घोटेश्वर महादेव मंदिर पर ध्वजा चढ़ायी


बडोदिया। पांडवों के अज्ञातवास स्थल मेले में सोमवती अमावस्या के मुख्य मेले में प्रात:सात बजे से ही बांसवाडा डुंगरपुर सहित मध्य प्रदेश व गुजरात से हजारो मेलार्थी के आगमन से मेले की रोनक बढने लगी । । मेला स्थल से लेकर मंदिर तक सडक पुरी तरह से श्रद्धालुओं से भरी पडी थी कोई आ रहा है तो कोई जा रहा है । श्रद्धालुओं ने धाम पर दर्शन पूजन के पश्चाेत पवित्र गंगा कुण्ड में स्नान कर सुख एवं आयोग्य की कामना की । घोटिया आंबा धाम पर देवालयों,मठ व पावन जल कुण्डो पर श्रद्धालुओं की संख्या तीसरे दिन अधिक रही । मुख्य मंदिर पर रामगिरी महाराज, हिरागिरी महाराज का सानिध्य पाकर साधु संत भगत मंडली व श्रद्धालु दर्शन लाभ ले रहे है । आदिवासीयों के इस धाम के देवालयों में घोटेश्वर शिवालय प्रमुख के गर्भ ग्रह में पाटलवर्णी शिवलिंग के अलावा पांचो पांडवों के साथ माता कुंती व भगवान श्री क्रष्ण की आकर्षक धवल प्रतिमाओं का श्रंगार विशेष रूप से किया गया । जिसके दर्शन करने के लिए सोमवती अमावस्या‍ को श्रद्धालुओं की अधिकता के कारण दर्शन के लिए लोगों को पुलिस प्रशासन द्वारा कतार में लगाना पडा । सोमवार को सोमवती अमावस्‍या को अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर श्रीफल वधेर रहा था तो कोई पवित्र स्नान व दान पूण्य का लाभ ले रहा था। मंदिर स्थल पर सबसे ज्यादा फुलो के हार प्रसादी व नारीयल की बिक्री भी जमकर हुई। गोमुख से निकलती जलधारा की एक बुंद—- धाम पर भगवान हनुमान व वाल्मिकी मंदिर प्राचीन कुण्डो भी जिसका पवित्र जल अपने घर ले जाने के लिए हर कोई लालायित रहता है । श्रद्धालुओं की यह मान्यता है कि इसका जल ले जाकर परिवार के रोगी को पिलाने से दुख दर्द दुर हो जाते है। छोटा उदयपुर के सवजी भाई ने बताया कि गंगा कुण्ड के पवित्र जल से मवेशियो पर छिडकाव करने से उनका आरोग्य बढता है। समाज सेवी मणिलाल रावत ने बताया कि घोटेश्वर महादेव मंदिर से एक किमी दुर स्थित केलापनी स्थल पर पहूंचने वाले श्रद्धालु की दिन भर भीड लगी रही अपनी पद यात्रा पूर्ण कर दर्शन लाभ लिया एवं वहां पर केले एवं अन्य व्रक्षो के दर्शन कर उस युग की कल्पना को याद करने लगे जब पांडवों ने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में आकर केलो के पत्तो पर भोजन किया था और आज वही बडे बडे व्रक्ष खडे हो गए है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु नए आने वाले श्रद्धालु को केलापानी का इतिहास तथा इन व्रक्षो को बताकर पांडवो के युग को याद करते है । केला पानी स्थित गौ मुख से बहती जलधारा को पाने के लिए हर कोई लालायित था। समाज सेवी मणिलाल रावत ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी रावत परिवार की और से बारीगामा के भक्त पदयात्रा करते हुए घोटेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे जहां पर सरपंच ललीता रावत के सानिध्य में रावत परिवार ने मुख्य मंदिर एवं धुणी स्थित ध्वजा चढाई तथा प्रसाद वितरण किया ।

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