गंगापुर सिटी का धूधेश्वर धाम विकास की बाट में, पर्यटन स्थल बनाने की मांग


अरावली की गोद में बसे पौराणिक धूधेश्वर धाम को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग, दशकों से विकास कार्य अधूरे।

गंगापुर सिटी। शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर चूली ग्राम पंचायत क्षेत्र में अरावली पहाड़ियों की गोद में स्थित धूधेश्वर धाम लंबे समय से विकास की बाट जोह रहा है। धार्मिक, पौराणिक, प्राकृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण यह स्थल पर्याप्त संभावनाओं के बावजूद अपेक्षित विकास से वंचित है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और समाजसेवियों ने सरकार एवं जनप्रतिनिधियों से धूधेश्वर धाम को विकसित कर पर्यटन मानचित्र पर पहचान दिलाने की मांग उठाई है।

धूधेश्वर धाम राज-रजवाड़ों के समय से धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां सोलेश्वर रूप में भगवान शिव का मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, प्राकृतिक हरियाली, वर्षाकाल में बहने वाले झरने और गुप्त गंगा की जलधारा लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां स्नान के लिए प्राचीन कुंड भी बने हुए हैं।

वर्षाकाल में चार झरने बनते हैं आकर्षण का केंद्र

धूधेश्वर धाम का प्राकृतिक सौंदर्य वर्षाकाल में और अधिक निखर जाता है। अरावली की पहाड़ियों से बहने वाले चार बड़े झरने यहां आने वाले लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनते हैं।

श्रावण मास में आसपास के श्रद्धालु यहां पहुंचकर बेलपत्र अर्पित करने, पूजा-पाठ करने और भगवान शिव के दर्शन करते हैं। वहीं बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में लोग प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने और पिकनिक के लिए भी धूधेश्वर धाम पहुंचते हैं।

राज-रजवाड़ों के समय यहां लगती थी कचहरी

स्थानीय लोगों के अनुसार धूधेश्वर धाम का संबंध राज-रजवाड़ों के समय से रहा है। चौमासा के दौरान राजा-महाराजाओं की कचहरी भी यहां लगा करती थी। धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक महत्व से जुड़े होने के कारण यह स्थल क्षेत्र की पुरानी विरासत का हिस्सा माना जाता है।

गुप्त गंगा से लगातार जलधारा बहने की मान्यता और यहां बने बड़े कुंड भी धूधेश्वर धाम की विशेष पहचान हैं।

1990 के दशक में पर्यटन विकास का मिला था आश्वासन

समाजसेवी वेद प्रकाश मंगल के अनुसार वर्ष 1990 के दशक में नगर पालिका बोर्ड की ओर से तत्कालीन पर्यटन मंत्री नरेंद्र कंवर का धूधेश्वर धाम दौरा कराया गया था। उस समय क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का आश्वासन दिया गया था।

उन्होंने बताया कि नगर पालिका की विकास पुस्तिका के मुख्य पृष्ठ पर भी धूधेश्वर धाम के चित्र को स्थान देकर इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना का उल्लेख किया गया था। हालांकि इसके बाद अपेक्षित स्तर पर विकास कार्य नहीं हो सके।

केंद्र सरकार की टीम ने भी किया था सर्वे

वेद प्रकाश मंगल ने बताया कि वह करीब तीन दशक से धूधेश्वर धाम के विकास के लिए राज्य एवं केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

उनके अनुसार वर्ष 2008-10 के दौरान केंद्र सरकार की एक टीम ने क्षेत्र का सर्वे किया और जिला कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया हुई थी। टीम ने स्थल का दौरा किया, लेकिन इसके बाद रिपोर्ट पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।

करीब तीन करोड़ रुपये से हुआ था जीर्णोद्धार

वर्ष 2015 के आसपास तत्कालीन विधायक मानसिंह गुर्जर के प्रयासों से देवस्थान विभाग से करीब 3 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कराकर धूधेश्वर धाम में जीर्णोद्धार कार्य करवाया गया था। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की व्यापक पर्यटन संभावनाओं को देखते हुए यह विकास पर्याप्त नहीं रहा।

इसके बाद वर्ष 2021-22 में क्षेत्रीय विधायक रामकेश मीणा ने भी धूधेश्वर धाम का दौरा कर इसे पर्यटन क्षेत्र से जोड़ने और विकास कराने का आश्वासन दिया था। स्थानीय लोगों के अनुसार इस दिशा में भी अपेक्षित गति नहीं आ सकी।

मुख्यमंत्री से विकास कराने की मांग

समाजसेवी वेद प्रकाश मंगल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर धूधेश्वर धाम के समग्र विकास की मांग की है। उन्होंने कहा कि गंगापुर सिटी विधानसभा क्षेत्र में अरावली पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह पौराणिक स्थल धार्मिक एवं पर्यटन दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।

उन्होंने मांग की कि धूधेश्वर धाम में सड़क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास कराया जाए तथा इसे पर्यटन क्षेत्र के रूप में पहचान दिलाई जाए।

शिवाड़ धाम की तर्ज पर विकसित करने की संभावना

जागरूक नागरिकों का कहना है कि धूधेश्वर धाम में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। यदि प्राकृतिक एवं धार्मिक विरासत को संरक्षित रखते हुए यहां आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं तो यह सवाई माधोपुर के शिवाड़ धाम की तरह एक प्रमुख धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थल बन सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि धूधेश्वर धाम के विकास से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही गंगापुर सिटी की पर्यटन पहचान को भी मजबूती मिल सकती है।

दशकों से विकास की उम्मीद लगाए बैठे क्षेत्रवासी

क्षेत्रवासियों का कहना है कि धूधेश्वर धाम के विकास को लेकर समय-समय पर आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन अब तक इसे अपेक्षित पर्यटन केंद्र का स्वरूप नहीं मिल सका है। उनका कहना है कि यह स्थल धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक विरासत—तीनों का अनूठा संगम है।

अब लोगों को उम्मीद है कि राज्य सरकार और जनप्रतिनिधि इस पौराणिक स्थल की संभावनाओं को गंभीरता से लेते हुए धूधेश्वर धाम के समग्र विकास और पर्यटन क्षेत्र के रूप में संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।

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