रामद्वारा धाम में चातुर्मासिक सत्संग प्रवचनमाला


भक्त के लिए मोक्ष आसान पर महारास में शामिल होने का अधिकार मिलना दुर्लभ-शास्त्री

महारास में स्वामी भाव में पुरूष केवल एक भगवान श्रीकृष्ण बाकी सब आत्माएं नारी रूप में

रामद्वारा धाम में चातुर्मासिक सत्संग प्रवचनमाला

भीलवाड़ा, 4 अक्टूबर। परमात्मा भक्त को मोक्ष तो देता है पर उनकी लीलाओं यानि महारास में शामिल होने का अधिकार अनेक जन्मों तक तप या साधना करने वाले बहुत कम प्राणियों को ही देता है। इस रस में पुरूष भाव समाप्त हो जाता है ओर केवल स्वामी भाव रह जाता है जो गोपी भाव में विद्यमान है। गोपी भाव से ही रास मण्डल में अधिकार मिलता है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय श्री रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के अधीन शहर के माणिक्यनगर स्थित रामद्वारा धाम में वरिष्ठ संत डॉ. पंडित रामस्वरूपजी शास्त्री (सोजत सिटी वाले) ने बुधवार को चातुर्मासिक सत्संग प्रवचनमाला के तहत व्यक्त किए। उन्होंने गर्ग संहिता के माध्यम से चर्चा करते हुए कहा कि महारास में स्वामी भाव में पुरूष केवल एक भगवान श्रीकृष्ण ही है बाकी सब आत्माएं नारी रूप में है। भगवान शंकर भी रात्रि में रास मण्डल में आए थे पर वृन्दावन में प्रवेश द्वार पर रोक दिए गए क्योंकि वहां पुरूष भाव में प्रवेश निषेध है। तब भगवान शंकर को गोपी कुण्ड में स्नान कर गोपी बनकर गोपी रूप में महारास में भाग लेने का अधिकार मिला। तब से वृन्दावन में शिव भगवान गोपेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए ओर उनका मंदिर आज भी इसी नाम से है। शास्त्रीजी ने कहा कि रास भाव में कथानक का जो रूपक है उसका आध्यात्मिक भाव ही गोपी भाव ओर स्वामी भाव है। ऐसे भाव में जीवात्मा सदैव परमात्मा के सामिप्य भाव को बनाए रखना चाहती है। मोक्ष में नहीं जाकर उनके समीप रहकर उनकी लीलाओं का आनंद निरन्तर लेने का भाव रहता है। उन्होंने कहा कि जीवात्मा को महारास का आनंद लेने के लिए ईश्वर भाव के रस में या उनके रंग में रचना होता है। भक्त की समर्पित भाव से की गई भक्ति उसे भगवान के समीप जाने का अवसर प्रदान करती है। सत्संग के दौरान मंच पर रामस्नेही संत श्री बोलतारामजी एवं संत चेतरामजी का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। चातुर्मास के तहत प्रतिदिन भक्ति से ओतप्रोत विभिन्न आयोजन हो रहे है। भीलवाड़ा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु सत्संग-प्रवचन श्रवण के लिए पहुंच रहे है। प्रतिदिन सुबह 9 से 10.15 बजे तक संतो के प्रवचन व राम नाम उच्चारण हो रहा है। चातुर्मास के तहत प्रतिदिन प्रातः 5 से 6.15 बजे तक राम ध्वनि, सुबह 8 से 9 बजे तक वाणीजी पाठ, शाम को सूर्यास्त के समय संध्या आरती का आयोजन हो रहा है।


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