भरतपुर, 21 फरवरी। महिला अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह एवं अनुदान योजना के स्वरूप एवं क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं एवं प्रमुख समस्याओं के संबंध में शुक्रवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में उप निदेशक महिला अधिकारिता राजेश कुमार ने बताया कि बाल विवाह पर अंकुश लगाने के साथ विवाह में होने वाले अपव्यय को रोकने हेतु विभाग द्वारा यह योजना संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि इसके लिए रजिस्टर्ड समाज सेवी संस्थाओं को विवाह आयोजन की तिथि से 15 दिवस पूर्व अपनी एसएसओ आईडी से ऑनलाईन आवेदन करने पर विवाह आयोजन एवं अनुदान की अनुमति प्राप्त की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि योजना के क्रियान्वयन कोई विवाद उत्पन्न होने पर जिला कलक्टर स्तर पर निस्तारित किया जा सकेगा। वरिष्ठ सहायक लोकेन्द्र शर्मा ने बताया कि सामूहिक विवाह में विभाग की ओर से विवाह आयोजन की अनुमति पश्चात् 60 दिवस की अवधि में पोर्टल पर विवाह पंयीयन की प्रति अपलोड करनी होगी। इसके पश्चात प्रति जोडा अनुदान राशि 25 हजार रूपये मिलेगी जिसमें 21 हजार रूपये सीधे वधू के खाते में तथा 4 हजार रूपये की राशि आयोजक संस्था के खाते में हस्तान्तरित की जाती है। उन्होंने बताया कि योजना में सर्व समाज, जाति, धर्म के सामूहिक आयोजनो में एक संस्था को अतिरिक्त 10 लाख रूपये की सहायता राशि का भी प्रावधान है। कार्यशाला में ज्योति चौधरी, पूजा वशुमति एवं स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।