श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप हो जाते हैं नष्ट-कथा व्यास


प्रयागराज। जनपद के यमुनानगर विकासखंड जसरा के अंतर्गत समाजसेवी मुकेश द्विवेदी के पैतृक आवास सारीपुर गांव में सोमवार को पांचवे दिन श्रीमद् भागवत कथा का व्याख्यान करते हुए आचार्य राजीव द्विवेदी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा में वक्ता श्रोता और प्रश्नकर्ता अर्थात कथा कहने वाला, सुनने वाला एवं कथा करवाने वाले यह तीनों मात्र भगवान की कथा सुनने से पवित्र हो जाते है। भगवान की कथा सुनने मात्र से भक्ति महारानी हमारे हृदय में विराजमान हो जाती हैं। इसके पश्चात भगवान श्री कृष्ण के कथा का व्याख्यान करते हुए कहा कि जिसमें भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ जेल के ताले टूट गए, पहरेदार सो गए, वासुदेव व देवकी बंधन मुक्त हो गए। प्रभु की कृपा से कुछ भी संभव नहीं है अर्थात सब संभव है। प्रभु की कृपा न होने पर भगवान मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देते हैं। कलियुग में भागवत कथा श्रवण मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है साथ ही जन्म-जन्मांतर के पाप भी नष्ट हो जाते हैं। जब जब धरती पर अनीति अत्याचार अधर्म का साम्राज्य बढ़ता है तब तब भगवान स्वयं प्रलयकारी रूप धारण कर सृष्टि का उलट फेर किया करते हैं एवं जन्म लेकर धर्म और सनातन संस्कृति के उत्थान की दिशा में पुनः सृष्टि का निर्माण करते हैं। उक्त अमृत वचन सारीपुर गांव में द्विवेदी परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथा वाचक कुलगुरु आचार्य राजीव द्विवेदी के द्वारा व्यक्त किए गए।भगवान श्री कृष्ण को जब वासुदेव जी लेकर चले तो यमुना जी अपने रौद्र रूप में थी परंतु भगवान के चरण छूकर तुरंत वासुदेव जी के घुटने तक आ गयी जिससे वासुदेव जी भगवान श्री कृष्ण को लेकर यमुना पार कर गए।भगवान की कथा सुन रहे उपस्थित लोगों में मुख्य यजमान कल्याणी देवी, समाज सेवी मुकेश द्विवेदी , योगेश द्विवेदी, विवेक द्विवेदी, गायक मिश्रा बंधु मामू द्विवेदी आदि तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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