शासन के आदेशों के बावजूद भी बुधवार शाम को कई परिषदीय विद्यालयों का नहीं खुला ताला


शासन के आदेशों के बावजूद भी बुधवार शाम को कई परिषदीय विद्यालयों का नहीं खुला ताला

खंड शिक्षा अधिकारी को अवगत कराने के बाद भी नहीं दिखा असर शिक्षक रहे गायब लटकता रहा ताला

प्रयागराज। ब्यूरो राजदेव द्विवेदी। जनपद के यमुनानगर विकासखंड शंकरगढ़ क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में अपर राज्य परियोजना निदेशक द्वारा चंद्रमा पर चंद्रयान-3 के उतरने के सीधे प्रसारण में सम्मिलित होने हेतु बुधवार के दिन विद्यालयों को सायंकाल खोले जाने का निर्देश जारी किया गया था परन्तु क्षेत्र के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में ताले लटकते रहे और शिक्षक व बच्चे गायब रहे।भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण की खोज चंद्रयान-3 मिशन के चंद्रमा पर उतरने की प्रक्रिया का सीधा प्रसारण को परिषदीय विद्यालय के बच्चों को दिखाने हेतु अपर सचिव, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा समस्त परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों को निर्देशित किया गया था परंतु उसके बाद भी संविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय खानसेमरा में शिक्षक व बच्चे गायब रहे। स्कूल में केवल दाई ही मौके पर मौजूद रही। वहीं माडल प्राइमरी स्कूल शिवराजपुर व प्राथमिक विद्यालय हिनौती पांडे के का ताला बंद रहा।

यही कमोबेश हालत विकासखंड के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों की रही। विद्यालयों में ताला न खुलने व शिक्षकों के गायब रहने की सूचना खंड शिक्षाधिकारी, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी व जिलाधिकारी प्रयागराज को दी गई। जबकि वहीं क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गाढ़ा कटरा, प्राथमिक विद्यालय बैशा आदि के छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों संग बुधवार कि शाम 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग का सीधा प्रसारण देखा और इसरो के इस सफल अभियान के साक्षी बने। जबकि वहीं विकासखंड के कई परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक उच्च अधिकारियों के आदेशो की खुलेआम खिल्ली उड़ाते नजर आए। अगर ऐसे ही अधिकारियों के आदेश बौने साबित होते रहे तो शिक्षा के स्तर को निम्न स्तर तक पहुँचने में देर नही लगेगी। लोगों की माने तो चर्चाओं का बाजार गर्म है कि शासन के सख्त आदेश के बावजूद खंड शिक्षा अधिकारी शंकरगढ़ बीमारी का हवाला देकर छुट्टी पर चले गए जिससे परिषदीय विद्यालयों में योगी सरकार केआदेशों का ठेंगा दिखाते हुए शिक्षक गायब रहे और विद्यालयों में ताला लटकता रहा जिससे सकारात्मक कोई असर नहीं दिखा। अब देखने वाली बात यह होगी कि ऐसे लापरवाह शिक्षकों पर कार्यवाही होगी या फिर नजर अंदाज कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।


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