पूजन, पूर्णाहुति और विशाल भंडारे में लोगों की भागीदारी से आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

इस अवसर पर क्षेत्र के सैकड़ों गणमान्य नागरिक, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। भीटेश्वर धाम में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम का समापन भक्तिमय वातावरण और सामूहिक सेवा भावना के साथ हुआ।

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