रुक्मणी विवाह में उमड़े श्रद्धालु मंगल गीत गाए, बधाइयां दी


कन्यादान के लिए उमड़े श्रोता सुदामा चरित्र चित्रण आज, कथा में सुनाया कृष्ण महा रास के साथ कंस वध का प्रसंग

कथा में सुनाया कृष्ण महा रास के साथ कंस वध का प्रसंग
रुक्मणी विवाह में उमड़े श्रद्धालु, मंगल गीत गाये, सुदामा चरित्र चित्रण आज

गंगापुर सिटी, 24 मार्च। पंकज शर्मा। विजय पैलेस में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन सोमवार को राष्ट्रीय संत परम पूज्य डॉ, संतोष दास महाराज के मुखारविंद से कृष्ण महारास लीला, कंस वध प्रसंग, उदभ उचाब काल, नेमि कथा, द्वारका प्रसंग, जरासंध, शिशुपाल वृतांत के साथ कृष्ण रुक्मणी विवाह को मधुर वाणी से समझाते हुए भजनों के माध्यम से बखान किया। आचार्य ने कहा कि कृष्ण चंद्र ही महारास के चंद्र हैं। श्यामसुंदर ने गोपियों को महारास में लीला करते हुए पतिक धर्म का उपदेश दिया। आचार्य ने व्याख्या करते हुए बताया कि रघुपति रघु यानी जीव पति मानी रक्षक उपदेश में बताया कि पति की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। आचार्य ने प्रणाम किसको करें, किस प्रकार करें की व्याख्या की। कथा में एकादशी व्रत कथा का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि कोई भी व्रत 12 वर्ष तक जो व्यक्ति करता है। वह भगवान का प्रिय भक्त हो जाता है। 12 वर्ष बाद ही उद्यापन करना चाहिए, जो एकादशी का व्रत करता है उसे और कोई व्रत करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

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नंद बाबा एकादशी का व्रत करते थे। पांच कमेंद्रियों, पांच ज्ञानेंद्री और मन का विश्लेषण किया। उन्होंने व्रत भजन का मतलब अनुशासन मर्यादा सब्र परमात्मा से मिलन का उद्देश्य समझाया। शबरी ने सब्र किया तो उसकी कुटिया में भगवान राम का आगमन हुआ। वृंदावन धाम की व्याख्या करते हुए भजनों के माध्यम से दर्शकों को भाव विभोर किया। आचार्य ने कहा कि ब्रज में भगवान आज भी विराजमान है। अकूर जी को भगवान ने जल के अंदर और बाहर दर्शन कराए भगवान द्वारा मथुरा नगरी पहुंचने पर भ्रमण कर हाथी वध प्रसंग के साथ कंस का वध का बखान किया। इस मौके पर सूरत से पधारे मोतीलाल गोयल और उनके परिवार के सदस्य बाबूलाल गोयल, राधा मोहन गोयल द्वारा आचार्य का स्वागत व शॉल ओढ़ाकर सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर घनश्याम दास बजाज, प्यारेलाल गर्ग, मांगीलाल रूपचंद, प्रेमचंद परिवार सहित आदि बंधुवर भी साथ थे। कथा में भागवताचार्य ने कृष्ण रुक्मणी विवाह का वृतांत मधुर वाणी और संगीतमय भजनों के माध्यम से सुनाया। कृष्ण रुक्मणी विवाह की सजीव झांकी सजाई। श्याम सुंदर भगवान की अलौकिक झांकी सजाकर भक्तों ने भजनों पर नृत्य किया। कृष्ण रुक्मणी विवाह वरमाला कार्यक्रम में पंडाल में उपस्थित महिलाओं ने मंगल गीत गाकर बधाइयां दी। इस दौरान महिलाएं व श्रद्धालु कन्यादान के लिए आतुर नजर आए। आयोजन से जुड़े वेद प्रकाश मंगल ने बताया कि कथा में मंगलवार को सुदामा चरित्र, भागवत कथा सार, भागवत पूजन के साथ एकादशी उद्यापन का कार्यक्रम रहेगा।

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