गंगापुर सिटी: श्रद्धा के साथ मनाया गया भगवान शांतिनाथ का मोक्ष कल्याणक, मुनिश्री विलोक सागर बोले- ‘मृत्यु को महोत्सव बनाना सिखाता है जैन धर्म’

सिंयाजी मंदिर में उमड़ा जनसैलाब; मुनिश्री के सानिध्य में चढ़ाया गया निर्वाण लाडू, विश्व शांति के लिए हुई शांतिधारा

गंगापुर सिटी।पंकज शर्मा। स्थानीय दिगंबर जैन नसिंयाजी मंदिर में 16वें तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव अत्यंत भक्तिभाव और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बुधवार को आयोजित इस कार्यक्रम में पूरा मंदिर परिसर “जय-जय शांतिनाथ” के जयकारों से गुंजायमान रहा। प्रातःकाल से ही श्रद्धालु भगवान के अभिषेक और पूजन के लिए मंदिर पहुंचने लगे थे।

मुनिश्री का पावन सानिध्य

इस पावन अवसर पर परम पूज्य मुनिश्री 108 विलोक सागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108 विभोर सागर जी महाराज ससंघ विराजमान रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक अभिषेक एवं पूजन से हुआ, जिसके बाद धर्मसभा का आयोजन किया गया।

मृत्यु को महोत्सव बनाने की कला

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विलोक सागर जी ने कहा, “आज ही के दिन तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान ने मोक्ष प्राप्त किया था। जैन धर्म केवल जीवन जीने की कला ही नहीं, बल्कि मृत्यु को महोत्सव बनाना भी सिखाता है।” उन्होंने श्रद्धालुओं को सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह जैसे पंचमहाव्रतों का पालन करने का संदेश दिया।

निर्वाण लाडू और शांतिधारा

मुनिश्री के मुखारविंद से विश्व शांति की मंगल कामना के साथ शांतिधारा की गई। इसके पश्चात सकल दिगंबर जैन समाज के सैकड़ों धर्मावलंबियों ने भगवान के समक्ष मोक्ष की कामना करते हुए निर्वाण लाडू अर्पित किया। समाज के अध्यक्ष प्रवीण जैन गंगवाल ने बताया कि मुनिसंघ के सानिध्य में प्रतिदिन अभिषेक, प्रवचन और सायंकाल शंका समाधान कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें:

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now