सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों पर उमड़ी भीड़


घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के दर्शनों का दिन भर लगा रहा तांता

शिवाड़ 10 जुलाई। घुश्मेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंग महादेव मंदिर में सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं का सुबह से ही भोले बाबा के दरबार में आने का ताता लगा। दिनभर बादल छाए रहने एवं रिमझिम बारिश के चलते मौसम सुहावना बना रहा। हजारों की संख्या में महिलाएं पुरुष श्रद्धालुओं भोले बाबा के दर्शन कर मनोतिया मांगकर घुश्मेश्वर गार्डन में घूम के आनंद उठाया।
ट्रस्ट अध्यक्ष प्रेम प्रकाश शर्मा ने बताया कि सावन महोत्सव का प्रथम सोमवार होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रीय महिलाएं एवं पुरुष सुबह 8 बजे से रंग बिरंगी राजस्थानी वेशभूषा में सज धज कर आने से मंदिर परिसर क्षेत्र रंग बिरंगी रोशनी से भरा नजर आया वही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के हर हर महादेव ओम नमः शिवाय महामृत्युंजय पूजा पाठ मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक दुग्ध अभिषेक बिल्वपत्र चंदन आंकड़ा भांग धतूरा प्रसाद चढ़ाकर पूजा पाठ करते नजर आए मंदिर प्रांगण में पंडित मंत्रोच्चारण पूजा पाठ के बाद भोले की महाआरती करते नजर आए श्रद्धालु भोले बाबा के दर्शन पूजा के बाद देव गिरी पर्वत पर बने घुश्मेश्वर गार्डन में बनी लक्ष्मी मां दुर्गा 31 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा कृष्ण लीलाएं एवं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर पेड़ की छाया में उपवास व्रत खोल कर आनंद लेती नजर आ रही थी इस अवसर पर दशमेश वरिष्ठ पदाधिकारी प्रेम प्रकाश शर्मा लोकेंद्र सिंह लल्लू लाल महावर बेनी माधव शर्मा सीताराम गुर्जर शंभू दयाल मिश्रा राम राय चैधरी सत्यनारायण मिश्रा सहित अनेक सदस्य आने वाले गणमान्य व्यक्तियों मुख्य अतिथि का माला शाखा दुपट्टा पहनाकर तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।
श्रावण में विभिन्न प्रकार के शिवलिंग के पूजन का विशेष महत्व बताया गया, माना जाता है कि विशेष प्रकार के इन शिवलिंग को अलग-अलग महात्मा ने और प्रभाव होता है। शिव साधकों द्वारा विशेष प्रयोजन को सिद्ध करने के लिए भी विभिन्न शिवलिंग बनाएं और पूजे जाते हैं। शास्त्री बाबूलाल शर्मा ने बताया कि फूलों से बनाए गए शिवलिंग के पूजन व संपत्ति प्राप्त होती है। गेहूं व चावल सहित तीन आटा समान मिलाकर शिवलिंग बनाकर इसकी पूजा से स्वास्थ्य धन संतान की प्राप्ति होती है। रोगों के लिए मिश्री से बनाए गए शिवलिंग की पूजा करने से रोगों से छुटकारा मिलता है। पीपल के शिवलिंग का रुद्राभिषेक दरिद्रता निवारण करता है। पारद से बने शिवलिंग का पूजन सर्व काम वाला होता है साथ ही ऐसे शिवलिंग का पूजन समस्त पापों का नाश कर के संपूर्ण सुख एवं मोक्ष देता है। दुर्वा को शिवलिंग गूथकर उसकी पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। इसलिए अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग शिवलिंग की पूजा श्रावण मास में की जाती है।


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