शिक्षा वही सार्थक जो भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को समावेशित करें मोहन बाबा


सावन का पवित्र मास में धूकलखेडा स्कूल के विद्यार्थी प्रार्थना सभा में कर रहे ओम नमः शिवाय जाप

पर्यावरण संरक्षण एवं वर्षा जल संग्रहण की पाठशाला बना धूकलखेड़ा विद्यालय

नाथद्वारा राजसमंद जिले का खाखरमाला गांव की राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के प्रयास से उठा सदा ठंडा रहने वाले अरब सागर में मानव की अमानवीय गतिविधियो के प्रतिफल के रूप में उत्पन भूमंडलीय तापन एवं जलवायु परिवर्तन की स्थिति के फलस्वरुप उत्पन्न हुए, बिपरजोय चक्रवात ने सदा ही जलाभाव वाले मरूप्रदेश राजस्थान की धरा को मानसून से पहले ही पर्याप्त वर्षा जलनिधि उपलब्ध कराई है । जहां एक और राजस्थान के लिए वरदान के रूप में आए बिपरजोय चक्रवात के साथ आई अपार वर्षा जलनिधि को सहेज ने भी शासन प्रशासन विफल साबित हुआ है तो वहीं दूसरी ओर उदयपुर संभाग के राजसमंद जिले की आमेट पंचायत समिति क्षेत्र के संचालित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय धूलसिंह का खेड़ा, खाखरमाला के प्रकृति प्रेमी शिक्षक कैलाश सामोता ने वर्षा जल को सहेजने के लिए विद्यालय में बने अंडर ग्राउंड वाटर टैंक में विद्यालय भवन की 500 वर्ग फीट छत के पानी को टैंक में इकट्ठा करने का काम करवाया है । जिससे ना केवल वर्ष पर्यंत विद्यालय परिसर में लगे 101 पौधों को जलापूर्ति होगी, बल्कि विद्यालय में पढ़ने वाले सभा 111 विद्यार्थियों को शुद्ध पेयजल भी उपलब्ध हो पाएगा ।धूकलखेड़ा स्कूल के यूथ एंड इको क्लब प्रभारी प्रकृति प्रेमी शिक्षक कैलाश सामोता की मेहनत, रचनात्मकता एवं सर्जनशीलता द्वारा विद्यालय में नव प्रवेशीत विद्यार्थियों के लिए “एक विद्यार्थी, एक पौधा” अभियान आरंभ कर रखा है तथा सभी नव प्रवेशित विद्यार्थियों के नाम से विद्यालय परिसर में औषधीय, सजावटी तथा छायादार पौधे रोपित करवाए जा रहे हैं तथा बेजुबान परिंदों के लिए परिंडे और मोलेला की मिट्टी से निर्मित घोंसले भी लगाए जा रहे हैं जिसके चलते विद्यालय में बहुत ही प्रकृति अनुकूल वातावरण तथा पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देती है । दूसरी ओर वहीं दूसरी ओर शिक्षक सामोता की प्रेरक भूमिका से विद्यालय की दीवारें तथा संस्था प्रधान के कार्यालय की दीवारें मेवाड़ की इतिहास कुंभलगढ़ दुर्ग, चित्तौड़गढ़ दुर्ग, राजसमंद झील, सहित यहां के इतिहास पुरुषों महाराणा प्रताप, महाराणा कुंभा, महाराणा राज सिंह, वीर फत्ता, मीराबाई, हाड़ी रानी, महारानी पद्मिनी, महाबलीदानी पन्नाधाय के छायाचित्रों सहित देश की आजादी में योगदान देने वाले महापुरुषों के चित्र तैयार करवाए गए हैं ताकि मेवाड़ के इतिहास को जन-जन तक पहुंचाया जा सके संस्था प्रधान मनोज बिश्नोई ने बताया कि पहले प्रतिमाह ₹1000 का पानी विद्यार्थियों के पेयजल अथवा पौधों को पेड़ों में पानी देने के लिए चुकाना पड़ता था, लेकिन अब पंचायत समिति आमेट प्रधान के सहयोग से वर्षा जल संचय उपकरण उपलब्ध होने के कारण, वर्षा जल को सहेजा जा सकेगा और और संस्था को आर्थिक नुकसान से रिलीफ मिलेगी । भामाशाह भगवान लाल सालवी की सहयोग से विद्यालय में लगाए गए आर ओ फिल्टर उपकरण द्वारा सभी विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों को शुद्ध पेयजल नसीब होने लगा है स्थानीय अभिभावक मोहन बाबा ने बताया कि सावन के पवित्र मास के आरंभ में लगातार एक माह तक विद्यालय में प्रार्थना सभा के दौरान ओम नमः शिवाय का जाप करवाया जा रहा है जिससे विद्यालय में पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों को संस्कारवान और भारतीय संस्कृति से जोड़ने की अनूठी पहल सराहनीय है । विद्यालय में सरस्वती मंदिर स्थापना करने वाले भामाशाह रामचंद्र सालवी का कहना है कि हमारी ग्राम पंचायत खाखरमाला का यह पहला सरकारी विद्यालय है जहां विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ प्रकृति प्रेम और भारतीय संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं । संस्था को सर्वश्रेष्ठ आदर्श और प्रेरक विद्यालय बनाने की मुहिम में प्रकृति प्रेमी शिक्षक कैलाश सामोता मनोज विश्नोई, रोशनलाल, अशोक कुमावत, हुकुम सिंह, मीराबाई, अनची बाई, नारायण लाल सालवी, सहित विद्यालय विकास समिति का निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहता है ।


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