हरियाणा सरकार ने विज्ञापनों पर सात महीने में खर्च किये अरबों


आरटीआई एक्टीविस्ट राजेन्द्र सिंह एडवोकेट ने किया खुलासा

नई दिल्ली 13 जनवरी। पिछली हरियाणा सरकार में चुनावों से पूर्व सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग ने मात्र सात महीने सत्रह दिनो में सरकार की उपलब्धियां बताने वाले विज्ञापनों पर एक अरब छत्तीस करोड़ छिअत्तर लाख छह हजार नौ सौ अठारह रूपये खर्च कर दिए। इसका खुलासा आरटीआई द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट और हिन्दुस्तान शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेन्द्रसिह तोमर राजा भईया ने किया है।
राजा भैया ने बताया कि उन्हें सूचना अधिकार अधिनियम के तहत एसपीआईओ कम ज्वॉइंट डायरेक्टर एडमिन के द्वारा सूचना दी गई है कि इस अवधि में सरकार की उपलब्धियां बताने वाले विज्ञापनों के भुगतान हेतु 1 जनवरी 2024 से 17 अगस्त 2024 तक प्रिंट मीडिया को 76,60,87,657 रूपये और इलैक्ट्रोनिक मीडिया को 60,15,81,522 रूपये के भुगतान किए गए हैं। साथ ही भुगतान वसूलने वाले अखबारों की सूची भी उन्हें दी गई है। परन्तु इलैक्ट्रोनिक मीडिया में किन किन को भुगतान किया गया है उसकी कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई ?
राजा भैया ने बताया कि मुख्यतः हमारा हरियाणा नॉन स्टॉप हरियाणा के नाम से विज्ञापन प्रकाशित कराए गए थे। दी गई सूची में ऐसे तमाम तीन सौ बीस समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के नाम हैं जिन्हें ये भुगतान किया गया है। परन्तु ज्यादातर वह समाचार पत्र हरियाणा राज्य में ना तो प्रसारित है और ना ही वहां से प्रकाशित होते हैं। हरियाणा राज्य से बाहर अन्य राज्यों से ही प्रकाशित होते हैं और अन्य राज्यों में ही प्रसारित होते हैं।
राजा भईया ने इसे तत्कालीन हरियाणा सरकार द्वारा मात्र वाहवाही लूटने के लिए उनसे व जनता से वसूले टैक्स के रुपयों की बर्बादी बताते हुये जनहित में केंद्रीय सतर्कता आयोग के मुख्य आयुक्त, निदेशक सीबीआई और हरियाणा राज्य के मुख्यसचिव को लिखित शिकायतें की है। उन्होंने शिकायतों और आरटीआई से प्राप्त सूचनाओं की प्रतियां पत्रकारों से साझा करते हुऐ कहा कि इतनी बड़ी रकम राज्य की जनता कि भलाई के लिए अन्य कार्यों जैसे जनहित, न्यायहित, स्वास्थ्यहित, शिक्षाहीत, रोजगारहित, सुरक्षाहित आदि पर खर्च की जाती तो इसका लाभ सीधे जनता को मिलता। इतनी बड़ी रकम को केवल सरकार ने अपनी वाह वाही लूटने के लिए सिर्फ विज्ञापनों पर खर्च कर दिया ये ना तो न्याय संगत है और ना ही जनहित में है, यह सीधे सीधे राजस्व के दुरूपयोग का मामला है और इस प्रकार खर्च की गई रकम का कैसा भी कोई लाभ आम जनता को नहीं मिला है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की और, इतनी बड़ी रकम का दुरूपयोग कर भुगतान करने, संबंधित लोगों, फार्मों को विज्ञापन देने तथा उनके दिए बिलों को पास करने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों, अधिकारियों व कर्माचारियों एवं राजनैतिक संबंधित व्यक्तियों, संबंधित ऑन लाईन सॉफ्टवेयरों आदि के विरुद्ध जांच कराने और उचित कानूनी एवं विभागीय कार्यवाही करने की बात करते हुऐ शिकायतें दर्ज कराई है।


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