10 साल से दलितों की जमीन पर दबंगों का कब्जा


पूर्व में दबंगों द्वारा दलित परिवार में एक की हत्या कर देने के बाबजूद जमीन पर कब्जा बरकरार

पीड़ित परिवार प्रशासन से न्याय को दर दर रहा भटक

परिवार आत्महत्या करने को मजबूर

वैर एक ओर केंद्र और प्रदेश में चल रही भाजपा सरकार दलितों के उत्थान और उनको विकसित करने के लिए नई-नई योजनाएं संचालित कर रही है कुछ ऐसे दबंग हैं जिन पर शासन प्रशासन का कोई भय नहीं है वह दिन रात अपनी दबंगी के दम पर गरीबों, दलितों कमजोरों की भूमि पर नजरे गड़ाए बैठे हैं। एवं उनका उत्पीड़न करते हुए उनकी भूमि को कब्जा करने का प्रयास करते रहते हैं ऐसा ही एक मामला वैर तहसील के गांव करावली का मामला सामने आया है दलित परिवार दशकों से दबंगों से अपनी पैतृक जमीन को पाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
पीड़ित आरामी सिंह एवं उनके परिजनों ने बताया कि मेरी लगभग 19 बीघा भूमि नजदीक के गांव गोविंदपुरा गांव के पास है जिस पर दबंग लोग लालाराम पुत्र सौदान,हरिओम,रामनरेश पुत्र रामकुंवर,महेश,दिनेश पुत्र तुलसी जाति गुर्जर निवासी गोविंदपुरा थाना भुसावर तहसील वैर एवं उनके रिश्तेदार आरामसिंह, बल्लोराम,प्रेम,पप्पूराम पुत्र नगूराम,जितेंद्र पुत्र आरामसिंह जाति गुर्जर निवासी बड़ा गांव खेड़ला थाना सलैमपुर जिला दौसा के निवासी हैं। यह जमीन गोविंदपुरा में स्थित है। जिसको दबंग लोग हड़पना चाहते हैं। ये लोग हमे इस गांव से भगाना चाहते हैं।मैंने शासन प्रशासन से कई बार गुहार लगाई मैं जब भी परिवार सहित उसे खेत को जोतने बोने जाता हूं तो दबंग लाठी डंडे फरसा एवं बंदूक लेकर के हमला कर देते हैं।

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जमीनी विवाद को लेकर दबंगों ने पीड़ित परिवार से एक व्यक्ति को उतार दिया मौत के घाट

सन 2016 में पीड़ित परिवार अपनी पैतृक जमीन को जोतने गया तो दबंगों ने हमला कर दिया और पीड़ित के भतीजे को लाठी डंडे एवं परसों से वार कर मार दिया जिसकी शिकायत पीड़ित ने स्थानीय उपखंड अधिकारी से लेकर जिला कलेक्टर एवं आईजी से की लेकिन दबंगों के दबाव की वजह से शासन प्रशासन आरोपियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं कर रहा है। आज भी पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाने के लिए सरकारी दफ्तरों में न्याय के लिए दर दर भटक रहा है। पीड़ित परिवार की 19 बीघा जमीन दबंगों के कब्जे में है।पीड़ित आरामी ने कहा कि अगर प्रशासन के द्वारा मेरी जमीन का मुझे मालिकाना हक नहीं दिलाया गया तो शासन प्रशासन के आगे आत्महत्या करने को मजबूर हो जाऊंगा।


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