आरयूआईडीपी कार्यशाला में हाइब्रिड एन्यूटी और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर मंथन


शाहपुरा। राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के पंचम चरण में प्रस्तावित हाइब्रिड एन्यूटी (HAM) और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में आज एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के प्रतिनिधियों सहित 100 से अधिक निवेशक, संभावित बिडर्स, तकनीकी विशेषज्ञ, विभागीय अधिकारी और हितधारक शामिल हुए।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य HAM और PPP मॉडल की रूपरेखा पर चर्चा करना और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मंथन करना था। परियोजना की महत्ता को देखते हुए विभिन्न विभागों, निजी कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।

उद्घाटन सत्र और स्वागत भाषण
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए शासन सचिव, स्वायत्त शासन विभाग, श्री रवि जैन ने कहा कि आरयूआईडीपी के पंचम चरण में प्रस्तावित मॉडल राज्य के शहरी आधारभूत विकास कार्यों को गति देने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने विचार साझा करें और परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग दें।

आरयूआईडीपी के परियोजना निदेशक श्री हरि मोहन मीना ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और पिछले चरणों में किए गए कार्यों और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस चरण में 296 नगर निकायों में लगभग 19,149 करोड़ रुपये की लागत से शहरी आधारभूत विकास कार्य किए जाएंगे। मीना ने सभी हितधारकों से सुझाव और फीडबैक लेने का आग्रह किया।

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एडीबी की भूमिका और विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
एशियन डेवलपमेंट बैंक की ओर से सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर श्री भावेश कुमार ने कहा कि यह कार्यशाला विभिन्न स्टेकहॉल्डर्स का फीडबैक लेने के लिए आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि HAM और PPP मॉडल से शहरी परियोजनाओं में निवेश, दक्षता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सकती है।

कार्यशाला में जल संसाधन विभाग, जलदाय विभाग, एचएनबी ग्रुप, जेडब्लूआईएल इंफा लिमिटेड, एल एण्ड टी, पीएनसी इंफा और स्वेज इंडिया ने प्रस्तुतिकरण किया। इन प्रस्तुतियों में HAM मॉडल पर आधारित सफल परियोजनाओं, उनके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान के अनुभव साझा किए गए।

मुख्य चर्चा बिंदु और सुझाव
कार्यशाला में प्रमुख चर्चा बिंदु HAM और PPP मॉडल के लाभ, उनके वित्तीय और तकनीकी पहलू, निजी निवेशकों की भागीदारी, समयबद्ध परियोजना क्रियान्वयन, गुणवत्ता नियंत्रण और जोखिम प्रबंधन थे। प्रतिभागियों ने सुझाव दिए कि परियोजना को पारदर्शिता, वित्तीय स्थिरता और तकनीकी दक्षता के आधार पर लागू किया जाए।

अधिकारी और निवेशकों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि HAM मॉडल में निजी कंपनियों की भागीदारी परियोजना की गति बढ़ाती है, जबकि PPP मॉडल सरकारी और निजी क्षेत्रों के बीच साझेदारी के माध्यम से वित्तीय और प्रबंधन संबंधी जिम्मेदारियों को संतुलित करता है। इसके माध्यम से निवेशकों को आकर्षित करना, समय पर कार्य संपन्न कराना और गुणवत्ता सुनिश्चित करना संभव होता है।

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विभागीय अधिकारियों की भागीदारी
कार्यशाला में कई विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने परियोजना के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि HAM और PPP मॉडल से राज्य में शहरी आधारभूत विकास में तेजी आएगी और सार्वजनिक-निजी सहयोग के माध्यम से परियोजनाओं की निगरानी और रखरखाव सुनिश्चित होगा।

निष्कर्ष और भविष्य की दिशा
कार्यशाला के अंत में परियोजना निदेशक और एडीबी प्रतिनिधियों ने कहा कि HAM और PPP मॉडल के माध्यम से प्रस्तावित शहरी विकास कार्य न केवल वित्तीय और तकनीकी दृष्टि से मजबूत होंगे, बल्कि इसके माध्यम से राजस्थान के 296 नगर निकायों में जल, सड़क, जल निकासी, यातायात और अन्य शहरी सुविधाओं में सुधार होगा।

इस कार्यशाला से प्राप्त सुझाव और फीडबैक को परियोजना के अंतिम चरण में शामिल किया जाएगा। सभी प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की कि HAM और PPP मॉडल राज्य के शहरी विकास को गति देने और निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने में सहायक होंगे।

इस प्रकार, आरयूआईडीपी के पंचम चरण की यह कार्यशाला निवेशकों, विभागीय अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए HAM और PPP मॉडल पर मंथन करने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुई। इस पहल से न केवल शहरी आधारभूत संरचना मजबूत होगी, बल्कि भविष्य में राज्य के नगर निगमों और नगरपालिकाओं में निवेश और परियोजना क्रियान्वयन की प्रक्रिया भी पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।


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