सिविल लाइंस विधायक ने कोचिंग प्राधिकरण को बताया मायाजाल


कोचिंग कल्चर को दी एंट्रेस एग्जाम के नर्क की संज्ञा

जयपुर 25 मार्च। राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, 2025 पर चर्चा के दौरान सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए। विधायक शर्मा ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं के सिलेबस के बीच बड़ी खाई है। कोचिंग इसी खाई को पाटने वाला पुल है। जापान में इसे जुकेन जिगोकू कहा जाता है यानी एंट्रेस एग्जाम का नर्क। विधायक शर्मा ने कहा कि यदि समय रहते इस खाई को पाटा नहीं गया तो यह नर्क एजुकेशन सिस्टम का बेड़ा गर्क कर देगा।
विधायक शर्मा ने बिल में प्रस्तावित कोचिंग प्राधिकरण की स्थापना को अफसरशाही के बड़े मायाजाल की आहट बताया। उन्होंने चिंता जताई कि यह प्राधिकरण भी जयपुर विकास प्राधिकरण की तरह न बन जाए। शर्मा ने इसे लेकर उच्च शिक्षा मंत्री का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ दो बार एक तो एंट्रेंस एग्जाम के लिए और फिर नौकरी के लिए कोचिंग की जरूरत पड़ रही है। इसके लिए सिलेबस में बदलाव की जरूरत है।
शर्मा ने कहा कि आज देश में कोचिंग इंडस्ट्री 60 हजार करोड़ की हो चुकी है। इसकी एक ही वजह है हमारे एजुकेशन सिस्टम का कौलेप्स होना। किसी भी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी में जाकर देख लें तो कक्षाएं वीरान मिलेंगी और कोचिंग में जाकर देखेंगे तो खचाखच भरी मिलेंगी। यह कड़वी सच्चाई है।
इससे पूर्व विधायक गोपाल शर्मा ने शून्यकाल में पर्ची के जरिये 25 वर्ष से बंद पड़ी जयपुर मेटल्स एंड इलेक्ट्रिकल्स के श्रमिकों के वेतन और मुआवजों के लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया। शर्मा ने कहा कि 1558 कर्मचारी आज भी अपने वेतन और मुआवजे के लिए गुहार लगा रहे हैं। जबकि 500 से अधिक कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए दुनिया से जा चुके हैं। विधायक शर्मा ने कहा कि यदि सरकार इस उद्योग को पुनः शुरू करने का इरादा नहीं रखती है, तो श्रमिकों के वेतन और भत्तों का अंतिम भुगतान करके उन्हें न्याय प्रदान करे। उन्होंने उद्योग मंत्री ने इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने की मांग भी की।


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