दीपावली पर मिलावटी मिठाइयों की आशंका, खाद्य विभाग की जांच पर सवाल


यमुनानगर के घूरपुर, जसरा, बारा और शंकरगढ़ सहित कई कस्बों में मिठाइयों की बिक्री तेज, 160 रुपये किलो खोये की मिठाई को लेकर उठे सवाल

प्रयागराज।दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही मिठाई बाजारों में रौनक बढ़ गई है। दुकानों पर रंग-बिरंगी मिठाइयां सजने लगी हैं और खरीदारी भी तेज हो गई है। लेकिन त्योहार की इस मिठास के बीच मिलावटी खाद्य पदार्थों की आशंका लोगों की चिंता बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ कारोबारी त्योहार के दौरान अधिक मुनाफा कमाने के लिए मिलावटी मिठाइयों की बिक्री कर सकते हैं, जिससे लोगों की सेहत पर खतरा पैदा हो सकता है।

लोगों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता बाजारों में पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं दे रही है। कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि त्योहार के दौरान मिठाइयों की गुणवत्ता की जांच कौन करेगा और आमजन को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

जांच सिर्फ शहर तक सीमित क्यों, कस्बों में कब पहुंचेगी टीम?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और निगरानी केवल शहरी बाजारों तक ही सीमित क्यों दिखाई देती है? जनपद के यमुनानगर क्षेत्र के घूरपुर, जसरा, बारा, लोहगरा, शिवराजपुर, लालापुर, शंकरगढ़, नारीबारी और जारी सहित कई बाजारों में इन दिनों मिठाइयों की बिक्री जोरों पर है।

इन कस्बों में दुकानों पर ट्रे में सजी मिठाइयां, खुले में रखा खोया और रंग-बिरंगी बर्फी बेची जा रही है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों को बाजारों में खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित जांच और नमूने लेने की कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सेहत की कोई कीमत नहीं है? खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करना पूरे जिले की जिम्मेदारी है, फिर कस्बों के बाजारों में प्रभावी जांच अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा?

160 रुपये किलो खोये की मिठाई कैसे बिक रही?

स्थानीय लोगों के बीच कई दुकानों पर करीब 160 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही खोये की मिठाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का तर्क है कि जब शुद्ध खोये की कीमत ही इतनी कम नहीं होती, तो उससे तैयार मिठाई इतनी सस्ती कैसे बेची जा सकती है?

हालांकि, केवल कम कीमत के आधार पर किसी मिठाई में मिलावट की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन यह स्थिति खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच की जरूरत जरूर बताती है। लोगों को आशंका है कि कुछ मिठाइयों में खोये के स्थान पर या उसके साथ डालडा, वनस्पति, स्टार्च अथवा सिंथेटिक दूध जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा मिठाइयों में प्रतिबंधित या औद्योगिक रंगों के इस्तेमाल और चांदी के वर्क के नाम पर एल्यूमीनियम अथवा अन्य धातुओं की परत लगाए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। इन सभी आशंकाओं की वास्तविकता प्रयोगशाला जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

यदि खाद्य पदार्थों में मिलावट या असुरक्षित सामग्री का इस्तेमाल पाया जाता है, तो इसका असर विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। इसलिए त्योहार के दौरान मिठाइयों की गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी और उनकी टीम कहां है?

त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे समय में मिठाई, खोया, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच, नमूने एकत्र करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता होती है।

इसके बावजूद क्षेत्र के बाजारों में जांच अभियान की सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का पूछना है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी और उनकी टीम कहां है? क्या विभाग किसी बड़ी शिकायत या घटना का इंतजार कर रहा है? त्योहार से पहले दुकानों पर निरीक्षण और नमूना जांच की प्रभावी व्यवस्था क्यों नजर नहीं आ रही?

लोगों में नाराजगी है कि विभाग की कार्रवाई बाजारों में दिखाई देने के बजाय केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग को क्षेत्र में अपनी जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।

कस्बों के लोगों ने उठाए जांच और कार्रवाई पर सवाल

शंकरगढ़ के एक ग्रामीण ने कहा कि उनके बाजार में खाद्य विभाग की टीम कभी नहीं पहुंचती। यदि कभी संयोग से फूड इंस्पेक्टर आते भी हैं तो उनके अनुसार केवल औपचारिक कार्रवाई करके लौट जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मिलावटी मिठाई खाने से बच्चे बीमार पड़ते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

जसरा के एक दुकानदार ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कहा कि कुछ लोग सस्ती मिठाई बेचकर ईमानदारी से कारोबार करने वाले दुकानदारों की छवि भी खराब कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सभी दुकानों की निष्पक्ष जांच हो तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

वहीं, बारा की एक महिला ने चिंता जताते हुए कहा कि दीपावली पर बच्चों को मिठाई खिलाने में भी डर लगता है, क्योंकि यह पता नहीं चलता कि उन्हें कौन-सी सामग्री से बनी मिठाई दी जा रही है।

यमुनानगर के सभी बाजारों में विशेष जांच अभियान चलाने की मांग

क्षेत्रीय लोगों ने खाद्य सुरक्षा विभाग से यमुनानगर के सभी प्रमुख कस्बों और बाजारों में विशेष जांच अभियान चलाने की मांग की है। लोगों की प्रमुख मांगें हैं कि—

  • घूरपुर, जसरा, बारा, लोहगरा, शिवराजपुर, लालापुर, शंकरगढ़, नारीबारी और जारी सहित सभी बाजारों में नियमित निरीक्षण किया जाए।
  • मिठाई, खोया, पनीर और चांदी के वर्क के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।
  • मिलावट या खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
  • गंभीर मामलों में दुकान सील करने, लाइसेंस निरस्त करने और एफआईआर जैसी कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि आमजन को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जानकारी मिल सके।
  • ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन भेजकर मौके पर खाद्य पदार्थों की जांच की व्यवस्था की जाए।

त्योहार की मिठास बीमारी का कारण न बने

दीपावली खुशियों, रोशनी और आपसी प्रेम का त्योहार है। ऐसे अवसर पर लोगों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री मिलना जरूरी है। खाद्य सुरक्षा विभाग को चाहिए कि त्योहार के दौरान केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र में प्रभावी जांच अभियान चलाए।

यदि किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट या असुरक्षित सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। समय रहते जांच और निगरानी से लोगों की सेहत की रक्षा की जा सकती है, ताकि दीपावली की मिठास किसी परिवार के लिए बीमारी और परेशानी का कारण न बने।

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