भीलवाड़ा में पहली बार माता वैष्णो देवी गुफा दरबार के समक्ष 5100 अखंड दीपकों से हिन्दू राष्ट्र की कामना


भीलवाड़ा|चैत्र प्रतिपदा नवरात्रि के पावन अवसर पर भीलवाड़ा स्थित हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में भारतवर्ष के इतिहास में पहली बार 5100 अखंड दीपकों की ज्योति जलाकर माता वैष्णो देवी दरबार की दिव्य गुफा के समक्ष हिन्दू राष्ट्र की कामना के साथ भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन महंत बाबू गिरी महाराज की पहल पर महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सान्निध्य में पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो रहा है।

आश्रम में माता वैष्णो देवी का दरबार 120 फीट लंबी विशाल गुफा में निर्मित किया गया है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर माता के दर्शन कर रहे हैं और 5100 अखंड दीपकों की आलौकिक ज्योति का पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। पंकज आडवाणी ने जानकारी दी कि यह आयोजन नव संवत्सर की शुरुआत पर राष्ट्र और धर्म की एकता का प्रतीक बन गया है।

आश्रम में चल रहे सनातन सत्संग पखवाड़े के अंतर्गत प्रतिदिन रात्रि 8 से 10 बजे तक भजन संध्या का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें डॉ. विष्णु सांगवत एवं उनकी मंडली द्वारा मधुर भजनों की प्रस्तुति दी जा रही है। इस धार्मिक आयोजन में मातृशक्ति की भी प्रभावी भागीदारी देखने को मिल रही है।

इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से संत-महात्मा, श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ता पहुंच रहे हैं। चावंड उदयपुर से मेवाड़ महामंडलेश्वर स्वामी हितेश्वरानंद सरस्वती, पंचमुखी दरबार के महंत लक्ष्मण दास जी त्यागी, संत हिरदाराम नगर के संत तुलसी कलतारी, भारतीय सिंधु सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र तीर्थाणी, अहमदाबाद से रमेश अभिचंदानी व जयराम अभिचंदानी, चित्तौड़गढ़ से मनोज मेठानी, अजमेर से प्रकाश मूलचंदानी, सूरत से अशोक आहूजा सहित देश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु दर्शन हेतु पधार रहे हैं।

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मेवाड़ महामंडलेश्वर स्वामी हितेश्वरानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि, ष्5100 दीपकों का प्रकाश इतना दिव्य और प्रभावशाली है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं माता वैष्णो देवी धरती पर पधारकर अपने भक्तों को आशीर्वाद दे रही हैं। भीलवाड़ा की यह पुण्यभूमि निश्चित ही भाग्यशाली है जिसे माँ भगवती ने अपने दरबार हेतु चुना है।ष्

इस भव्य आयोजन में संत मयाराम, संत राजाराम, संत गोविंदराम, ब्रह्मचारी इंद्रदेव, कुनाल, सिद्धार्थ, मिहिर, गजानंद बजाज, कन्हैयालाल स्वर्णकार, बद्रीलाल सोमानी, हीरालाल गुरनानी, गोपाल नानकानी, इंद्र अवतानी, रमेश नेभवानी, देवीदास गेहानी, महेश नावानी, राजा टिकयानी, लक्ष्मण लालवानी, विजय मोटवानी, सूरज सेन, परमानंद तनवानी, दिनेश अमरवासी, राजकुमार खुशलानी, स्वरम त्रिपाठी, दिव्यांशु दाधीच, अक्षत सोनी सहित बड़ी संख्या में सनातनी श्रद्धालु उपस्थित रहे।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बन गया है, बल्कि राष्ट्र की अखंडता, धर्म की गरिमा और सनातन संस्कृति की जागरूकता का संदेश भी दे रहा है। 23 मार्च से शुरू हुए इस सत्संग पखवाड़े का समापन 6 अप्रैल को राम नवमी के दिन होगा, जिसमें विशेष पूजन, भजन और महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा।


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