कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ ने 37 वोट हासिल कर भाजपा के विजय कुमार गुप्ता को हराया
गंगापुर सिटी। पंकज शर्मा। गंगापुर सिटी नगर परिषद की राजनीति में सोमवार को करीब 15 साल बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला। सभापति पद के चुनाव में कांग्रेस के कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ ने 37 वोट हासिल कर भाजपा प्रत्याशी विजय कुमार गुप्ता को पीछे छोड़ते हुए सभापति पद पर जीत दर्ज की। उपलब्ध चुनाव परिणामों के अनुसार सभापति चुनाव में विजय कुमार गुप्ता को 23 वोट मिले। इस परिणाम के साथ नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनने का रास्ता साफ हो गया।
नगर परिषद के 60 वार्डों के चुनाव परिणाम में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई थी। वहीं भाजपा को 17 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 16 वार्डों में जीत मिली थी। परिषद में सभापति चुनाव के लिए बहुमत का आंकड़ा 31 पार्षदों का था। ऐसे में चुनाव से पहले ही निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
सभापति पद के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ को 37 पार्षदों का समर्थन मिला। उन्होंने आवश्यक बहुमत के आंकड़े 31 से अधिक वोट हासिल करते हुए सभापति पद अपने नाम कर लिया। दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी विजय कुमार गुप्ता को 23 वोट मिले। 60 सदस्यीय परिषद में सामने आए इस परिणाम ने सभापति चुनाव के बाद बने राजनीतिक समीकरण को स्पष्ट कर दिया।
कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ वार्ड 30 से कांग्रेस के पार्षद निर्वाचित हुए थे। वार्ड 30 के चुनाव परिणाम में उन्हें 858 वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर 519 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। चुनाव परिणामों में वार्ड 30 से कृष्ण कुमार के कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित होने की पुष्टि हुई है।
15 साल बाद बदला नगर परिषद का राजनीतिक समीकरण
गंगापुर सिटी नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनने की स्थिति को स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। मूल चुनावी परिणामों के अनुसार पिछले करीब 15 वर्षों से नगर परिषद में भाजपा का राजनीतिक प्रभाव रहा था। इस बार हुए नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई।
हालांकि कांग्रेस के पास अपने दम पर 31 पार्षदों का बहुमत नहीं था। भाजपा के 17 और निर्दलीय प्रत्याशियों के 16 पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसलिए सभापति चुनाव के दौरान विभिन्न पार्षदों के समर्थन का समीकरण महत्वपूर्ण हो गया था। अंततः कांग्रेस प्रत्याशी को 37 वोट मिलने से सभापति पद का चुनाव कांग्रेस के पक्ष में गया।
सभापति चुनाव के परिणाम के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है। वहीं इस परिणाम के साथ नगर परिषद की राजनीति में नया समीकरण सामने आया है। कांग्रेस के 27 निर्वाचित पार्षदों के अलावा सभापति चुनाव में उसे अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन मिला, जिसके बाद कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ 37 वोट हासिल कर सभापति निर्वाचित हुए।
नई परिषद के सामने अब शहर की मूलभूत सुविधाओं, विकास कार्यों और आमजन से जुड़े मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी। नगर परिषद के आगामी कार्यकाल में स्थानीय विकास और जनसमस्याओं से जुड़े विषयों पर परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
विधायक रामकेश मीणा की भूमिका रही चर्चा में
कांग्रेस के इस राजनीतिक बदलाव में गंगापुर सिटी विधायक रामकेश मीणा की भूमिका भी चर्चा में रही है। सभापति पद के लिए नामांकन के दौरान कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ विधायक रामकेश मीणा के साथ पहुंचे थे। उस समय विधायक रामकेश मीणा ने कहा था कि 60 वार्डों में कांग्रेस ने 27 वार्डों में जीत दर्ज की है और निर्दलीय पार्षद भी कांग्रेस के साथ आ रहे हैं।
विधायक रामकेश मीणा ने कृष्ण कुमार गोयल को सभापति पद का दावेदार बताते हुए करीब 38 पार्षदों के समर्थन का दावा किया था। चुनाव से पहले सामने आए इस दावे के बाद सभापति चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और समर्थन का समीकरण चर्चा में रहा था।
विधायक रामकेश मीणा ने उस दौरान शहर की जनता से किए गए वादों को पूरा करने तथा स्वच्छ छवि और ईमानदार व्यक्ति को सभापति बनाने की बात कही थी। बाद में हुए सभापति चुनाव में कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ के पक्ष में 37 वोट पड़े। इस परिणाम के बाद विधायक की चुनावी भूमिका को लेकर स्थानीय राजनीतिक चर्चा भी सामने आई।
हालांकि, उपलब्ध चुनाव परिणाम से इतना स्पष्ट है कि कांग्रेस के 27 निर्वाचित पार्षदों के अलावा अन्य पार्षदों का समर्थन भी सभापति चुनाव में उसके प्रत्याशी को मिला। 16 निर्दलीय पार्षदों की संख्या इस पूरे चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण थी। चुनाव परिणाम में कांग्रेस प्रत्याशी को कुल 37 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी विजय कुमार गुप्ता को 23 वोट मिले।
निर्दलीय पार्षदों की भूमिका से बदला समीकरण
गंगापुर सिटी नगर परिषद के 60 वार्डों के चुनाव परिणाम ने शुरुआत से ही सभापति चुनाव के लिए अलग राजनीतिक समीकरण तैयार कर दिया था। कांग्रेस को 27, भाजपा को 17 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 16 सीटें मिली थीं। इस प्रकार किसी भी प्रमुख दल के पास अपने दम पर 31 पार्षदों का बहुमत नहीं था।
इस वजह से सभापति चुनाव में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को महत्वपूर्ण माना जा रहा था। चुनाव से पहले उपलब्ध परिणामों में भी यही स्थिति सामने आई थी कि कांग्रेस सबसे बड़ा दल होने के बावजूद बहुमत के आंकड़े से चार सीट पीछे थी। वहीं भाजपा के पास 17 सीटें थीं और 16 निर्दलीय पार्षद निर्णायक संख्या में थे।
सभापति चुनाव में कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ को 37 वोट मिले। बहुमत के लिए 31 वोट आवश्यक थे। इस प्रकार कांग्रेस प्रत्याशी ने आवश्यक बहुमत से छह वोट अधिक हासिल किए और सभापति पद पर निर्वाचित हुए। वहीं भाजपा प्रत्याशी विजय कुमार गुप्ता को 23 वोट मिले।
इस परिणाम के साथ गंगापुर सिटी नगर परिषद में सत्ता का राजनीतिक समीकरण बदल गया। करीब 15 साल बाद कांग्रेस ने नगर परिषद में बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल की है। चुनाव परिणाम ने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ड चुनाव के बाद पार्षदों के बीच बने राजनीतिक समीकरण ने सभापति चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वेद प्रकाश मंगल ने जताई खुशी
कांग्रेस नेता वेद प्रकाश मंगल ने कांग्रेस का बोर्ड बनने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि करीब 15 वर्षों से भाजपा के शहरी शासन से आम जनता आहत हो रही थी और विकास के कोई कार्य नहीं हो रहे थे। उन्होंने कहा कि इस बार जनता ने कांग्रेस पार्टी पर विश्वास जताते हुए कांग्रेस का बोर्ड बनाया है।
वेद प्रकाश मंगल ने कहा कि कांग्रेस का बोर्ड बनने के बाद आमजन के जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, शहर में विकास के नए आयाम स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के प्रति खुशी व्यक्त करते हुए इस परिणाम को कांग्रेस के पक्ष में जनता के विश्वास से जोड़ा।
मंगल के अनुसार, कांग्रेस के बोर्ड से शहर में जनहित के कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। उनके बयान में आम जनता की समस्याओं और विकास कार्यों को नई परिषद की प्राथमिकता बनाने की बात कही गई है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल
कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ के सभापति निर्वाचित होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी का माहौल है। करीब 15 वर्ष बाद कांग्रेस को नगर परिषद में बोर्ड बनाने का अवसर मिलने से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।
वहीं, चुनाव परिणाम के बाद नई परिषद के सामने शहरवासियों की अपेक्षाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। नगर परिषद के स्तर पर होने वाले जनहित और विकास कार्य अब नई राजनीतिक व्यवस्था के तहत आगे बढ़ेंगे।
सभापति चुनाव के परिणाम ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह बढ़ाया है। दूसरी ओर, परिषद में निर्वाचित पार्षदों की संख्या और सभापति चुनाव में पड़े वोटों के बीच बने समीकरण ने स्थानीय निकाय की राजनीति में बदलाव को स्पष्ट किया है।
जनता की उम्मीदें बढ़ीं
15 वर्ष बाद नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनने के साथ शहरवासियों की नई परिषद से उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। चुनाव के दौरान विभिन्न वार्डों में स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दे सामने आए थे। अब निर्वाचित पार्षदों और सभापति के सामने उन समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी होगी।
कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ के सभापति बनने के बाद कांग्रेस ने नगर परिषद में अपना बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल कर ली है। 60 वार्डों के चुनाव में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई थी, जबकि भाजपा को 17 और निर्दलीयों को 16 सीटें मिली थीं। इसके बाद सभापति चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को 37 वोट मिलना बोर्ड गठन के लिए निर्णायक रहा।
चुनाव परिणामों ने यह भी दिखाया कि इस बार मुकाबला केवल दो प्रमुख दलों तक सीमित नहीं रहा। निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी बड़ी संख्या में जीत दर्ज की और सभापति चुनाव में उनका समर्थन महत्वपूर्ण रहा। इस राजनीतिक समीकरण के बीच कृष्ण कुमार गोयल ‘कुबेर’ ने सभापति पद हासिल किया।
अब कांग्रेस के सामने नगर परिषद के प्रशासन और विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। शहर की सड़क, सफाई, पेयजल, रोशनी, नालियों, यातायात व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे नई परिषद के सामने प्रमुख रहेंगे।
नई परिषद के कार्यकाल में शहर के विकास और आमजन से जुड़े मुद्दों पर होने वाले निर्णय महत्वपूर्ण होंगे। वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा बोर्ड बनने को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
गंगापुर सिटी नगर परिषद के नए बोर्ड से अब शहरवासियों को विकास कार्यों में तेजी, जनसमस्याओं के समाधान और नगर परिषद की कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद है। आने वाले समय में नई परिषद के सामने इन अपेक्षाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी रहेगी।

Gangapur City, Rajasthan
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