क्रेशर संचालकों द्वारा नियम कानून की उड़ाई जा रही धज्जियां


क्रेशर प्लांट से ग्रामीणों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा बढ़ रहे श्वास रोगी

उड़ती धूल से बढ़ रही दिक्कत ना कबर किया ना ही सिंचाई की कोई व्यवस्था

नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे क्रेशर प्लांट

क्रेशर संचालक पर्यावरण को पहुंचा रहे नुकसान सरकार को लगा रहे राजस्व का चूना

प्रयागराज। जनपद के यमुनानगर बारा तहसील क्षेत्र के अंतर्गत परवेजाबाद में इन दिनों जहां लोग अवैध ब्लास्टिंग से परेशान है वहीं दर्जनों क्रेशर प्लांट चलाने वाले क्रेशर मालिक भी अवैध खनन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इन क्रेशर प्लान्टों में सरकार के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। क्रेशर संचालकों की मनमानियां इस हद तक बढ़ गई हैं कि प्लांट क्षेत्र को कबर ही नहीं किया गया है। पानी की सिंचाई नहीं की जा रही है वहीं वृक्षों के नाम पर एक पौधा भी नहीं लगाया गया है।ज्ञात हो कि क्षेत्र के परवेजाबाद कुछ खनन पट्टे स्वीकृत हुए है। जिस पर खनन का कार्य भी हो रहा है। जबकि सूत्रों की माने तो अवैध रूप से संचालित क्रेशर प्लांट रात के अंधेरे में पोकलैंड और डंफर की सहायता से रात भर प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध खनन करते है। जिससे समतल जमीन पर अब जगह जगह गड्ढे दिखाई देने लगे है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इन्हें कानून का कोई डर नहीं है जिससे इनके हौसले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है। नाम ना छापने की शर्त पर स्थानीय लोगों ने बताया कि परवेजाबाद क्रेशर संचालकों द्वारा जब से पोकलैंड लिया गया है। तब से उनके द्वारा क्षेत्र में उत्पात मचा हुआ है। जहां मन करता है वही ब्लास्टिंग करके खुदाई शुरू कर दिया जाता है। जब कि उनकी यहां पर कोई जमीन भी नहीं है। बताया गया कि क्रेशर प्लांट से निकलने वाले प्रदूषण से क्षेत्र के ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है। प्रदूषण से सांस लेने संबंधित बीमारी पनप रही है। रोजाना सैकड़ो बड़े वाहनों का आना-जाना है धूल का गुब्बार हमेशा फैला रहता है जिससे आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं।फसले भी खराब हो रही हैं लेकिन हम लोगों का सुनने वाला कोई नहीं है।अब सवाल यह उठता है कि इतने व्यापक पैमाने पर खनन नीति को दरकिनार करते हुए हो रहे अवैध खनन पर आखिर किसी जिम्मेदार अधिकारी की नजर क्यों नहीं पड़ी खनन पर पारदर्शिता की बात करने वाले प्रशासन की परवेजाबाद में नजर क्यों नहीं पड़ रही है। खैर मामला चाहे जो भी हो लेकिन ऐसे क्रेशर प्लांट के नाम पर कही भी ब्लास्टिंग और खुदाई कर देना राजस्व के हानि के साथ साथ शासन और प्रसासन की अवैध खनन की नीति और उनकी मंशा पर कई सवाल भी खड़े करते है।
खनन नीति की धज्जियां उड़ाने के तरीके
अवैध तरीके से क्रेशर चलाना, बिना ग्राम सभा की अनुमति के क्रेशर लगाना, सरकार के नियमों का उल्लंघन करना, पहाड़ों को खोद कर खनन करना, रात के समय ब्लास्टिंग करना, दिनभर ट्रैक्टरों से पत्थरों की ढुलाई करना शामिल है।
खनन नीति की धज्जियां उड़ाने के नतीजे
पर्यावरण को नुकसान, सरकार को राजस्व का नुकसान, ग्रामीणों की सेहत पर खतरा, दमा,टीवी व श्वास के रोगी बढ़ना, फसलों को नुकसान, सड़क दुर्घटनाएं आदि को क्रेशर संचालक बढ़ावा दे रहे हैं।


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