पीठ में बह रही है धर्म की गंगा ,,
,,लबाना समाज द्वारा शिव महापुराण कथा उमड़ रहे हैं भक्तजन
कुशलगढ़| पीठ सलारेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही शिव कथा के पांचवें दिन गुरुवार की कथा में व्यासपीठ से कथा मर्मज्ञ आचार्य जैमिन शुक्ल ने बेटियों को शादी के समय सात फेरों में के समय लिए सात वचनों को हमेशा ही याद रखने का आव्हान किया जिससे उनका वैवाहिक जीवन सुखी और आनंदमयी बन सके। कथा मर्मज्ञ आचार्य जैमिन शुक्ल ने कहा कि पतिव्रता नारी पूज्यनीय होती है, उसे निंदा से दूर रहना चाहिए। आचार्य ने कहा कि पतिव्रता नारी की तुलना गंगा ओर गाय के समान की गई है। हमेशा निंदनीय लोगों से दूरी बनाएं रखने की नसीहत देते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन में पीहर पक्ष का दखल नहीं होना चाहिए। आचार्य ने गौ माता की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गौ माता पृथ्वी का प्रतीक है। गौ माताएं नहीं रहेगी तो ये दुनिया नहीं रहेगी। युवाओं को गौ माता का रक्षण करने का आव्हान करते हुए कहा कि गौ माता में भगवान हरि का वास होता है। उन्होंने कहा कि जिस घर में गौ माता की सेवा होती है उस घर में माता लक्ष्मी का वास सदैव रहता है। आचार्य ने नरसिंह मेहता और सवारियां सेठ का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जीवन में जब भी कोई अच्छा काम हो तब भगवान का आभार जरूर जताना चाहिए। उन्होंने कथा के दौरान नृसिंह मेहता का भजन ” मारी हुंडी स्वीकारों महाराज रे, शामडा गिरधारी” भजन पर पांडाल में मौजूद श्रद्धालु झूम उठे। आचार्य जैमिन शुक्ल ने कहा कि कर्म का फल कभी भी पीछा नहीं छोड़ता है,उसे भुगतना ही पड़ता है। आचार्य ने दांपत्य जीवन में आ रही कड़वाहट को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि विवाह संबंध को लेकर शास्त्रों में रीति रिवाज का उल्लेख है लेकिन विवाह संबंध विच्छेद करने का कोई रीति रिवाज नहीं है। आचार्य ने कहा कि कुछ पढ़ी लिखी बेटियां मां बाप के अरमानों पर पानी फेर कर प्रेम प्रसंग में फंस जाती हैं। प्रेम विवाह कर लेती है। जिनके लिए आचार्य ने कहा कि मां बाप का दिल दुखाने वाली संतान कभी भी सुखी नहीं रह सकती है। जिस किसी भी औलाद ने अपने मां बाप को रुलाया उसे भगवान भी कभी माफ नहीं करते हैं। आचार्य जैमिन शुक्ल ने रामायण में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का प्रसंग के माध्यम से बताया कि भगवान श्री राम ने अपने माता पिता की आज्ञा का पालन करने राज्य से वनवास धारण किया। माता सीता ने अपने पति का साथ देने उनके साथ वनवास को चली गई। पांचवें दिन की कथा के अंतिम पड़ाव में शिव माता पार्वती विवाह प्रसंग में बारात की विदाई प्रसंग को सुनाया। वहीं व्यासपीठ पर कथा मर्मज्ञ आचार्य जैमिन शुक्ल का क्षत्रिय वागड़ महासभा ब्लॉक सीमलवाड़ा की ओर से देवेंद्र सिंह सौंलंकी, धंबोला ब्राह्मण समाज की ओर से कन्हैया लाल पंड्या, पीठ दिगम्बर जैन समाज की ओर से राजकुमार जैन, विद्यानिकेतन पीठ स्टाफ ने स्वागत अभिनंदन किया। लबाना समाज ग्यारह गौत्र नायक कालू सिंह झाड सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। ,,शिव विवाह के बाद पार्वती जी की बिदाई प्रसंग,,
आचार्य श्रीने शिव विवाह के बाद पार्वती जी की बिदाई प्रसंग को सुनाया । “”मुझ द्वारे से ओ पंखिड़ा हंसता मुखड़े जाजो रे,विदाई समय ओ पंखिड़ा गीत मधुर गाजो,,,
इस भजन से महिलाएं की आंखें नम हो गई,, विदाई को लेकर भक्ति भावविभर हुए
शिव पुराण की कथा से संतानहीन लोगों सतांन की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही गंभीर रोगों से भी समस्त परिवार के मुक्ति मिलती है। शिव पुराण में इस बात का भी वर्णन मिलता है कि शिव पुराण के श्रवण करने वाले साधकों को शिवलोक में स्थान मिलता है।