समस्याओं का समाधान स्वयं खोजें और आगे बढ़े – मुनिश्री अर्हत कुमारजी


सवाई माधोपुर 31 दिसम्बर। सुखमय जीवन के लिए व्यक्ति को तीन चीजों से बचकर रहना चाहिए। हरी (जल्दबाजी), वरी (चिंता) और करी (तामसिक आहार)। जल्दबाजी से बनते हुए कम बिगड़ जाते है। भोजन करते समय जल्दबाजी से दांतों का काम आंतों को करना पड़ता है जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हाइवे पर साठ की स्पीड से चलोगे तो बार बार मिलोगे और एक सौ बीस की स्पीड से चलोगे तो हरिद्वार में मिलोगे इसलिए शैतानियत के काम जल्दबाजी से बचे। चिंता भी हमारे लिए अहितकर कर है। चिंता की बजाय चिंतन को स्थान देने से ही जीवन सार्थक बन सकता है। ये विचार युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण के विद्वान सुशिष्य मुनिश्री अर्हत कुमारजी ने तेरापंथ भवन आदर्शनगर में एक धर्म सभा में व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि अधिक मिर्च मसालेदार तामसिक आहार स्वस्थ को रोगी बनाता है। मैदा, मावा और फास्ट फूड का अनियंत्रित प्रचलन शरीर को रुग्ण बना रहा है। खाद्य संयम से यह रुग्णता हमारी मेहमान नहीं बनती है। समस्याओं का समाधान हमारे पास ही मौजूद है। चाबी ताले को बंद करती है और उसी से ताला खुल जाता है यानि समस्याओं का समाधान हमारे पास ही है। हम चिंता को चिंतन से बदले, जल्दबाजी से बचे और खाद्य संयम को अपना कर अपने जीवन को उन्नत बनाने की दिशा में गमन करें।
मुनिश्री भरत कुमारजी ने तीर्थंकरों को लोक में स्थायी प्रकाश करने वाले बताते हुए कहा कि सूर्य और चंद्रमा अल्प समय के लिए प्रकाश करते है किंतु वीतराग प्रभु सारे जगत को स्थाई रूप से प्रकाशित करते है। उनके पंच कल्याणक नरक के जीवों को भी एक मुहूर्त के लिए शांति प्रदान करते है ऐसे प्रभु की वाणी कल्याणकारी है।
इससे पूर्व मुनिश्री अर्हत कुमारजी, भरत कुमारजी एवं जयदीप कुमारजी इंदौर चातुर्मास परिसंपन्न कर पद विहार करते हुए सवाई माधोपुर पहुंचे जहां आस्था सर्किल पर धर्मानुरागी भाई-बहिनों ने उनकी अभिवंदना की और पंक्तिबद्ध अनुशासित जुलूस के रूप में तेरापंथ भवन आदर्श नगर तक पहुंचाया।


WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now